क्रिकेट जगत अब इस 15 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी को क्यों नज़रअंदाज नहीं कर सकता

    • Author, आनंद वासु
    • पदनाम, क्रिकेट लेखक
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट टूर्नामेंट इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शनिवार को वापसी के साथ ही क्रिकेट की बड़ी हस्तियों पर सबकी नजरें होंगी.

इनमें से कई नज़रें एक किशोर खिलाड़ी पर भी होंगी.

आईपीएल शुरू होने से एक दिन पहले, 27 मार्च को राजस्थान रॉयल्स के बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी 15 साल के हो गए. इसके साथ ही भारतीय क्रिकेट के सबसे दिलचस्प सवालों में से एक पर सभी क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान केंद्रित हो गया है: क्या वैभव बड़े मंच के लिए तैयार हैं?

सूर्यवंशी ने पहली बार तीन साल पहले 12 साल की उम्र में दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. एक मैच में वह अपने पिता की उम्र के गेंदबाजों की जमकर धुलाई कर रहे थे.

तब से उनकी बल्लेबाज़ी की क्वालिटी, ख़ासकर ताबड़तोड़ स्ट्राइक रेट के साथ बड़े स्कोर बनाने की भूख चर्चा का केंद्र बन गई है.

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क्रीज़ पर मजबूती से खड़े सूर्यवंशी एक सहज आक्रामक खिलाड़ी हैं. वह गेंद का इंतज़ार करने की बजाय उस पर हमला करते हैं, और जब वह लय में होते हैं तो उनके स्ट्रोकप्ले की भव्यता की तुलना कई लोग वेस्ट इंडीज़ के महान क्रिकेटर गैरी सोबर्स से करते हैं.

आईपीएल 2026 का पहला मैच 28 मार्च को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और सनराइज़र्स हैदराबाद के बीच खेला जाएगा.

पिछले साल आरसीबी पहली बार आईपीएल चैंपियन बनी थी.

वैभव तोड़ सकते हैं सचिन का रिकॉर्ड

2020 में, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने "खिलाड़ियों की सुरक्षा" के नाम पर न्यूनतम आयु नियम लागू करके एक स्पष्ट सीमा तय की. यहां तक कि अंडर-19 स्तर पर भी संदेश साफ था: 15 साल से कम उम्र का कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर क़दम नहीं रखेगा.

यह पहली बार था जब आईसीसी ने न्यूनतम आयु की आवश्यकता निर्धारित की थी. इससे पहले पाकिस्तान के हसन रज़ा ने 1996 में 14 वर्ष और 227 दिन की उम्र में डेब्यू कर सबसे कम उम्र के पुरुष टेस्ट क्रिकेटर होने का रिकॉर्ड बनाया था.

हालांकि रज़ा का रिकॉर्ड अब भी सुरक्षित है, लेकिन सूर्यवंशी सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को अब भी तोड़ सकते हैं. तेंदुलकर ने 16 साल और 205 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था.

अगर भारतीय चयनकर्ता सूर्यवंशी का चयन करने में देरी करते हैं तो ये हैरानी की बात होगी. तेंदुलकर के बाद से कई युवा प्रतिभाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाया गया है, लेकिन सूर्यवंशी की बात ही अलग है. वह न केवल होनहार दिखते हैं, बल्कि ऐसा लगता है कि वे भारतीय टीम के लिए ही बने हैं.

सेलेक्टर्स की नज़र में ऐसे आए वैभव सूर्यवंशी

दिलचस्प है कि साल 2023 में सूर्यवंशी के तेज़ी से नेशनल लेवल पर उभरने में प्रतिभा के साथ संयोग का भी योगदान था.

चंडीगढ़ में विनू मांकड़ ट्रॉफ़ी का एक मैच था. यह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की घरेलू अंडर-19 प्रतियोगिता है. इस मैच को देखने के लिए चयनकर्ता तिलक नायडू को नियुक्त किया गया था लेकिन बारिश के कारण यह मैच रद्द हो गया.

नायडू ने पहले ही बिहार के एक प्रतिभाशाली लड़के के बारे में कुछ चर्चाएं सुनी थीं. इसलिए उन्होंने इसी टूर्नामेंट के एक अन्य मैच को देखने का फ़ैसला किया जिसमें सूर्यवंशी खेल रहे थे.

यह निर्णायक साबित हुआ. उस मैच में सूर्यवंशी ने 76 गेंदों में 86 रन बनाकर बिहार को असम से आगे निकलने में मदद की. यह पारी इतनी प्रभावशाली थी कि इसके बाद बिहार को तेजी से आगे बढ़ने का मौक़ा मिला.

सूर्यवंशी की क्षमता को लेकर नायडू आश्वस्त थे. उनके बनाए गए कुछ और अर्धशतकों से यह बात और भी पुख़्ता हो गई थी. उन्होंने बीसीसीआई के बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण से बात करने के बाद सूर्यवंशी को तुरंत टीम में शामिल कर लिया.

वैभव ने ख़ुद को साबित किया

सूर्यवंशी ने सफलता की सीढ़ी पर हर क़दम के साथ अपनी लय हासिल की.

उन्होंने नवंबर 2023 में अंडर-19 चैलेंजर ट्रॉफी में रनों का अंबार लगा दिया और फिर उसी महीने के अंत में एक अंतरराष्ट्रीय सिरीज़ में उस फ़ॉर्म को जारी रखा, जिसमें उन्होंने इंग्लैंड और बांग्लादेश के ख़िलाफ़ भारत की अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व किया.

