बिहार राजनीतिः छात्र राजद के बहाने तेजस्वी, तेज प्रताप में रस्साकशी, जगदानंद सिंह के दांव पर बयानबाज़ी

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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

लालू यादव के दो बेटों में चल रही अंदरूनी खींचतान सतह पर आ गई है. ये सब हुआ है आकाश यादव के निलंबन के चलते जो बीते मंगलवार तक छात्र राजद के अध्यक्ष थे.

बिहार प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने गगन कुमार को छात्र राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया जिस पर लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप ने अपनी नाराज़गी जाहिर की है.

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'सत्ता संग्राम का ट्रेलर है ये'

उन्होंने ट्वीट किया, "प्रवासी सलाहकार से सलाह में अध्यक्ष जी ये भूल गए कि पार्टी संविधान से चलता है. आज जो कुछ हुआ वो राजद के संविधान के ख़िलाफ़ हुआ."

हालांकि तेज प्रताप जगदानंद सिंह के प्रति जितने तल्ख रहें, लालू यादव के छोटे बेटे और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव उतनी ही मजबूती के साथ जदगानंद सिंह के साथ खड़े रहे.

उन्होने पत्रकारों से कहा, "जगदा बाबू स्वतंत्र हैं, प्रदेश संगठन के फेरबदल में. इसमें मेरा कोई हस्तक्षेप नहीं है. और जगदा बाबू से अनुभवी कौन सा नेता है?"

वरिष्ठ पत्रकार रमाकांत चंदन इसे "राजद में सत्ता संग्राम का ट्रेलर भर" मानते हैं.

वे कहते है, "ये ऐसा सत्ता संग्राम है जिसमें पलड़ा तेजस्वी का भारी है, क्योंकि तेज प्रताप शुद्ध राजनेता की तरह बर्ताव ही नहीं करते हैं."

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इमेज कैप्शन, जगदानंद सिंह के साथ तेजस्वी यादव और तेज प्रताप

"असंवैधानिक अध्यक्ष थे"

इधर प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा, "हमारे 21 अनुषांगिक संगठन हैं जिसमें से छात्र राजद को हम नहीं बना पाए, ये हमारी ग़लती थी."

राजद के वरिष्ठ प्रवक्ता चितरंजन गगन इसी बात को विस्तार देते हुए आकाश यादव के अध्यक्ष बनने को ही असंवैधानिक बताते हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "पार्टी के अनुषांगिक संगठन और प्रकोष्ठों के गठन का अधिकार प्रदेश अध्यक्ष के पास होता है. जहां तक छात्र राजद की बात है तो उपयुक्त कैंडीडेट के अभाव में वहां अध्यक्ष पद अभी तक खाली था. इसलिए कोई विवाद नहीं है और न ही किसी को हटाया गया है. आकाश यादव असंवैधानिक तौर पर उस पद पर थे."

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कौन हैं आकाश यादव?

मूल रूप से पटना के रहने वाले आकाश यादव 16 साल की उम्र से ही छात्र राजद से जुड़े हुए हैं. वे बताते है कि साल 2016 में छात्र राजद का अध्यक्ष बनाया गया था. लेकिन जनवरी 2019 में उन्हें पदमुक्त कर दिया गया.

आकाश यादव कहते हैं, "उसके बाद मैंने जेपी ब्रिगेड नाम का संगठन बनाया और पूरे बिहार की यात्रा की. जिसके बाद साल 2020 में सोशल मीडिया के माध्यम से हमारे संरक्षक महोदय (तेज प्रताप) ने हमें फिर से छात्र राजद का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया. जिसके बाद मुझे पार्टी ने स्टार प्रचारक भी बनाया. जिसके बाद मैंने तेज प्रताप जी के इलाके में कैम्पेन किया."

तेज प्रताप छात्र राजद के संरक्षक सदस्य हैं.

पटना विश्वविद्यालय से स्नातक आकाश यादव मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "हम सिर्फ़ लालू यादव, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप जी को अपना नेता मानते हैं. इनके आलावा कोई चौथा नेता मेरी लिस्ट में नहीं है. बाकी राजनीति में तो नेता जनता बनाती है इसलिए हम लालू जी की विचारधारा के लिए संघर्ष करते रहेंगे."

