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बुधवार, 02 अगस्त, 2006 को 14:53 GMT तक के समाचार
 
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'शीतल पेयों में कीटनाशक और अधिक'
 
कोका कोला
सीएसई ने कोका कोला और पेप्सी दोनों पर आरोप लगाए हैं
भारत की एक जानी मानी ग़ैरसरकारी संस्था का कहना है कि कई शीतल पेयों में अब भी कीटनाशकों की भारी मात्रा मौजूद है और ये मात्रा पहले की तुलना में अधिक हैं.

विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने एक अध्ययन के आधार पर ये आरोप लगाए हैं.

सीएसई ने तीन साल पहले एक सर्वेक्षण करके शीतल पेयों में ज़हरीले कीटनाशक होने की बात कही थी और अब सीएसई का कहना है कि ये मात्रा पहले की तुलना में और अधिक है.

उल्लेखनीय है कि सीएसई के आरोपों के बाद काफी बहस हुई थी और जाँच के लिए संसदीय समिति का भी गठन किया गया था.

सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण ने बुधवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि शीतल पेय की बड़ी कंपनियां अभी भी स्वच्छता को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि इन पेयों में भारी मात्रा में कीटनाशक अभी भी मौजूद हैं.

सीएसई की मांग है कि इसके लिए मानक बनाए जाएं. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय पर भी इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है.

उधर भारतीय शीतल पेय निर्माता एसोसिएशन (इस्डमा) ने एक वक्तव्य जारी करके कहा है, "शीतल पेय बिल्कुल सुरक्षित हैं. भारत में जो भी शीतल पेय बनते हैं उनमें अंतरराष्ट्रीय मानकों और राष्ट्रीय नियामकों का सख़्ती से पालन किया जाता है."

रिपोर्ट

सीएसई की नई रिपोर्ट के अनुसार शीतल पेयों के 11 ब्रांडों के 57 नमूनों में से सभी में तीन से छह कीटनाशक मिले.

इनमें से एक कीटनाशक लिनडेन की मात्रा तय मानक (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) से 54 प्रतिशत अधिक पाई गई है जबकि कोलकाता से लिए गए एक नमूने में यह मात्रा 140 प्रतिशत अधिक मिली.

मुंबई से लिए गए कोका कोला के एक नमूने में क्लोरपायरिफोस की मात्रा 200 प्रतिशत अधिक देखी गई.

भारत में प्रतिबंधित हेप्टाक्लोर की मात्रा 71 प्रतिशत मिली जो तय मानकों से चार प्रतिशत अधिक है.

कुल मिलाकर जहाँ कोका कोला में औसतन कीटनाशकों की 30 प्रतिशत अधिक मात्रा पाई जाती है जबकि पेप्सी में 27 प्रतिशत अधिक मात्रा पाई जा रही है.

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ने मानक बना दिए हैं लेकिन सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं की है और सीएसई का कहना है कि मानकों के बनने और अधिसूचना जारी करने के बीच में बड़ी कंपनियों का दबाव आ गया है.

सीएसई ने यह आरोप ऐसे दिन लगाया है जब राज्य सभा में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और मानदंडों से जुड़े एक विधेयक पर चर्चा हो रही है.

 
 
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