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शनिवार, 20 दिसंबर, 2008 को 08:12 GMT तक के समाचार
 
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'सुरक्षा के लिए सभी विकल्प खुले हैं'
 
प्रणव मुखर्जी
भारत ये भी कह चुका है कि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई विकल्प नहीं
भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा है कि 'यदि कोई देश आतंकवाद के बारे अपने आश्वासन पर कायम नहीं रह सकता तो भारत को अधिकार है कि अपने हितों और लोगों की सुरक्षा के लिए वह सभी विकल्प खुले रखे.'

मुंबई धमाकों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान यह दूसरा मौक़ा है जब भारत ने पाकिस्तान के संदर्भ में कहा है कि 'सभी विकल्प खुले हैं.'

मुंबई बम धमाकों में 180 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और 300 से अधिक घायल हुए थे. भारत ने इन हमलों के लिए पाकिस्तानी धरती पर मौजूद तत्वों के ज़िम्मेदार ठहराया था.

 अगर एक देश हमें दिए गए आश्वासनों पर कायम नहीं रह सकता, तो हमारी ज़िम्मेदारी है कि अपने हितों और लोगों की आतंकवाद से सुरक्षा के लिए हम सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करें
 

'पाक में सत्ता के कई केंद्र'

सिक्किम विश्वविद्यालय में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को अपने संदेश में उन्होंने कहा - "हमारे क्षेत्र में आतंकवाद एक बीमारी है..यदि एक देश हमें दिए गए आश्वासनों पर कायम नहीं रह सकता, तो हमारी ज़िम्मेदारी है कि अपने हितों और लोगों की आतंकवाद से सुरक्षा के लिए हम सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करें."

प्रणव मुखर्जी ने अपने संदेश में कहा, "हमनें इन वर्षों में अपने पड़ोसियों से बार-बार अनुरोध किया है कि वे आतंकवादी गतिविधियों के लिए मदद न दें और आतंक के ढाँचे को ध्वस्त करें...लेकिन आश्वासन देने के बावजूद हमारे अनुरोध को नज़रअंदाज़ किया गया है."

उनका कहना था कि मुंबई हमले दर्शाते हैं कि चरमपंथियों ने अपना तंत्र कितना फैला लिया है.

ग़ौरतलब है कि मुखर्जी ने उन कदमों की विस्तृत चर्चा नहीं की जिन पर इन परिस्थितियों में भारत सरकार विचार कर रही है.

 हमनें इन वर्षों में अपने पड़ोसियों से बार-बार अनुरोध किया है कि वे आतंकवादी गतिविधियों के लिए मदद न दें और आतंक के ढाँचे को ध्वस्त करें...लेकिन आश्वासन देने के बावजूद हमारे अनुरोध को नज़रअंदाज़ किया गया है
 

पाकिस्तान का ज़िक्र करते हुए भारतीय विदेश मंत्री का कहना था कि उस देश में 'आंतरिक सुरक्षा की स्थिति और ख़राब होती जा रही है और सत्ता के कई केंद्र पैदा हो रहे हैं.'

मुखर्जी का कहना था कि पाकिस्तान में 'आतंकवाद का ढाँचा' कायम है और सत्ता के कई केंद्र पैदा हो जाने से भारत विरोधी चरमपंथियों को अनेक हलकों से समर्थन भी मिल रहा है.

 
 
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