झारखंड के धर्मस्थल को लेकर नाराज़ जैन धर्म के लोग, दिल्ली में आमरण अनशन

इमेज कैप्शन, दिल्ली में 26 दिसंबर से आमरण अनशन भी जारी है. कई लोग क्रमिक अनशन कर रहे हैं
    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

झारखंड में जैन तीर्थस्थल को पर्यटन स्थल बनाए जाने के प्रस्ताव के विरोध में जैन धर्म पूरे देश में आंदोलन कर रहा है.

जैन धर्म का यह पवित्र स्थल झारखंड के गिरीडीह ज़िले में पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित है. माना जाता है कि जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थांकरों ने यहीं निर्वाण प्राप्त किया था.

जैन धर्म के दोनों पंथ दिगंबर और श्वेतांबर इस स्थल में आस्था रखते हैं.

जैन धर्म के अनुयायियों ने कर्नाटक, दिल्ली और झारखंड समेत देश के कई हिस्सों में सरकार के इस क़दम का विरोध करते हुए शांति मार्च भी निकाला है.

इसी सिलसिले में जैन समुदाय के लोग दिल्ली के ऋषभ विहार इलाक़े में 26 दिसंबर से आमरण अनशन भी कर रहे हैं.

जैन समुदाय के लोग इस पवित्र स्थल को 'श्री सम्मेद शिखर' कहते हैं और ये झारखंड की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है.

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इमेज कैप्शन, मध्य प्रदेश में जैन समाज का प्रदर्शन

23 जनवरी को सुनवाई

मीडिया को दिए एक बयान में श्री दिगंबर जैन समाज के सचिव अनिल कुमार ने कहा है, "ये हमारे समाज का पवित्र स्थल है, ये विडंबना है कि झारखंड सरकार इसे पर्यटन स्थल घोषित कर रही है. पर्यटन स्थल बनाए जाने के बाद लोग मनोरंजन करने के लिए यहां आ सकेंगे जिससे इस स्थल की पवित्रता पर असर होगा."

इस मामले में झारखंड के अल्पसंख्यक आयोग ने भी झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है और ये मुद्दा उठाया है.

झारखंड अल्पसंख्यक आयोग अब इस मामले में 23 जनवरी को सुनवाई करेगा. जैन समुदाय के लोग इस स्थल को 'पवित्र स्थल' घोषित करने की मांग भी कर रहे हैं.

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'अवैध खनन जारी'

दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठे सौरभ जैन कहते हैं, "श्री सम्मेद शिखर हमारा पवित्र स्थल है जिसे अपवित्र करने के प्रयास किए जा रहे हैं. हम चाहते हैं कि इसे पवित्र स्थल घोषित किया जाए."

जैन समुदाय का आरोप है कि इस पहाड़ी इलाक़े में अवैध खनन और पेड़ों का कटान भी हो रहा है जिसे रोका जाए.

सौरभ जैन कहते हैं, "पर्यावरण संरक्षक के लिए अवैध कटान और खनन रोका जाए. पहाड़ का संरक्षण भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों का विषय है."

फ़रवरी 2018 में तत्कालीन झारखंड सरकार ने इस जगह को ईको-सेंसिटिव ज़ोन (पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र) बनाने की सिफारिश की थी.

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इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में प्रदर्शन

सौरभ जैन कहते हैं, "केंद्रीय वन मंत्रालय ने इस पर प्रारंभिक गजट नोटिफ़िकेशन निकाला और इसे दो बड़े अख़बारों में विज्ञापन देकर सार्वजनिक नहीं किया. कोई गजट नोटिफ़िकेशन आता है तो जनता से उस पर आपत्ति मांगी जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ. इसे सिर्फ़ वेब पोर्टल पर लाया गया."

सौरभ जैन दावा करते हैं कि इस गजट नोटिफ़िकेशन के लिए सिर्फ़ 16 पत्थर कारोबारियों के आपत्ति सुझाव आए थे जिनमें कोई जैन नहीं था. इसी के बाद ये नोटिफ़िकेशन जारी कर दिया गया.

जैन कहते हैं कि ये पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील जगह है लेकिन यहां कई ऐसी गतिविधियां होती हैं जिनसे पर्यावरण पर असर पड़ सकता है.

इमेज कैप्शन, अगस्त 2019 में जारी केंद्रीय गजट का एक हिस्सा

केंद्रीय मंत्रालय ने अपने गजट में राज्य सरकार को इस जगह के विकास के लिए दो साल के भीतर ज़ोनल मास्टरप्लान बनाने के लिए भी अधिकृत किया था. इसी के तहत झारखंड सरकार ने साल 2021 में ईको-टूरिज़्म नीति बनाई.

जैन समुदाय की आपत्ति है कि ईको टूरिज़्म के तहत आने वाले लोग इस स्थल पर मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां करेंगे और रात को यहां टेंट लगाकर रुका भी करेंगे.

सौरभ जैन कहते हैं, "जो जैन श्रद्धालु पर्वत पर जाते हैं वो रात दो बजे से चढ़ाई शुरू करते हैं और दर्शन करके लौट आते हैं, वो पर्वत पर रुकते नहीं है."

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पर्यटन शब्द पर आपत्ति

झारखंड सरकार इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करना चाहती है. जुलाई 2022 में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए कारोबारियों को आमंत्रित किया था.

