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शुक्रवार, 03 फ़रवरी, 2006 को 12:03 GMT तक के समाचार
 
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भारत में माइक्रोसॉफ़्ट के इंटरनेट बूथ
 

 
 
माउस
ग्रामीणों की कंप्यूटर तक पहुँच बहुत कम है
दुनिया में कंप्यूटर सॉफ़्वेयर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट कॉरपोरेशन भारत के ग्रामीण इलाकों में 50 हज़ार इंटरनेट बूथ खोलने की तैयारी कर रही है.

कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक ये इन्फ़ोरमेशन कियोस्क या इंटरनेट बूथ (यानि सूचना केंद्र) महज़ मनोरंजन का ज़रिया नहीं बनेंगे, बल्कि ग्रामीणों को जानकारी और आर्थिक लाभ भी पहुँचा पाएँगे.

इस योजना में स्वास्थ्य, मनोरंजरन के साथ-साथ व्यावसायिक क्षेत्र को भी शामिल किया जा रहा है.

भारत स्थित माइक्रोसॉफ़्ट कारपोरेशन के अधिकारियों ने दिल्ली में कंपनी की भावी योजना का विवरण देते हुए बताया कि अगले एक महीने के भीतर ही ऐसे 300 इंटरनेट बूथ काम करने लगेंगे.

पहले चरण में छह राज्यों को शामिल किया जा रहा है. ये हैं - उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और तमिलनाडु.

माइक्रोसॉफ़्ट के प्रोजेक्ट प्रभारी रंजीवित सिंह ने बीबीसी को बताया कि ऐसे इंटरनेट बूथ पर आम ग्रामीण भूमि संबंधी रिकॉर्ड से लेकर स्वास्थ्य संबंधी मसलों की जानकारी ले सकेंगे. यही नहीं, वह इस पर फिल्में भी देख सकेंगे और खेलों का नज़ारा भी.

'सक्षम'

 ये इंटरनेट बूथ इस तरह तैयार किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीणों को किसी तरह की दिक़्क़त न हो. अनपढ़ आदमी भी इस बूथ के ऑपरेटर से आग्रह कर इसका इस्तेमाल कर सकेगा
 
माइक्रोसॉफ़्ट के प्रोजेक्ट प्रभारी

सिंह कहते हैं, "ये इंटरनेट बूथ इस तरह तैयार किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीणों को किसी तरह की दिक़्क़ न हो. अनपढ़ आदमी भी इस बूथ के ऑपरेटर से आग्रह कर इसका इस्तेमाल कर सकेगा."

सिंह के मुताबिक ये ग्रामीण उद्यमियों के लिए व्यावसायिक लाभ का ज़रिया भी साबित हो सकते हैं. इसके लिए उन्हें किसी सरकारी योजना के तहत वित्तीय सहायता मिल सकती है या फिर वे ये बूथ लगाने के लिए बैंकों या अन्य वित्तीय संस्थाओं से ऋण भी ले सकते हैं.

भारत में शुरू होने वाली माइक्रोसाफ्ट की यह योजना 'सक्षम' के नाम से जानी जाएगी. संस्कृत में इसका मतलब है - आत्मनिर्भर.

माइक्रोसॉफ़्ट के अधिकारियों के मुताबिक 'सक्षम' न केवल स्थानीय उद्यमियों को इंटरनेट बूथ की स्थापना और संचालन के अवसर देगा बल्कि वे स्थानीय आईएसवी (इंडिपेंडेंट सॉफ़्वेयर वेंडर यानि स्वतंत्र सॉफ़्वेयर विक्रेता) समुदाय बनाने में भी कारगर होगा.

यानि इस योजना के ज़रिए स्थानीय प्रतिभाओं को आगे लाया जाएगा ताकि वे ग्रामीण विकास के लिए साफ्टवेयर का निर्माण कर सकें.

मिश्रित सेवाएँ, वित्तीय मदद

एक महीने के भीतर ही ऐसे 300 इंटरनेट बूथ काम करने लगेंगे
अधिकारियों का कहना है कि दो साल के गहन शोध से पता चला है कि उपभोक्ता अपनी सामाजिक-आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑनलाइन यानि इंटरनेट और ऑफलाइन यानि केवल कंप्यूटर के इस्तेमाल की मिश्रित सेवा चाहते हैं.

फ़िलहाल लोगों की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के बीच काफ़ी बड़ा अंतर है.

'सक्षम' लोगों को इन्फ़ोरमेशन कियोस्क या इंटरनेट बूथ ( सूचना केंद्र) की स्थापना करने में मदद करेगा. इसके लिए वित्तीय संस्थाओं और बैंकों से बात की जा रही है.

माइक्रोसॉफ़्ट के मुताबिक अभी वह उद्यमियों को ऋण दिलाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक समेत कई वित्तीय और बैंकिंग संस्थाओं से बात कर रहा है.

माइक्रोसॉफ़्ट इंडिया की प्रबंध निदेशक नीलम धवन बताती हैं कि माइक्रोसॉफ़्ट ने तीन ग़ैरसरकारी संस्थाओं दृष्टि, जयकिसान और एन-लॉग से भी बात कर रही है.

रंजीवजित सिंह बताते हैं कि ऐसे बूथ की स्थापना और संचालन के लिए माइक्रोसॉफ़्ट स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देगा और ऑपरेटर विभिन्न सेवाओं के लिए शुल्क लेंगे ताकि वह बैंक का कर्ज चुका सकें.

जाने माने कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने माइक्रोसाफ्ट की इस पहल को ग्रामीण भारत में सूचना क्रांति की दिशा में मील का पत्थर करार दिया.

यह क्रांति शहरी और ग्रामीण भारत के बीच की खाई को पाटने में मदद कर सकती है.

 
 
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