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सोशल: 'देशद्रोह लगने के बाद हट कैसे जाता है?'
चैंम्पियंस ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में भारत के पाकिस्तान से हारने के बाद मध्यप्रदेश से यह ख़बर आई थी कि मध्यप्रदेश पुलिस ने कथित तौर पर पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने पर 15 लड़कों को गिरफ़्तार किया है.
बाद में इन लड़कों के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला दर्ज़ किया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया.
गुरूवार को इन लड़कों को कोर्ट में पेश करने के बाद उनसे देशद्रोह की धाराएं हटा ली गईं.
देशद्रोह की धारा का इस तरह इस्तेमाल करना कितना सही है? क्या सरकार इन नियमों का मनमाना इस्तेमाल कर रही है?
बीबीसी कहासुनी में हमने लोगों से यही सवाल किए. इनके जवाब में लोगों ने काफ़ी मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है.
'ऐसा होता है, जब हिंदू तंज कसते हैं'
सनी अंसारी का कहना है कि मुस्लिमों को पाकिस्तान समर्थक कहा जाता है और हिंदू उन पर इस तरह के तंज कसते हैं, तो ऐसी घटनाएं होती हैं. ये घटनाएं आगे भी होती रहेंगी. वहीं कुछ मुस्लिम भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं. हमें हर किसी की भावना का सम्मान करना चाहिए.
दिलावर ख़ान ने कमेंट किया कि यह आश्चर्य की बात है. मध्य प्रदेश के मरते हुए किसानों की आह सुनाई नहीं देती, जिन्हें बलात्कार पीड़ित लड़कियों की चीखें सुनाई नहीं देती, जिन्हें गाय के नाम पर मरते हुए इंसानों की चीखें सुनाई नहीं देती, उन्हें पटाखों की आवाज़ बहुत जल्दी सुनाई पड़ी.
'राजद्रोह था तो छोड़ा क्यों'
सतीश श्रीवास्तव ने लिखा है कि राजद्रोह को देश में आज की परिस्थिति के अनुसार सुधारकर, संवैधानिक रूप से परिभाषित किया जाए और एक बार राजद्रोह के तहत जिसे गिरफ़्तार किया जाए, उसे छोड़ा न जाए. सज़ा दी जाए.
मोइन ख़ान का कहना है कि एक खेल में ताली बजा दी तो वो देशद्रोही हो गया. खेल है कोई जंग नहीं और जब ये देशद्रोह है, तो उनके साथ खेलना इससे भी बड़ा देशद्रोह है. पूरी दुनिया से खेलो, पाकिस्तान से खेलो ही मत और पाकिस्तान में भी लाखों फ़ैन हैं यहां के, उनको भी फ़ांसी चढ़ा दो.
'सर्वोच्च न्यायालय दखल क्यों नहीं देता'
आशीष प्रताप सिंह लिखते हैं कि क्या राजद्रोह की धारा इतनी मामूली है कि सरकारें जब चाहें, जैसे चाहें इसे इस्तेमाल कर सकें. माननीय सर्वोच्च न्यायालय को स्वत: संज्ञान लेते हुए ऐसे मामलों में की जा रही मनमानी पर दखल देना चाहिए.
नवनीत जोशी के मुताबिक़, जब सरकार ने अपना फ़ैसला ही वापस ले लिया है, तो मनमानी कैसी?
तारीक़ फ़ैज़ल ख़ान लिखते हैं कि दूसरे देश की फ़िल्म देखना भी देशद्रोह है क्या?
'देशभक्ति थोपने का एक तरीका'
ज़ीन ख़ान ने कमेंट बॉक्स में सलाह दी है कि भारत बनाम पाकिस्तान मैच को हिंदू बनाम मुस्लिम मैच न बनाया जाए. ऐसी चीज़ों से बचना चाहिए.
सौरभ चौहान लिखते हैं कि इस कानून का बिल्कुल मनमाना इस्तेमाल हो रहा है. कोई भी किसी भी टीम को सपोर्ट कर सकता है और उसके जीतने पर ख़ुशी मना सकता है पर जब बात पाकिस्तान की आती है, तो उसके समर्थक देशद्रोही हो जाते हैं. पता नहीं क्यों. ये देशभक्ति थोपने का एक तरीका है और कुछ नहीं.
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