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शुक्रवार, 02 जनवरी, 2009 को 05:35 GMT तक के समाचार
 
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दस साल बाद श्रीलंकाई सेना किलीनोची में
 
श्रीलंका की सेना (फ़ाइल)
किलीनोची एलटीटीई का गढ़ माना जाता है
पिछले एक दशक में पहली बार श्रीलंका के सैनिक तमिल विद्रोहियों के प्रशासनिक मुख्यालय किलीनोची में दाख़िल हुए हैं. एलटीटीई की तरफ़ से इस पर कोई बयान नहीं आया है.

श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसके सैनिकों ने शहर में कदम रखा है और उन्होंने शहर के उत्तरी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण सड़क काराडिपोक्कु पर कब्ज़ा कर लिया है.

लगभग दस साल पहले तमिल विद्रोही संगठन लिब्रेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) ने इस शहर पर कब्ज़ा कर इसे अपना प्रशासनिक मुख्यालय बनाया था.

किलीनोची का ढहना

रक्षा मंत्रालय ने बयान में कहा है, "तमिल बाग़ियों का किलीनोची में क़िला ढहना अहम है क्योंकि सुरक्षाबल दक्षिणी, उत्तरी और पश्चिमी किनारों से शहर की परिधि पर पहुँच चुके हैं."

 तमिल बाग़ियों का किलीनोची में क़िला ढहना अहम है क्योंकि सुरक्षाबल दक्षिणी, उत्तरी और पश्चिमी किनारों से शहर की परिधि पर पहुँच चुके हैं
 
श्रीलंकाई रक्षा मंत्रालय

कई महीनों से श्रीलंका की सेना तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के कड़े विरोध के बावजूद किलीनोची पर कब्ज़ा जमाने के लिए भीषण संघर्ष कर रही थी.

एलटीटीई की तरफ़ से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन विद्रोहियों ने पिछले हफ़्ते कहा था कि वे सफलतापूर्वक शहर का बचाव कर रहे हैं.

पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने देश के उत्तरी भाग में जारी लड़ाई में एक दूसरे को भारी क्षति पहुँचाई है.

ग़ौरतलब है कि श्रीलंका की सेना ने हाल में किलीनोची के उत्तर में स्थित पारंथन क़स्बे को घेर लिया था जो तमिल विद्रोहियों के लिए सामरिक महत्व का है.

पारंथन की लड़ाई

सरकारी बयान में कहा गया है कि पारंथन पर क़ब्ज़े की लड़ाई ज़बरदस्त रही और काफ़ी देर तक चली.

पारंथन क़स्बे में सेना दाख़िल हो चुकी है लेकिन तमिल बाग़ियों ने सिलसिवार जवाबी हमले शुरु कर दिए हैं.

रक्षा मंत्रालय के अनुसार पारंथन में भीषण लड़ाई चली और बाग़ियों को बेदख़ल करने के लिए सेना ने हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमानों, मोर्टार गोले और तोपखाने का प्रयोग किया.

सेना ने वहाँ हुई लड़ाई में कम से कम 50 तमिल विद्रोहियों के मारे जाने का दावा भी किया था.

श्रीलंका में अल्पसंख्यक तमिल पिछले दो दशक से अधिक समय से अलग राज्य की माँग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं.

 
 
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