सौरभ जैन कहते हैं, "हमारी आपत्ति पर्यटन शब्द से है. ये हमारा तीर्थ स्थल है जैसे वैष्णो देवी, स्वर्ण मंदिर तीर्थ स्थल है. हमें अपने इस स्थल के विकास के लिए सरकार से किसी फंड या मदद की ज़रूरत नहीं है."

जैन समुदाय का आरोप है कि हर फ़ोरम पर सरकार के इस क़दम का विरोध दर्ज कराया गया लेकिन जब मांग नहीं मानी गई तो 11 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया गया.

भारतीय जैन मिलन के विशिष्ट संरक्षक विपुल जैन कहते हैं, "जब तक सरकार लिखित में हमारी मांग नहीं मानेगी हमारा ये प्रदर्शन जारी रहेगा. आगे प्रदर्शन और भी बढ़ेंगे"

इमेज कैप्शन, भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय का झारखंड सरकार को लिखा पत्र

जैन समुदाय ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय में भी प्रतिनिधिमंडल भेजकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 23 दिसंबर को झारखंड सरकार को पत्र लिखते हुए कहा है, "झारखंड सरकार ने अपने संवाद में पवित्र स्थल की पवित्रता की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है लेकिन ये नहीं बताया है कि इस दिशा में क्या क़दम उठाए जाएंगे."

केंद्रीय पर्यवरण मंत्रलाय के विशेष सचिव चंद्र प्रकाश गोयल ने इस पत्र में कहा है, "राज्य सरकार के सुझाव पर पारसनाथ अभ्यारण्य का अंतिम ईएसज़ेड (इको सेंसिटिव ज़ोन) नोटिफ़िकेशन जारी किया जा चुका है. ऐसे में झारखंड सरकार इस प्रतिनिधिमंडल को प्राथमिकता के साथ देखे, नोटिफ़िकेशन पर दोबारा विचार करे और हमारी और से आगे की कार्रवाई के लिए ज़रूरी बदलावों की सिफ़ारिश करे."

श्री भारतवर्ष दिगम्बर जैन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गजराज जैन गंगवाल ने कुछ दिन पहले एक प्रतिनिधिमंडल के साथ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाक़ात की थी.

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पर्यटन मंत्री ने क्या कहा?

गंगवाल कहते हैं, "हमने अपनी बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखी और अपनी आपत्ति दर्ज कराई. मुख्यमंत्री ने हमारी बात सुनीं और कहा कि हम देखेंगे, लेकिन कोई ठोस वादा उन्होंने नहीं किया और ना ही अब तक इस दिशा में कोई क़दम उठाया है."

वहीं बीबीसी के सहयोगी पत्रकार मोहम्मद सरताज आलम से बात करते हुए झारखंड के पर्यटन मंत्री हाफ़ीज़ुल इस्लाम ने कहा, "जैन समाज के प्रतिनिधि मुझसे और मुख्यमंत्री जी से मिले, हमने उनको आश्वस्त किया है कि उनकी आस्था का ख्याल रखते हुए अगला कदम उठाया जाएगा."

बीबीसी ने इस विवाद पर झारखंड के पर्यटन विभाग का पक्ष जानने के लिए पर्यटन सचिव से भी बात करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका.

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'राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात'

इसी बीच देशभर के जैन समुदाय में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है.

इस आंदोलन से जुड़े जय किशन जैन कहते हैं, "हमारे बीस तीर्थांकरों ने इस स्थल पर मोक्ष लिया है. जैन समुदाय के सभी वर्गों के लिए ये पवित्र स्थल हैं. हम सब वहां अपनी श्रद्धा से जाते हैं. इससे पहले किसी सरकार ने ऐसा नहीं किया है, चाहें वो लालू यादव की सरकार रही हो, कांग्रेस की रही हो या फिर हेमंत सोरेन की रही हो, सभी ने जैन धर्म की आस्था का सम्मान किया. लेकिन बीजेपी के रघुबर दास की सरकार ने इसे पर्यटन स्थल बनाने का प्रस्ताव भेज दिया."

जय किशन कहते हैं, "इसे पर्यटन स्थल घोषित करने का मतलब ये है कि वहां हर तरह के यात्री जाएंगे, होटल बनेंगे, लोग मांस-मछली भी खाएंगे. इससे हमारी जैन आस्था को ठेस पहुंचेगी. हम इसे सहन नहीं करेंगे और इसलिए ही हम आंदोलित हैं. हम अपने इस स्थल को कभी किसी को छूने नहीं देंगे लेकिन हमारे साथ ऐसा किया जा रहा है."

जैन समुदाय का प्रतिनिधिमंडल जल्दी ही इस सिलसिले में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाक़ात भी करेगा.

वीएचपी ने क्या कहा?

इसी बीच विश्व हिंदू परिषद ने भी इस मुद्दे पर बयान जारी किया है. वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार की तरफ़ से जारी एक बयान में कहा गया है, "विश्व हिंदू परिषद जैन समुदाय की चिंताओं की से सहमत है. विश्व हिंदू परिषद भारत के सभी तीर्थस्थलों की पवित्रता संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है. हमारा मानना है कि किसी भी पवित्र स्थल को पर्यटन स्थल नहीं घोषित किया जाना चाहिए."

विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि वह भी समूचे क्षेत्र को पवित्र स्थल घोषित करने की मांग करती है.

(इस रिपोर्ट में झारखंड से मोहम्मद सरताज आलम ने सहयोग किया)

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