मराठी फ़िल्म पर आदेश: पलट गई सरकार

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महाराष्ट्र सरकार ने मल्टीप्लेक्सेस में मराठी फ़िल्में दिखाए जाने के अपने पुराने आदेश में गुरुवार को संशोधन किया है.
अब मल्टीप्लेक्सेस में मराठी फ़िल्म दिखाए जाने की समयसीमा को दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक कर दिया गया है. यानी इस समयावधि में मल्टीप्लेक्सेस को कम से कम एक मराठी फ़िल्म दिखाना अनिवार्य होगा.
इससे पहले, बुधवार को एक आदेश जारी कर मल्टीप्लेक्सेस में शाम 6 बजे से 9 बजे के बीच मराठी फ़िल्म दिखाया जाना अनिवार्य किया गया था.
सरकार के क़दम पीछे खींच लेने का एक बडा कारण इस आदेश को लेकर फ़िल्म इंडस्ट्री की नाराज़गी बताया जा रहा है.
फ़िल्म इंडस्ट्री का कहना था कि सिनेमा स्क्रीन की कमी होने की वजह से फ़िल्मों को लाखों का नुकसान हो सकता है.
क्या है असल मामला?
दरअसल, इस मामले कि तह में जाएं तो ये मुद्दा उतना बड़ा नहीं है जितना कि इसे तूल दिया जा रहा है.

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मुबंई के एक पत्रकार ने बताया, "मल्टीप्लेक्सेस में मराठी फ़िल्में दिखाया जाना तो काफ़ी पहले से अनिवार्य है. बीजेपी सरकार ने बस इसमें समय को जोड़ दिया है. बड़ी हस्तियों के प्रतिक्रियाओं के चलते इस मुद्दे ने तूल पकड़ा है."
मराठी फ़िल्में मल्टीप्लेक्सेस में चल रही हैं बस मामला प्राइम टाइम का है.
महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री विनोद तावड़े कहते हैं, "मल्टीप्लेक्सेस मराठी फ़िल्मों के साथ सौतेला व्यवहार करते आ रहे हैं. इन्हें प्राइम टाइम से दूर रखा जाता है और इसीलिए यह क़ानून लाना ज़रूरी है"
लेकिन दूसरी और विरोधी खेमे के सुर अलग हैं, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण कहते हैं, "ये पाबंदी ठीक नहीं है, लोगों को तय करने दिया जाए वो क्या देखना चाहते हैं."
मिले-जुले सुर

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महाराष्ट्र सरकार के इस फ़रमान से अचानक ही फ़िल्म जगत और इससे जुड़ी हस्तियों के बीच हलचल मच गई. कुछ लोग को ये तानाशाही लग रही थी और कुछ इसे वरदान मान रहे थे.
फ़िल्म अभिनेता आमिर ख़ान ने कहा "ये प्रादेशिक सिनेमा के लिए एक अच्छा क़दम माना जा सकता है, लेकिन सरकार को इसके लिए आदेश देने की आवश्यकता नहीं थी."
वहीं, मराठी फ़िल्म के कलाकारों ने इस आदेश का खुले दिल से स्वागत किया है, मराठी फ़िल्म अदाकारा अश्विनी कालसेकर कहती हैं, "पूरा मराठी फ़िल्म समुदाय इसका स्वागत करता है, इससे मराठी सिनेमा के निर्माताओं और अदाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा और लोग ज़्यादा मराठी फ़िल्में देख सकेंगे."
जनता की राय
इस आदेश पर दर्शकों की ओर से भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं.

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मुंबई के राकेश कहते हैं, "हिंदी फ़िल्में बड़े बजट की होती हैं और अगर उन्हें प्राइम टाइम पर नहीं दिखाया जाएगा तो उनके कारोबार मे फ़र्क पड़ेगा. फिर कहीं न कहीं ये भार जनता पर आ सकता है, टिकट रेट मे बढ़ोतरी के रूप में."
लेकिन एक और दर्शक आशिता रावत कहती हैं, "इस आदेश से मराठी फ़िल्मों को बढ़ावा मिलेगा और लोग ज़्यादा से ज़्यादा इन्हें देख पाएँगे. ये काफ़ी पहले हो जाना चाहिए था."
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