ईरान के पास कितना संवर्धित यूरेनियम? क्या इससे बन सकता है न्यूक्लियर बम

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- Author, लुईस बर्रूचो
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब यह कहा कि ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए हुए एक समझौते के तहत अपने संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम भंडार को सौंपने पर सहमति जताई है, तो इसकी ओर दुनिया का ध्यान फिर गया.
हालांकि, सोमवार को ईरान के उप विदेश मंत्री सईद ख़तीबज़ादेह ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया. उन्होंने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि ऐसे विचार के साथ 'शुरुआत ही नामुमकिन' है.
दोनों पक्षों के आगे की शांति वार्ताओं का रास्ता तलाशने के साथ ही यह तय लग रहा है कि इस सामग्री का भविष्य चर्चा का एक अहम विषय होगा.
लेकिन आखिर संवर्धित यूरेनियम होता क्या है, और यह इतना अहम क्यों है?
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संवर्धित यूरेनियम होता क्या है?
यूरेनियम एक प्राकृतिक तत्व है, जो पृथ्वी की सतह में पाया जाता है.
यह ज़्यादातर दो आइसोटोप से मिलकर बना होता है: U‑238 और U‑235.
प्राकृतिक यूरेनियम का 99% से भी ज़्यादा हिस्सा U‑238 होता है, जो आसानी से परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया को बनाए नहीं रख पाता. वहीं सिर्फ़ करीब 0.7% हिस्सा U‑235 होता है, यह ऐसा आइसोटोप है जो आसानी से टूट जाता है और ऊर्जा छोड़ता है. इस प्रक्रिया को परमाणु विखंडन (न्यूक्लियर फिशन) कहा जाता है.
यूरेनियम को उपयोगी बनाने के लिए उसमें U‑235 का अनुपात बढ़ाया जाना ज़रूरी होता है. इसे करने की प्रक्रिया को 'संवर्धन' (एनरिचमेंट) कहा जाता है.
सबसे पहले यूरेनियम को गैस में बदला जाता है. फिर इस गैस को सेंट्रीफ्यूज़ में डाला जाता है- ये ऐसी मशीनें होती हैं जो बहुत तेज़ गति से घूमती हैं.
घूमने के दौरान भारी U‑238 थोड़ा बाहर की तरफ़ खिसक जाता है, जबकि हल्का U‑235 केंद्र के पास ही रहता है.
इस तरह धीरे‑धीरे काम के यूरेनियम यानी U‑235 को ज़्यादा आम U‑238 से अलग किया जाता है.
ज़्यादा संकेंद्रित (कॉन्सन्ट्रेटेड) हो चुके इस यूरेनियम को सेंट्रीफ़्यूज़ के एक सिरे से निकाल लिया जाता है.

परमाणु रिएक्टरों और हथियारों में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम में क्या अंतर है?
यूरेनियम में संवर्धन के अलग‑अलग स्तर इसे अलग‑अलग कामों के लिए उपयुक्त बनाते हैं.
कम संवर्धित यूरेनियम, जिसमें आम तौर पर 3-5% तक U‑235 होता है, वाणिज्यिक परमाणु बिजली घरों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. यह नियंत्रित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया (कंट्रोल्ड चेन रिएक्शन) बनाए रखने के लिए काफ़ी होता है, लेकिन हथियार बनाने के लिए ज़रूरी स्तर से काफ़ी कम होता है.
बहुत ज़्यादा संवर्धित यूरेनियम, जिसमें 20% या उससे अधिक U‑235 होता है, रिसर्च रिएक्टरों में इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं हथियार‑ग्रेड यूरेनियम को आम तौर पर करीब 90% तक संवर्धित किया जाता है.
इस स्तर पर हालात ऐसे बन जाते हैं कि परमाणु प्रतिक्रिया कभी भी बेकाबू हो सकती है. जब इस तरह का पदार्थ काफ़ी मात्रा में एक साथ लाया जाता है, तो परमाणु बेहद तेज़ी से टूटने लगते हैं और पलक झपकते ही बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है.
यही बात यूरेनियम के नागरिक और सैन्य इस्तेमाल के बीच फ़र्क़ पैदा करती है. किसी रिएक्टर में ईंधन को सिर्फ़ थोड़ा‑सा संवर्धित किया जाता है और प्रतिक्रिया को जान-बूझकर धीमा रखा जाता है. इसे सावधानी से नियंत्रित किया जाता है, ताकि महीनों या सालों में धीरे‑धीरे ऊर्जा निकलती रहे. वहीं बम बनाने में उद्देश्य ठीक उलटा होता है- यानी प्रतिक्रिया को एक साथ पूरी रफ़्तार से आगे बढ़ने देना.
2015 में छह विश्व शक्तियों- चीन, फ़्रांस, जर्मनी, रूस, अमेरिका और ब्रिटेन- के साथ हुए एक समझौते के तहत ईरान को यूरेनियम को 3.67% से ज़्यादा संवर्धित करने की अनुमति नहीं थी.
इस समझौते में उसके यूरेनियम भंडार की सीमा भी 300 किलो तय की गई थी, चला सकने योग्य सेंट्रीफ़्यूज़ की संख्या पर भी पाबंदी थी, और उसके भूमिगत फोर्डो संयंत्र में संवर्धन पर रोक लगा दी गई थी.
हालांकि डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान, मई 2018 में अमेरिका इस समझौते से बाहर हो गया था.

