पश्चिम बंगाल में 'बाबरी मस्जिद' बनाने की बात करने वाले हुमायूं कबीर के वायरल वीडियो पर विवाद क्यों?

हुमायूं कबीर

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इमेज कैप्शन, हुमायूं कबीर के कथित वीडियो ने पश्चिम बंगाल की सियासत में चुनावों के पहले कई समीकरणों पर असर डाला है (फ़ाइल फ़ोटो)
    • Author, मयूरी सोम
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ बांग्ला
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

"मुसलमान बेवकूफ़ हैं, हम उनके वोट बांटकर बीजेपी को मदद करेंगे."

पश्चिम बंगाल के नेता हुमायूं कबीर एक कथित वीडियो में राज्य के मुसलमानों को लेकर यह विवादित टिप्पणी करते नज़र आ रहे हैं. ये वीडियो गुरुवार से सोशल मीडिया पर वायरल है.

बीबीसी ने इस वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.

उधर हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से बनाया गया है.

गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया. कुछ ही घंटों में कबीर की 'आम जनता उन्नयन पार्टी' और असदुद्दीन ओवैसी की 'ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन' (एआईएमआईएम) के बीच गठबंधन टूट गया.

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ओवैसी की पार्टी ने हुमायूं कबीर की टिप्पणी की कड़ी निंदा की है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले हुए इस गठबंधन के टूटने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है.

हुमायूं कबीर को कभी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का क़रीबी माना जाता था. कांग्रेस छोड़कर कबीर बीजेपी में शामिल हुए और बाद में तृणमूल कांग्रेस में भी गए. इस तरह वह अलग-अलग समय पर तीनों पार्टियों के सदस्य रहे हैं.

हाल ही में उन्होंने 'आम जनता उन्नयन पार्टी' नाम से अपनी पार्टी बनाई. विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद बनाने और उसका शिलान्यास करने के फ़ैसले से फिर राजनीतिक हलचल पैदा की.

असदुद्दीन ओवैसी ने गठबंधन तोड़ा

ओवैसी और कबीर साथ में अन्य नेता

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इमेज कैप्शन, एआईएमआईएम ने पछले साल हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन किया था (फ़ाइल फ़ोटो)
एआईएमआईएम का ट्वीट

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इमेज कैप्शन, एआईएमआईएम ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में हुमायूें कबीर को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की

शुक्रवार सुबह एआईएमआईएम ने सोशल मीडिया पर हुमायूं कबीर के वायरल वीडियो को लेकर बयान जारी किया.

इसमें कहा गया, "एआईएमआईएम किसी भी ऐसे बयान से जुड़ी नहीं रह सकती, जो मुसलमानों की गरिमा को कम करता हो. एआईएमआईएम ने कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़ लिया है. पश्चिम बंगाल के मुसलमान सबसे ग़रीब, उपेक्षित और दबे हुए समुदायों में से एक हैं. दशकों के सेक्युलर शासन के बावजूद उनके लिए कुछ नहीं किया गया."

एआईएमआईएम के एक्स हैंडल ने आगे कहा, "किसी भी राज्य में चुनाव लड़ने को लेकर पार्टी की नीति यह है कि हाशिए पर मौजूद समुदायों को स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ मिले. हम पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगे और आगे किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेंगे."

वीडियो में हुमायूं कबीर दावा करते हैं कि उन्हें एक हज़ार करोड़ रुपये का ऑफर मिला है, जिसमें से 200 करोड़ रुपये एडवांस के रूप में दिए जा चुके हैं.

इन दावों की बीबीसी ने स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.

तृणमूल कांग्रेस ने क्या कहा

तृणमूल कांग्रेस के नेता एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, बाएं से अरूप बिस्वास, फ़िरहाद हकीम और कुणाल घोष

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इमेज कैप्शन, तृणमूल कांग्रेस के नेता एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, बाएं से अरूप बिस्वास, फ़िरहाद हकीम और कुणाल घोष

तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार कुणाल घोष ने गुरुवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

वीडियो दिखाते हुए उन्होंने कबीर पर तंज कसा और कहा कि भारतीय जनता पार्टी की कुछ "बी-टीम और सी-टीम" तृणमूल कांग्रेस के वोट बांटने में मदद कर रही हैं.

उन्होंने आरोप लगाया, "हुमायूं कबीर और कई अन्य लोगों का इस्तेमाल मुस्लिम वोट बांटने के लिए किया जा रहा है. हमारे पास एक वीडियो है जो इसे साफ तौर पर साबित करता है."

उन्होंने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच की मांग भी की.

कोलकाता के मौजूदा मेयर और कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार फ़िरहाद हकीम ने कहा, "धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल वोट ख़रीदने और बेचने के लिए किया जा रहा है."

"राज्य की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद भी बीजेपी बंगाल की प्रगति रोकने में नाकाम रही है... वह एक अवसरवादी नेता हैं जो बार-बार पार्टी बदलते रहे हैं, बीजेपी से कांग्रेस और कांग्रेस से तृणमूल कांग्रेस..."

