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रविवार, 02 दिसंबर, 2007 को 06:25 GMT तक के समाचार
 
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फिलहाल नहीं छपेगी चेतावनी की तस्वीर
 

 
 
फाइल फ़ोटो
सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और तंबाकू के सेवन से लोग कैंसर का शिकार होते हैं
भारत सरकार ने एक दिसंबर से सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों पर तस्वीर के ज़रिए स्वास्थ्य चेतावनी जारी करने का निर्णय एक बार फिर टाल दिया है.

पिछले एक साल में यह चौथी बार है जब सरकार इस निर्णय को तय तारीख़ से लागू नहीं कर रही है.

भारत में हर साल लगभग छह लाख लोग तंबाकू के सेवन से होने वाले कैंसर और अन्य बीमारियों से मरते हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल पर यह निर्णय लिया गया था. स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदॉस का कहना है कि भारत में सबसे अधिक लोगों को मुँह का कैंसर होता है.

सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और तंबाकू के सेवन से लोग कैंसर का शिकार होते हैं.

दबाव

स्वास्थ्य मंत्री का मानना है कि तंबाकू से होने वाले रोगों की चेतावनी मुंह के कैंसर से पीड़ित लोगों की तस्वीरों के ज़रिए ज़्यादा अच्छी तरह दी जा सकती है.

 चार मुख्यमंत्री, 14 राज्य सरकारें और 150 सांसद इस तरह की चेतावनी का विरोध कर रहे हैं
 
अंबुमणि रामदॉस, स्वास्थ्य मंत्री

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह पर कनाडा, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर में पहले से ही ऐसी चेतावनी सिगरेट पर छपती है.

तंबाकू उद्योग के विरोध के चलते भारत सरकार ने इस मामले को एक बार फिर विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में मंत्रियों के एक समूह को सौंप दिया है.

हालाँकि इस मामले पर अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं दिया गया है, लेकिन बुधवार को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय को सरकारी वकील ने इस बारे में सूचना दी थी.

भारत सरकार द्वारा चेतावनी जारी करने के निर्णय को लागू न करने पर दो महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराज़गी जताई थी.

उस समय न्यायालय ने सरकार से पूछा था कि क्या 'तंबाकू लॉबी इतनी मज़बूत' है कि आप अपना निर्णय लागू नहीं कर पा रहे हैं.

स्वास्थ्य मंत्री रामदॉस ने पिछले हफ़्ते कहा था, "चार मुख्यमंत्री, 14 राज्य सरकारें और 150 सांसद इस तरह की चेतावनी का विरोध कर रहे हैं."

चेतावनी की अधिसूचना के अनुसार बिना तस्वीरों के सिगरेट और बीडी के पैकेट बनाने पर उत्पादक को पाँच हजार रुपए के जुर्माना के साथ दो साल की सज़ा हो सकती है. दूसरी बार इस गलती को करने पर दस हजार रुपए साथ पाँच साल की क़ैद हो सकती है.

 
 
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