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शनिवार, 24 मई, 2008 को 03:14 GMT तक के समाचार
 
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महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी है 'चक्कीचालन'
 

 
 
चक्कीआसन
महिलाएं गर्भावस्था के दौरान पहले तीन महीनों में वह इसका अभ्यास कर सकती है
चक्कीचालन महिलाओं के लिए विशेष लाभदायक है. इससे चर्बी कम होती है, यह शरीर के वज़न को भी नहीं बढ़ने देता है.

इससे माहवारी भी नियमित रहती है. गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में इसका अभ्यास कर सकती हैं.

रोज 10-12 बार इसका अभ्यास करने से आप स्वस्थ बने रह सकते हैं.

कैसे लगाएं चक्कीचालन

ज़मीन पर कंबंल को दोहरा बिछाकर उसपर दोनों पैरों को सामने की ओर फ़ैलाकर बैठ जाएं.

दोनों पैरों में डेढ़ फ़ुट का अंतर होना चाहिए. इसके बाद दोनों हाथों को कंधे के सामने लाएं.

दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में मिलाकर मुट्ठी बना लें. हाथ को सीधा रखें और पीठ को भी सीधा रखने का प्रयास करें.

साँस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें और हाथों को दोनों पैरों की अंगुलियों के ऊपर से गोलाकार घुमाते हुए पीछे की ओर झुकें, साँस भरते हुए. इस दौरान हाथ को सीधा ही रखें.

यह चक्कीचालन का एक क्रम है. यह क्रम पाँच बार एक दिशा से और पाँच बार दूसरी दिशा में गोलाकार घुमाएँ.

सावधानी बरतें

आगे झुकते हुए पैरों को ऊपर घुमाते हुए बड़े से बड़ा गोलाकार बनाने का प्रयास करें. इस दौरान हाथ को कंधों की सीध में ही रखें, उन्हें मोड़ें न.

आगे आते हुए सांस छोड़ना है और पीछे जाते हुए सांस लेना है. यह आसन जितना संभव हो उतना ही करें.

चक्कीचालन की एक मुद्रा
चक्कीचालन के एक क्रम को पाँच बार एक दिशा से और पाँच बार दूसरी दिशा में गोलाकार घुमाएँ

इस दौरान अपना पूरा ध्यान कमर के निचले भाग, नितंब और नाभि से नीचे पेट और उनकी मांसपेशियों में आने वाले खिंचाव की ओर रखना चाहिए.

चक्कीचालन के लाभ

इस आसन को करने से पेट और पेड़ू (नाभी से नीचे का हिस्सा) के नसों की शक्ति बढ़ती है.

महिलाओं के लिए यह आसन बहुत उपयोगी है. यह उनकी माहवारी को नियमित करता है.

गर्भवती महिलाएं पहले तीन महीनों में इसका अभ्यास कर सकती हैं. शिशु की पैदाइश के बाद इसका अभ्यास करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है.

नौकासन

सुस्ती और आलस्य को दूर भगाने के लिए नौकासन का अभ्यास करें. यह शरीर की सभी प्रणालियों पर एक साथ अपना प्रभाव डालता है. इस आसन के बाद शवासन करने से तनाव दूर होता है. शरीर को तरोताजा रखने में यह आसन विशेष लाभदायक है.

नौकासन की मुद्रा
सुस्ती और आलस्य को दूर भगाने के लिए नौकासन का अभ्यास करें. यह शरीर की सभी प्रणालियों पर एक साथ अपना प्रभाव डालता है

कैसे करें नौकासन

ज़मीन पर कंबल को दोहरा बिछाकर उसपर बैठ जाएं. दोनों पैरों को मिलाकर रखें और दोनों हथेलियों को ज़मीन पर रखें, जंघाओं के पास. हथेलियों का रुख नीचे की ओर रखें.

अब पेट से साँस भरें. दोनों पैरों को ज़मीन से 15 सेमी ऊपर उठाएं. घुटनों से न मोड़ें. पैरों की अंगुलियों को बाहर की ओर खींचकर रखें. दोनों हथेलियों को भी जंघाओं के ऊपर खींचकर रखें.

इस अवस्था में पैरों को भी सिर्फ़ इतना ही उठाएं कि पैरों का अंगूठा नज़र आए.

सबसे ज़्यादा खिंचाव पेट की मांसपेशियों पर रहेगा, न रुक पाने की स्थिति में हाथों पैरों और सिर को भी नीचे ले आएं और धीरे-धीरे पूरी सांस बाहर निकाल दें.

यह एक क्रम है. इसे पाँच बार दोहराना चाहिए.

सावधानी

पहले सांस भरे फिर आसन शरीर को नौकासन की स्थिति में लेकर आएं. कुछ पल साँस रोककर रखें और अंत में साँस छोड़ते हुए वापस आ जाएं.

अंतिम स्थिति में पूरा ध्यान पेट का माँसपेशियों में खिंचाव की ओर लगाकर रखें.

नौकासन के फ़ायदे

सुस्ती और आलस्य दूर करने के लिए नौकासन एक महत्वपूर्ण आसन है. इसलिए अगर आप अपने शरीर को शिथिल करना चाहते हैं तो शवासन करने से पहले नौकासन का अभ्यास ज़रूर करें.

नौकासन पाचन, माँसपेशियों को और ख़ून का बहाव को एक साथ प्रभावित कर उनकी क्रियाशीलता को बढ़ा देता है.

यह आसन शरीर में छिपे विजातीय पदार्थों को दूर कर शरीर के सभी अंगों को शिथिल करता है. जिससे मानसिक शांति भी मिलती है.

 
 
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