असली कमाल तो एक साल बाद देखने को मिला. अक्तूबर 2024 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ यूथ टेस्ट के लिए चुने गए सूर्यवंशी ने 58 गेंदों में शतक जड़ा. यह पारी उनकी पहचान बन गई.

तब यह तर्क दिया गया कि आईपीएल एक ऐसे लड़के के लिए बहुत बड़ा क़दम हो सकता है जो अब भी अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहा है और इतनी कम उम्र में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का सामना करना फ़ायदे से ज़्यादा नुक़सान पहुंचा सकता है.

2025 के आईपीएल सीज़न में, सूर्यवंशी ने उन चिंताओं को दूर कर दिया. उन्होंने अनुभवी शार्दुल ठाकुर की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ा.

इसके कुछ ही समय बाद, उन्होंने राजस्थान रॉयल्स की ओर से उन पर लगभग 1.10 करोड़ रुपये के किए गए निवेश को सही साबित किया. सूर्यवंशी गुजरात टाइटन्स के ख़िलाफ़ 35 गेंदों में तूफ़ानी शतक लगाकर सबसे कम उम्र में शतक जड़ने वाले खिलाड़ी बन गए.

लेकिन आलोचकों का तर्क था कि आईपीएल घरेलू स्तर पर अपने आपको साबित करने का मंच तो है लेकिन प्रतिभा की पहचान के लिए सही टूर्नामेंट नहीं है. यही नज़रिया 2026 की शुरुआत में होने वाले अंडर-19 वर्ल्ड कप में भी सूर्यवंशी के साथ बना रहा.

तब तक भारत में क्रिकेट नियम और सख़्त हो गए. इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का सिर्फ़ एक ही मौक़ा देने का नियम बना, फिर चाहे खिलाड़ी कितना भी युवा क्यों न हो. सोच स्पष्ट थी, उम्र संबंधी धोखाधड़ी को ख़त्म करना, मानकों को ऊंचा उठाना और यह सुनिश्चित करना कि खिलाड़ी समय से पहले नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ मैदान पर उतरें.

सूर्यवंशी ने टूर्नामेंट के लीग स्टेज में 72, 40, 52 और 30 रन बनाए, जिससे भारत नॉकआउट के लिए क्वालिफ़ाई कर गया. फिर सेमीफ़ाइनल में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ 33 गेंदों में 68 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई.

लेकिन फ़ाइनल में इंग्लैंड के फ़िलाफ़ उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. उन्होंने 32 गेंदों में अर्धशतक बनाया और 55 गेंदों में शतक पूरा किया. इस पारी में सूर्यवंशी ने मात्र 80 गेंदों में 175 रन बनाए. इसमें 15 छक्के और उतने ही चौके शामिल थे.

यह समय आते-आते सूर्यवंशी को एज़ ग्रुप क्रिकेट में खेलने देने की बजाय सीनियर टीम में जगह देने की मांग तेज़ हो गई.

लेकिन भारतीय क्रिकेट आईसीसी के नियमों से बंधा हुआ था, जिसके कारण सूर्यवंशी को सीनियर टीम में नहीं चुना जा सकता था.

क्रिकेट के दिग़्ग़जों से मिली सराहना

सूर्यवंशी के बारे में पूर्व क्रिकेटरों की प्रतिक्रिया हैरानी और अविश्वास के बीच बँटी हुई है.

रवि शास्त्री ने कहा, "उस उम्र में सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली कितने अच्छे खिलाड़ी रहे होंगे? अगर यह लड़का इतनी कम उम्र में इतना अच्छा है, तो कोई कारण नहीं है कि वह चार दिवसीय क्रिकेट न खेल सके."

एबी डिविलियर्स ने कहा कि सूर्यवंशी "अपनी उम्र के हिसाब से मेच्योर" हैं. मैथ्यू हेडन ने उनके आईपीएल शतक को "सभी खेलों में युवा सपनों के लिए प्रेरणा" बताया.

डब्ल्यूवी रमन सूर्यवंशी के "रोमांच पैदा करने के कौशल" से प्रभावित हैं और तेंदुलकर ने उनके "निडर नज़रिए, बल्ले की गति और गेंद की लंबाई को जल्दी पहचानने की तारीफ़ की.

27 मार्च को, जब सूर्यवंशी अपना जन्मदिन मना रहे होंगे, तो सवाल यह नहीं है कि वह तैयार हैं या नहीं, बल्कि यह कि क्या दुनिया उनके लिए तैयार है?

यह तारीख़ भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए पहले से ही ख़ास है.

1994 में, ऑकलैंड में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वनडे मैच से पहले नवजोत सिंह सिद्धू को गर्दन में तकलीफ़ हुई, जिसके बाद मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने तेंदुलकर को बल्लेबाज़ी में प्रमोट कर उन्हें ओपनिंग करने भेजा.

तेंदुलकर ने 49 गेंदों में 82 रन बनाए और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा.

उसके बाद से, तेंदुलकर ने वनडे में सलामी बल्लेबाज़ के रूप में 48.29 के औसत से 15,310 रन बनाए. इनमें से उनके 49 शतकों में से चार को छोड़कर बाकी सभी शतक ओपनर के रूप में आए.

यह कहना बिल्कुल सही होगा कि 27 मार्च 1994 ने भारतीय क्रिकेट की दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया.

अब, 32 साल बाद भारतीय क्रिकेट में एक और महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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