सऊदी अरब में मेसी बनाम रोनाल्डो: क्या मध्य पूर्व वैश्विक खेलों का नया मैदान है?
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रियाद में आज फ़्रेंच चैंपियंस पीएसजी और सऊदी ऑल स्टार इलेवन के बीच फ़ुटबॉल मैच होने जा रहा है जिसमें दुनिया के जाने पहचाने खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं.
इस मैच में अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी, पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो, फ्रांस के किलियन एमबापे, ब्राज़ील के नेमार जैसे दिग्गज फुटबॉलर हिस्सा ले रहे हैं.
ये दोस्ताना मैच है और सऊदी अरब में इस प्रदर्शन मैच को कराए जाने के अलावा ये इस बात को भी दिखाता है कि खाड़ी देशों का खेल में असर बढ़ रहा है.
साल 2011 से ही फ़्रांस के क्लब पीएसजी में क़तर के शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाले निवेशकों का पैसा लगा और इसी पैसे से मेसी, रोनाल्डो, एमबापे और नेमार जैसे सुपर स्टार खिलाड़ियों को यह क्लब आकर्षित करने में क़ामयाब रहा है.
दिलचस्प ये है कि सऊदी ऑल-स्टार इलेवन की ओर से रोनाल्डो इन खिलाड़ियों का सामना करेंगे.
रोनाल्डो ने सऊदी क्लब अल नासर के साथ ढाई साल के एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किया है जिसके एवज में कथित तौर पर उन्हें 200 मिलियन डॉलर (क़रीब 1600 करोड़ रुपये) मिलेंगे.
21 करोड़ में नीलाम हुआ एक टिकट
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इस प्रदर्शन मैच को लेकर प्रशंसकों की दिलचस्पी इतनी अधिक है कि एक फ़ैन ने नीलामी में एक टिकट के लिए 26 लाख डॉलर (क़रीब 21 करोड़ रुपये) में ख़रीदा.
खेलों पर इतना धन खर्च होना ये भी संकेत देत है कि फ़ुटबॉल का प्रभाव यूरोप और दक्षिण अमेरिका से हटकर मध्यपूर्व की ओर जा रहा है.
सऊदी अरब, यूएई और क़तर जैसे खाड़ी देश पहले विदेशों में अधिग्रहण या प्रापर्टी और बिज़नेस में परम्परागत निवेश करते थे. लेकिन अब वे खेल उद्योग की ओर रुख़ कर रहे हैं.
विशेषज्ञ इसे 'सॉफ़्ट पॉवर' कूटनीतिक कोशिश और निवेश में विविधता लाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं.
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यूरोपीय फ़ुटबॉल
पीएसजी कोई अकेला यूरोपीय क्लब नहीं है जिस पर सीधे या परोक्ष रूप से खाड़ी देशों का नियंत्रण है.
पहली बड़ी टीम मैनचेस्टर सिटी थी, जिसे अरबपति शेख़ मंसूर बिन ज़ायेद अल नाहयान ने 2008 में ख़रीदा था. वो अमीरात राजशाही के सदस्य हैं.
पिछले कुछ सालों में यह लिस्ट और लंबी होती गई है. एक अन्य इंग्लिश क्लब न्यूकासल यूनाइटेड को जब सऊदी अरेबियन पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड ने ख़रीदा तो इस पर काफ़ी विवाद हुआ था.
इस अधिग्रहण की तभी इजाज़त दी गई जब सऊदी सरकार ने क्लब को नियंत्रित न करने का 'क़ानूनी रूप से बाध्यकारी आश्वासन' दिया.
इस सौदे को लेकर ब्रिटेन में विवाद पैदा हो गया, जिसकी एक बड़ी वजह पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या भी थी. ख़ाशोज्जी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के आलोचक थे और अक्टूबर 2018 में इस्तांबुल के सऊदी दूतावास में उनकी हत्या कर दी गई थी.
पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों का मानना है कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने ही इस हत्या का आदेश दिया था, हालांकि उन्होंने इन आरोपों को खंडन किया था. फ़ुटबॉल टीमों में हिस्सेदारी ख़रीदने के अलावा खाड़ी के देश बड़े मैच आयोजित करते रहे हैं और स्पांसरशिप के बड़े बड़े सौदे कर रहे हैं.
