'उनके हाथ में बल्ला नहीं छुरा होता था'

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'मुझे तो मैच शुरू होने से पहले ही पता चल गया था कि भारत ये मैच जीतेगा. बस इंतज़ार था तो इसका कि कितने रन से."
यह कहना है बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मैच के बारे में.
फ़िल्म 'प्रहार' और 'अब तक छप्पन' जैसी फ़िल्मों में काम करने वाले नान पाटेकर क्रिकेट में खासी रुचि रखते हैं.
विश्व कप क्रिकेट के मौके पर बीबीसी के साथ नाना पाटेकर ने क्रिकेट को लेकर अपनी कुछ यादें साझा कीं.
शुरुआत

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नाना बताते हैं कि वह जब 13 साल के थे, तो मुंबई के मशहूर शिवाजी स्टेडियम में क्रिकेट खेलने जाते थे.
"मैं जब खेलता था तो संदीप पाटिल जो अभी भारतीय क्रिकेट चयन समिति के अध्यक्ष हैं, बहुत छोटे थे और हमारे सामने खेलते थे. सुनील गावस्कर जो मुझसे केवल सात-आठ महीने बड़े थे वहां खेला करते था."
पर फिर ऐसा क्या हुआ कि नाना ने एकदम क्रिकेट त्याग दिया और फ़िल्मी दुनिया में आ गए?
इस पर नाना कहते हैं, "मुझे आर्ट्स स्कूल में ही जाना था और फिर मेरी ऊँगली में कुछ लग गया जिसकी वजह से मुझे क्रिकेट छोड़ना पड़ा."
उन्होंने आगे कहा, "मुझे मां-बाप की सेवा करनी थी और नौकरी करनी थी तो यह सब सोचकर मैंने क्रिकेट छोड़ दिया."
पर नाना का मानना है कि अगर वे चाहें तो आज भी वह बेहतरीन बॉउलिंग कर सकते हैं.
यादें

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नाना पाटेकर ने बताया, "मुझे एक ही मैच याद है जब साल 1998 में सचिन ने शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ शतकीय पारी खेली थी, जिसमें भारत की जीत हुई थी."
नाना को सचिन तेंदुलकर तो पसंद हैं ही लेकिन सचिन के अलावा नाना को एक और खिलाड़ी बहुत पसंद है और वह हैं विवयन रिचर्ड्स.

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"विवयन जिस तरह खेलते थे, मुझे लगता था कि इस इंसान को कोई आउट नहीं कर सकता. उसके हाथ में बल्ला नहीं बल्कि छुरा होता था और वह सबको काट दिया करता था. कहीं से भी, किधर से भी और कैसे भी मारता था."
नाना ने हंसते-हंसते कहा कि अगर मेरी उंगली में चोट नहीं लगती तो भारत को एक अच्छा बॉउलर मिल जाता.
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