आज का गुजरात
दंगों में कुछ लोगों का तो सब-कुछ छिन गया और रोज़ी-रोटी के सहारे भी जाते रहे. दो साल बाद भी बहुत से लोगों का वक़्त नहीं सुधरा है.
अहमदाबाद में रहने वाले इस व्यक्ति को आज भी अपनी रोज़ी का जुगाड़ करने में बहुत मुश्किल होती है.
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