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सोशल: दिल वाले इमोजी और ब्रेस्ट कैंसर का कनेक्शन
काफी मुमकिन है कि हाल के दिनों में आपकी फ़ेसबुक टाइमलाइन पर दिल वाले इमोजी दिखे हों. ये इमोजी महिलाएं अपने फ़ेसबुक स्टेटस के तौर पर पोस्ट कर रही हैं. क्या आप इसका मतलब जानते हैं?
दरअसल यह ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जा रहा था. इस साल मई महीने के तीसरे हफ्ते को ब्रेस्ट कैंसर प्रिवेंशन वीक के तौर पर मनाया जा रहा है और यह पहल इसी का हिस्सा है.
इसी बहाने लड़कियां सोशल मीडिया ब्रेस्ट कैंसर के बारे में बात कर रही हैं. महिलाएं एक-दूसरे को मेसेज भेज कर ब्रेस्ट कैंसर के बारे में लिखने के लिए भी कह रही हैं.
हालांकि सिर्फ दिल वाले इमोजी से शुरुआत में यह साफ नहीं हो पाया कि इसे क्यों पोस्ट किया जा रहा है. कुछ लोग इसे ब्रिटेन में हुए चरमपंथी हमले के खिलाफ एकजुटता दिखाने का तरीका समझ रहे थे. बाद में पता चला कि इसका मकसद ब्रेस्ट कैंसरे के बारे में जागरूकता फैलाना है.
कुछ महिलाओँ का यह भी कहना था कि सिर्फ एक इमोजी बनाकर हम ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों के बारे में जागरूकता नहीं फैला सकते. कुछ ने इसमें पुरुषों को भी शामिल करने का सुझाव दिया. शबनम ख़ान ने लिखा,''लड़कियों, दिल मत बनाओ, ब्रेस्ट कैंसर के बारे में खुलकर बात करो. इन बातों में लड़कों को भी शामिल करो. पीरियड्स की बातों की तरह इसकी बातों से उन्हें अलग रखोगी तो फिर ख़ुद ही बाद में कहोगी 'तुम नहीं समझोगे'!''
अनीता मिश्रा ने लिखा,'' दिल बना-बनाकर खुद की बातों को रहस्य में रखने का क्या फायदा? ये बड़ी समस्या है जिसको जो पता हो शेयर करो जिससे सब लोगों में जागरूकता बढ़े.''
मानवी ने लिखा,''एक बात कहूँ, जिस - जिस महिला ने अपनी फेसबुक वॉल पर दिल वाली इमोजी लगाई है, जाहिर है उन्हें या उन्होंने किसी और महिला से मैसेज मिला या दिया होगा, तो क्यों न पुरूष मित्र भी इसमें अपनी सहभागिता दर्ज करायें?''
रूबा अंसारी ने लिखा,''वॉल पर दिल लगाने से ब्रेस्ट कैंसर के प्रति किस तरह जागरूकता फैलेगी मुझे नही पता. पर ज़्यादा मात्रा में ध्रूमपान, रेड मीट, नमक, सूर्य के तेज किरण, गर्भनिरोधक गोलियों के लगातार सेवन, से बचने की सलाह देने से ज़रूर जागरूकता फ़ैल सकती है. अगर स्तन में गांठ, निपल से रक्त मिश्रित स्राव (मटमैला खून) और निपल या स्तन की आकृति या आकार में बदलाव दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, ये कोई छिपाने या शर्माने की चीज़ नही है. यह एक गंभीर समस्या है.''
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक साल 2012 में भारत में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या 396,991 थी. ब्रेस्ट कैंसर को लेकर एक गलत अवधारणा है कि यह सिर्फ महिलाओं को होता है, जबकि ऐसा नहीं है.
'कैंसर रिसर्च यूके' के मुताबिक ब्रिटेन में हर साल तकरीबन 400 ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें ब्रेस्ट कैंसर के मरीज पुरुष होते हैं जबकि महिलाओं की संख्या 55 हज़ार के करीब है.
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