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मंगलवार, 01 अप्रैल, 2008 को 13:28 GMT तक के समाचार
 
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'खेल और राजनीति को अलग रखा जाए'
 
मिल्खा सिंह
मिल्खा सिंह कहते हैं कि तिब्बत का मामला सरकार के ज़िम्मे है
एक ओर जहाँ भारतीय फ़ुटबॉल टीम के कप्तान बाइचुंग भूटिया ने ओलंपिक मशाल न थामने की बात कही है वहीं एथलीट मिल्खा सिंह और जीएस रंधावा का कहना है कि खेल से राजनीति अलग रहे तो बेहतर है.

मिल्खा सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि "खेल और राजनीति को अलग रखकर देखना चाहिए.
तिब्बत का सवाल राजनीतिक सवाल है और इससे भारत सरकार निपट सकती है".

भारतीय ओलंपिक संघ की ओर से भी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा गया है कि भूटिया का निर्णय उनका निजी फैसला है पर राजनीति को खेल से दूर रखें तो बेहतर है.

भारतीय ओलंपिक संघ और साथ ही एशियाई ओलंपिक परिषद के महासचिव रणधीर सिंह ने बीबीसी को बताया, "भूटिया की ओर से जो पत्र संघ को मिला है उसमें लिखा है कि वो निजी कारणों से रिले में हिस्सा नहीं लेंगे. हमारा मानना है कि राजनीति से खेल को बाहर रखकर देखा जाना चाहिए."

 तिब्बत के लोगों की भावनाओं का मैं भी सम्मान करता हूँ पर भारत सरकार अपने स्तर पर ही इस मसले से निपट सकती है फिर हम खेल के बीच राजनीति को क्योंकर लाएं
 
मिल्खा सिंह, भारतीय एथलीट

चीन में इस वर्ष गर्मियों में हो रहे ओलंपिक खेलों की मशाल 17 अप्रैल को दिल्ली पहुंच रही है जहाँ देश के कई खिलाड़ी इस मशाल की रिले रेस में हिस्सा लेंगे.

पर चीन में ओलंपिक से ठीक पहले तिब्बत की स्वायत्तता के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन का क्रम भी भारत और दुनिया के कुछ अन्य देशों में जारी है.

इसी कड़ी में भारतीय फ़ुटबाल खिलाड़ी बाइचुंग भूटिया ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के मशाल रिले में शामिल होने के निमंत्रण को नकारते हुए कहा था कि तिब्बत के लोगों से वे भावनात्मक रूप से जुड़े हैं और इस रिले में हिस्सा नहीं लेंगे.

वाद-विवाद

बाइचुंग भूटिया ने कहा था, ''मैं तिब्बत के मुद्दे पर सहानुभूति रखता हूँ. सिक्किम में मेरे कई साथी हैं जो बौद्ध धर्म को मानते हैं. तिब्बत के लोगों और उनके संघर्ष में साथ देने का ये मेरा तरीक़ा है. मैं किसी भी तरह की हिंसा का विरोध करता हूँ.''

ओलंपिक मशाल
तिब्बत बीजिंग ओलंपिक का विरोध कर रहा है

पर इस बारे में भारत के वरिष्ठ खिलाड़ियों की राय अलग है. जीएस रंधावा भूटिया के निर्णय से असमहति जाहिर करते हुए कहते हैं, "भूटिया का निर्णय निजी फ़ैसला है. दुनिया में भारतीय फ़ुटबॉल बहुत निचले पायदान पर है. खिलाड़ी खेल भावना के साथ काम करे तो ही अच्छा है."

इस बारे में मिल्खा सिंह भी कहते हैं, "तिब्बत के लोगों की भावनाओं का मैं भी सम्मान करता हूँ पर भारत सरकार अपने स्तर पर ही इस मसले से निपट सकती है फिर हम खेल के बीच राजनीति को क्योंकर लाएं."

उधर, भारत सरकार ने चीन को आश्वस्त किया है कि मशाल को भारत में पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी. गृह मंत्रालय ने सोमवार को ओलंपिक मशाल की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है.

 
 
ओलंपिक मशाल चीन को मिली मशाल
कुछ लोगों के विरोध प्रदर्शन के बीच ग्रीस में ओलंपिक मशाल चीन को सौंपी गई.
 
 
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