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उन्होंने आगे कहा, "यह हुमायूं कबीर मेरे धर्म को बेच रहा है. उसे सिर्फ 'गद्दार' कहना काफ़ी नहीं है. मैं उसे अच्छी तरह जानता हूं, इसलिए मैंने यहीं बैठकर उसे निलंबित किया और पार्टी से निकाल दिया."

मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए हकीम ने कहा, "जो लोग उनका समर्थन कर रहे थे, अब समय आ गया है कि वे समझें कि हुमायूं कबीर कैसा व्यक्ति है. उसने मुसलमानों की इज्जत बीजेपी को बेचने की साज़िश की है."

पिछले साल चार दिसंबर को हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस से निलंबित किया गया था. उस समय उनके निलंबन का कारण "सांप्रदायिक राजनीति" में शामिल होना बताया गया था.

उल्लेखनीय है कि उसी समय उन्होंने मुर्शिदाबाद ज़िले के बेलडांगा में नई "बाबरी मस्जिद" बनाने के लिए मुस्लिम समुदाय से अपील की थी.

पार्टी से निलंबन के समय हकीम ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का कबीर का प्रस्ताव "धार्मिक उकसावे" से प्रेरित था.

फ़िरहाद हकीम ने कहा था, "बाबरी मस्जिद उत्तर प्रदेश में है, यहां इसका क्या संबंध है? ये कदम सिर्फ यहां के शांत माहौल को बिगाड़ने के लिए उठाए गए हैं... यह बीजेपी का पैसा काम कर रहा है. यह यहां भी बीजेपी की साज़िश है, जैसे वहां है."

जानकार क्या कहते हैं

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प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर जाद महमूद ने बीबीसी से कहा, "मतदाताओं को एक वोट बैंक के रूप में देखने की प्रवृत्ति हमेशा रही है. हम यह बीजेपी के मामले में भी देखते हैं, जहां वह हिंदुओं से एकजुट होने की अपील करती है और कहती है कि वही पार्टी उन्हें सुरक्षित रखेगी."

"अल्पसंख्यकों को वोट बैंक के रूप में देखना और भी आसान है, क्योंकि उनमें असुरक्षा की भावना होती है."

महमूद के अनुसार, "हुमायूं कबीर जैसे नेता यह साफ कर चुके हैं कि वे अपने निजी हितों के लिए काम करते हैं. उनका बार-बार पार्टी बदलना इसका उदाहरण है. भले ही इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों को यह असंभव नहीं लगेगा, क्योंकि कबीर जैसे लोगों की विश्वसनीयता बहुत कम होती है."

हाल के चुनावों में इमामों और मुअज़्ज़िनों के भत्ते जैसे मुद्दे सामने आए हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय के विकास और शिक्षा जैसे मुद्दे मुख्यधारा की चुनावी बहस में शायद ही केंद्र में रहे हैं.

इसी कारण, प्रोफेसर जाद महमूद के अनुसार, मुसलमानों में असुरक्षा की भावना बनी रहती है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय तृणमूल कांग्रेस का वोट बैंक बन गया है.

महमूद का मानना है कि आज भी पश्चिम बंगाल में मतदाता सिर्फ जाति या धर्म के आधार पर वोट नहीं करते.

उनके अनुसार, ज़्यादातर मतदाता ख़ुद से यह सवाल पूछते हैं, "यह पार्टी मेरे लिए क्या करेगी? सत्ता में आने पर मुझे क्या फायदा होगा?"

उनका मानना है कि कबीर की मौजूदा गतिविधियों का असर सीमित इलाक़ों तक ही रहने की संभावना है क्योंकि पश्चिम बंगाल के मुसलमानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी को कैसे रोका जाए.

प्रोफ़ेसर महमूद बताते हैं, "अगर यहां विपक्ष सिर्फ कांग्रेस या सीपीआई (एम) होता, तो स्थिति अलग होती. साल 2021 में बीजेपी ने मुस्लिम वोट बांटने की कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हुई. इसमें कोई शक नहीं कि इस बार भी वह यही करने की कोशिश कर रही है."

रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर बिश्वनाथ चक्रवर्ती ने बीबीसी से कहा कि हुमायूं कबीर का प्रभाव पहले भी बहुत ज्यादा नहीं रहा है.

प्रोफ़ेसर चक्रवर्ती कहते हैं, "हालांकि मध्यम वर्ग के मुस्लिम समाज में मुख्यधारा की पार्टियों से अलग एक राजनीतिक पहचान बनाने की इच्छा बढ़ रही है. ऐसी पार्टी बनाने या समर्थन करने की चाह है जो सिर्फ मुसलमानों के लिए हो."

चक्रवर्ती ने आगे कहा, "यह सही है कि हुमायूं कुछ इलाकों, खासकर मुर्शिदाबाद में, वोट काट सकते थे. यह विवाद और ओवैसी की पार्टी से गठबंधन टूटने का असर वहां पड़ सकता है."

"मेरे आकलन में हुमायूं कबीर के कमजोर होने से कांग्रेस को चुनावी फायदा मिल सकता है, खासकर यह देखते हुए कि वह तृणमूल के ख़िलाफ़ एक अलग मुस्लिम राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.