उधर नए छात्र अध्यक्ष गगन कुमार मूल रूप से जमुई के हैं और पटना लॉ कॉलेज के छात्र हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "पार्टी के सभी भैया लोग यानी तेजस्वी और तेज प्रताप दोनों का ही आशीर्वाद हमें प्राप्त है."

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तेज प्रताप वाया जगदानंद सिंह

लालू यादव की इस घोषणा के बावजूद कि उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव है, उनके परिवार में उठापटक नहीं थम रही है.

तेज प्रताप, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और अब रोहिणी आचार्य भी अपने अपने राजनीतिक कद के लिए लड़ रहे हैं.

हालांकि तेज प्रताप, तेजस्वी को अर्जुन और खुद को श्रीकृष्ण बता चुके हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं से इनकार नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि दोनों भाई एक दूसरे को जगदानंद सिंह के जरिए साध रहे हैं.

तेज प्रताप जगदानंद सिंह के ख़िलाफ़ खूब बयानबाजी करते रहते हैं. हाल ही में तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच पोस्टर वॉर हुई थी.

तेज प्रताप ने एक पार्टी कार्यक्रम में जगदानंद सिंह को 'हिटलर' कहा था जिसके बाद नाराज़ जगदानंद सिंह दस दिन तक पार्टी दफ़्तर नहीं आए और पार्टी कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लिया.

माना जा रहा है कि लालू प्रसाद यादव के हस्तक्षेप के बाद जगदानंद सिंह 18 अगस्त को पार्टी आए और गगन कुमार को छात्र राजद का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया.

इससे पहले भी तेज प्रताप की पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को 'एक लोटा पानी' की संज्ञा देने वाले बयान पर खूब आलोचना हुई थी.

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राजपूत वोट बैंक

ये सवाल भी अहम है कि जगदानंद सिंह पार्टी के लिए क्यों अहम है? इसका जवाब जहां पार्टी के प्रति उनकी वफादारी और वरिष्ठता है वहीं जिस जाति से वे आते हैं, उसका भी महत्वपूर्ण किरदार है.

राजद का समीकरण MY (मुस्लिम यादव) माना जाता रहा है. लेकिन राजद के पुराने और कद्दावर नेताओं की सूची देखे तो रघुवंश प्रसाद सिंह, प्रभुनाथ सिंह, विजय कृष्ण, उमाशंकर सिंह, जगदानंद सिंह जैसे नेता है. साल 2009 में जब लोकसभा में राजद के सिर्फ 4 सांसद चुने गए थे, उसमें से 3 राजपूत समाज से ही थे.

इसी जुलाई में कई बार विधायक रह चुके महेश्वर सिंह ने लालटेन थामी थी जिसके बाद उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है. पार्टी के सांगठनिक ढांचे में देखे तो महेश्वर सिंह के अलावा अशोक सिंह और सुनील सिंह जैसे राजपूत नेता है. सुनील सिंह, बिहार स्टेट कॉपरेटिव मार्केटिंग यूनियन लिमिटेड (बिस्कोमान) के वर्तमान में अध्यक्ष है.

पार्टी प्रवक्ता चितरंजन गगन कहते है, " अभी अगर आप देखें तो राजद में जिस तरीके के लोकप्रिय राजपूत नेता रहे हैं, वैसे बिहार की किसी दूसरी अन्य पार्टी में नहीं है. इस बार के विधानसभा चुनावों में भी जितने सवर्ण विधायक राजद से जीते है उसमें सबसे ज़्यादा संख्या राजपूतों की है."

पत्रकार रमाकांत चंदन कहते है, " राजपूतों का एक धड़ा राजद को वोट करता रहा है. इस समाज के बड़े नेता के तौर पर जगदानंद सिंह को मान्यता है. राजद जिसका वोट आधार यानी यादव और मुस्लिम है, वो हालिया चुनावों में पार्टी से नाराज़ और छिटक रहा है. ऐसे में जगदानंद सिंह को नाराज़ करके इस समाज की नाराज़गी नहीं बढ़ाना चाहता. दूसरा ये भी है कि लालू अपने बेटे तेजस्वी के लिए मजबूत सिपहसलार चाहते हैं, जो जगदा बाबू है."

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