सऊदी अरब ने यूरोपीय फ़ुटबॉल मैचों के स्पेशल एडिशन को प्रमोट करने में भी काफ़ी पैसा लगाया है. जैसे इटैलियन और स्पैनिश सुपर कप्स दोनों ही रियाद में खेले जा रहे हैं.
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बड़े मैच
साल 2022 के फ़ीफ़ा मेंस वर्ल्ड कप की मेज़बानी क़तर ने किया और ये इस बात का उदाहरण है कि खाड़ी देश बड़े खेल आयोजनों में कितनी दिलचस्पी ले रहे हैं.
सऊदी अरब, यूएई, क़तर और बहरीन इस साल का एफ़-1 ग्रैंड प्रिक्सेज़ आयोजन की मेज़बानी करेंगे.
क़तर ने तैराकी, एथलेटिक्स और जिम्नास्टिक्स खेलों में वर्ल्ड चैंपियनशिप आयोजनों की मेज़बानी की है.
जबकि सऊदी अरब ने कई हाई प्रोफ़ाइल बॉक्सिंग मैचों और डब्ल्यूडब्ल्यूई कुश्ती के मैच आयोजित किए.
इसकी भी चर्चाएं बहुत गरम हैं कि एक रेसलिंग स्पोर्ट्स एंटरनेंटमेंट ब्रांड को एक सऊदी बिज़नेसमैन को बेचा जा सकता है.
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खाड़ी के मुल्कों की ओर रुख़
क़तर द्वारा वर्ल्ड कप की मेज़बानी ने इस बात का रास्ता साफ़ कर दिया है कि और बड़े खेल आयोजन खाड़ी देशों की ओर रुख़ करेंगे. कहा जा रहा है कि सउदी अरब मिस्र और ग्रीस के साथ मिलकर 2030 के वर्ल्ड कप की सामूहिक दावेदारी पेश करने पर विचार कर रहा है.
खेल के जानकारों का मानना है कि क़तर की राजधानी दोहा 2036 के समर ओलंपिक्स और पैरालंपिक्स की दावेदारी करने का मन बना चुका है.
हालांकि दोहा दो बार उम्मीद रह चुका है, लेकिन पिछले साल के वर्ल्ड कप में शानदार आधारभूत ढांचा और परिवहन की व्यवस्था उसके दावे को और मजबूत करेगी.
लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती. विंटर ओलंपिक्स भी इन दावेदारियों की संभावित सूची से अलग नहीं है.
बीते अक्टूबर में सऊदी अरब ने 2029 के विंटर एशियन गेम्स की मेज़बानी का अधिकार हासिल किया था, जोकि नेओम में होने जा रहा है.
रेगिस्तान के बीच स्थित इस नए शहर को तैयार करने पर 500 अरब डॉलर खर्च किए जाएंगे जहां स्कींग रेजॉर्ट भी होंगे. साल 2026 तक इसके बनकर तैयार होने की उम्मीद है.
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वैश्विक खेलों में बढ़ता दबदबा
सऊदी अरब, यूएई, क़तर और बहरीन के पास तेल और गैस के विशाल उद्योग हैं, जो उन्हें वैश्विक खेल प्रसासन में प्रतिस्पर्द्धा करने की वित्तीय ताक़त प्रदान करते हैं. लेकिन इसकी आलोचना भी होती रही है.
वर्ल्ड कप 2022 की दावेदारी के दौरान क़तर, अपने ख़राब मानवाधिकार रिकॉर्ड, ख़ासकर मज़दूरों के अधिकार और एलजीबीटी अधिकारों के लिए तीखी आलोचना के निशाने पर रहा था.
देश के अमीर, शेक़ तमीम बिन हमद अल थानी ने कहा कि उन्हें लगता है कि उनके देश को जितनी आलोचना झेलनी बड़ी वो ज़रूरत से ज़्यादा थी.
उन्होंने कहा, "जबसे हमें वर्ल्ड कप की मेज़बानी का सम्मान हासिल हुआ, क़तर को अभूतपूर्व रूप से आलोचना अभियान का शिकार बनाया गया."
ऐसा लगता है कि भले ही आलोचनाएं रहती हैं, लेकिन वैश्विक खेलों में खाड़ी देशों की भूमिका और बड़ी होती जाएगी.
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