| मशहूर शायर मजाज़ की ज़िंदगी की कुछ झलकियां | |||
![]() |
शहर की रात और मैं नाशादो-नाकारा फिरूँ, जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा फिरूँ, ग़ैर की बस्ती है, कब तक दर-ब-दर मारा फिरूँ, ऐ ग़मे दिल क्या करूँ, ऐ वहशते-दिल क्या करूँ. मशहूर शायर असरारुल हक़ मजाज़ की 50वीं पुण्यतिथि पर उनके जीवन की कुछ झलकियों पर दिल्ली में एक प्रदर्शनी लगी. |
||
तस्वीरें देखने के लिए क्लिक करें |
|||||||||||||||||||||||
|
आगे |
||||||||||||||||||||||