| क्या कहती हैं भारतीय महिलाएँ | |||
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आठ मार्च, यानी विश्व महिला दिवस. हर साल महिलाओं के अधिकारों और सशक्तीकरण की बात होती है लेकिन उसके बाद..? क्या होता है उन सवालों का जो हर साल लाल-काली स्याही में बैनरों-पोस्टरों पर आते तो हैं पर हल नहीं होते. अब तक कहाँ पहुँची है बड़े से आसमान में छोटी सी आशा, पड़ताल कर रहे हैं पाणिनी आनंद. |
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