संवर्धन का स्तर इतना अहम क्यों होता है?
संवर्धन का स्तर जितना ज़्यादा होता है, यूरेनियम उतना ही परमाणु हथियार में इस्तेमाल किए जाने के क़रीब पहुंच जाता है.
20% संवर्धन तक पहुंचना एक बड़ा पड़ाव माना जाता है, क्योंकि हथियार‑ग्रेड सामग्री बनाने के लिए जितने तकनीकी प्रयास चाहिए, उसका बड़ा हिस्सा तब तक पूरा हो चुका होता है.
प्राकृतिक यूरेनियम को 20% तक संवर्धित करने में हज़ारों बार अलग‑अलग करने की प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है, और इसमें काफ़ी समय और ऊर्जा लगती है.
इसके मुक़ाबले, 20% से बढ़ाकर लगभग 90% तक ले जाने में कहीं कम चरण लगते हैं.
इसका मतलब यह है कि ज़्यादा स्तर तक संवर्धित यूरेनियम को अपेक्षाकृत तेज़ी से हथियार‑ग्रेड स्तर में बदला जा सकता है.
ईरान के पास कितना यूरेनियम है?
मौजूदा बातचीत के केंद्र में सवाल यह है कि ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम के भंडार का आखिर क्या किया जाना चाहिए.
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, युद्ध की शुरुआत में ईरान के पास करीब 440 किलो यूरेनियम था, जिसे 60% तक संवर्धित किया जा चुका था. इस सामग्री को हथियार‑ग्रेड यूरेनियम के लिए ज़रूरी 90% स्तर तक अपेक्षाकृत तेज़ी से संवर्धित किया जा सकता है.
ईरान के पास करीब 1,000 किलो यूरेनियम 20% तक संवर्धित रूप में भी है, और लगभग 8,500 किलो यूरेनियम करीब 3.6% तक संवर्धित है, जिसका आम तौर पर नागरिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होता है- जैसे ऊर्जा उत्पादन या मेडिकल रिसर्च.
माना जाता है कि अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम, जिसे परमाणु हथियार बनाने के काम में लाया जा सकता है, उसका ज़्यादातर हिस्सा इस्फ़हान में रखा गया है. यह संयंत्र ईरान के तीन भूमिगत परमाणु ठिकानों में से एक है, जिन्हें पिछले साल अमेरिका और इसरायल के हवाई हमलों में निशाना बनाया गया था.

हालांकि यह साफ़ नहीं है कि इस तरह के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का कितना हिस्सा दूसरी जगहों पर रखा गया है.
सूत्रों का कहना है कि तेहरान ने परमाणु संवर्धन पर 20 साल की रोक लगाने की मांग को ठुकरा दिया है. इसके बजाय उसने पांच साल के विराम का प्रस्ताव दिया है, जो उसने संघर्ष शुरू होने से पहले ही रखा था.
ईरान ने अपने 440 किलो अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को सौंपने की मांग को भी खारिज कर दिया है और अपनी पहले दी गई पेशकश पर कायम है- यानी 60% तक संवर्धित यूरेनियम को पतला (डायल्यूट) करने की.
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफ़ाएल ग्रॉसी ने पिछले साल अक्टूबर में एपी से कहा था कि यदि इस मात्रा को और संवर्धित किया जाए, तो यह 10 परमाणु बमों के लिए काफ़ी होगी.
क्या ईरान परमाणु हथियार बना रहा है?
ईरान का कहना है कि उसकी सभी परमाणु सुविधाएं पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं, और आईएईए का भी कहना है कि उसे किसी सक्रिय परमाणु हथियार कार्यक्रम के सबूत नहीं मिले हैं.
हथियार‑ग्रेड यूरेनियम तैयार करना परमाणु हथियार बनाने की सिर्फ़ एक कड़ी है. एक काम करने वाला बम बनाने के लिए और भी काफ़ी जटिल काम करने पड़ते हैं, जैसे वारहेड का डिज़ाइन और असेंबली, और उसे पहुंचाने के लिए डिलीवरी सिस्टम विकसित करना.
स्वतंत्र हथियार नियंत्रण विशेषज्ञ पैट्रिशिया लुईस कहती हैं, "ईरान ने 2003 तक वारहेड डिज़ाइन करने की कुछ क्षमता विकसित कर ली थी, लेकिन उसके बाद ऐसा लगा कि उसने यह कार्यक्रम रोक दिया."
हालांकि वे यह भी जोड़ती हैं, "2015 के परमाणु समझौते के टूटने और नए समझौते के लिए बातचीत लगातार नाकाम रहने के बाद, यह संभव है कि ईरान ने फिर से वारहेड बनाने की क्षमता विकसित करने का फैसला किया हो."
अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (यूएस डिफ़ेंस इंटेलिजेंस एजेंसी) के मई 2025 के आकलन में कहा गया था कि ईरान 'संभवतः एक हफ़्ते से भी कम समय में' एक परमाणु उपकरण के लिए काफ़ी हथियार‑ग्रेड यूरेनियम तैयार कर सकता है.
हालांकि उसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान "लगभग निश्चित रूप से इस समय परमाणु हथियार नहीं बना रहा है", भले ही उसने ऐसे क़दम उठाए हैं जो अगर वह ऐसा करना चाहे तो कर सकता है.
इसरायल का कहना है कि उसके पास ऐसी ख़ुफ़िया जानकारी है, जिससे पता चलता है कि ईरान ने परमाणु हथियार के कुछ हिस्सों को विकसित करने में 'ठोस प्रगति' की है.
अतिरिक्त रिपोर्टिंग: नादिया सुलेमान और मार्क शे
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.




































