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सोमवार, 08 मार्च, 2004 को 09:46 GMT तक के समाचार
 
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सबकी जीत हो..........
 

 
 
दौरे से उम्मीद
क्रिकेट रिश्तों में आई गरमाहट ने नई उम्मीद जगाई है
वर्षों से इस पर चर्चा हो रही है कि खेल और राजनीति का आपस में किस हद तक संबंध है.

एक तबका खेल और राजनीति को बिल्कुल अलग-अलग चीज़े मानता है तो दूसरा तबका इसे चोली-दामन का साथ मानता है.

विचार भले ही अलग-अलग हो लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में ख़ासकर क्रिकेट को इस बहस की जो मार पड़ी है उससे शायद ही किसी को इनकार होगा.

भारत में एक समाजशास्त्री ने कहा था कि क्रिकेट ही एक ऐसा धर्म है जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक को जोड़ता है.

शायद यही बात पाकिस्तान के भी संबंध में कही जा सकती है. लेकिन दुर्भाग्य 'क्रिकेट धर्म' के दो मानने वाले देश आपसी प्रतियोगिता के एक बड़े दौर से महरूम रहे हैं.

क्योंकि इस पर छाया पड़ी है सियासी जोड़-तोड़ की, तीन युद्धों की और मैदान या फिर मैदान से बाहर की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की.

14 साल बाद क्रिकेट प्रेमी दोनों देशों के बीच पूर्ण क्रिकेट संबंध बहाल होते देख ख़ुश है.

भारतीय टीम का दौरा शायद हाल के दिनों में उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी घटना हो.

इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का दावा करने वाली भारत सरकार ने भी मैच के दिनों में चुनाव से पल्ला झाड़ लिया.

अति उत्साह

मीडिया में हर ओर यही चर्चा है. सचिन की शोएब से मुक़ाबले की चर्चा है तो पाकिस्तान जाने के लिए वीज़ा की लंबी लाइन भी दिखाई जा रही है.

क्रिकेट प्रेमियों में ज़बरदस्त उत्साह है

विमान सेवा में बढ़ोतरी के साथ-साथ नए मार्गों पर बस चलाए जाने की भी चर्चा है.

लेकिन सबसे बड़ा सवालिया निशान इस पर है कि क्या भारतीय टीम का पाकिस्तान दौरा सफल होगा.

सफल जीत-हार के आधार पर नहीं. सफलता इस रूप में कि क्रिकेट के रिश्तों में आई गरमाहट का नया आधार कितना मज़बूत रहेगा और साथ में यह भी कि यह दौर कितने लंबे समय तक चलेगा.

एक क्रिकेट प्रेमी होने के नाते जीत-हार पर हमारी नज़र ज़रूर होगी.

लेकिन साथ में सभी यही चाहेंगे कि जीत पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के उस प्रयास की भी हो जो प्रतियोगिता के आयोजन में दिन-रात लगा है.

जीत उन सुरक्षा एजेंसियों की भी हो जिनकी एक चूक भी रिश्तों की गरमाहट के तेवर को बदल सकती है.

जीत उन क्रिकेट प्रेमियों की भी हो जो सालों से क्रिकेट के दो धुरंधर देशों को एक-दूसरे के यहाँ जाकर खेलते देखने की बाट जोह रहे हैं.

मैदान पर भले ही नतीजा जो भी हो लेकिन वे सभी लोग जीते जो क्रिकेट के माध्यम से दोनों देशों के बीच अमन और शांति का पैगाम बाँट रहे है.

 
 
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