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शनिवार, 22 नवंबर, 2008 को 21:14 GMT तक के समाचार
 
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बांग्लादेश में आम चुनाव आगे बढ़ाए गए
 
ख़ालिदा ज़िया
ख़ालिदा ज़िया की पार्टी ने कहा था कि तारीख नहीं बढ़ाई तो चुनाव बहिष्कार होगा
बांग्लादेश में सैन्य नियंत्रण वाली आंतरिक सरकार ने देश में आम चुनावों की तारीख को और आगे बढ़ा दिया है.

बताया जा रहा है कि ऐसा पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया की पार्टी की ओर से चुनाव बहिष्कार की धमकी को ध्यान में रखते हुए किया गया है.

पिछले दिनों ख़ालिदा ज़िया ने सरकार से चुनाव स्थगित करने की माँग करते हुए कहा था कि जो लोग हज यात्रा पर गए हुए हैं उनके लौटने तक चुनाव टाल देना चाहिए जिससे कि तीर्थयात्रा पर गए लोग भी अपने मतों का प्रयोग कर सकें.

बांग्लादेश में तय कार्यक्रम के अनुसार इसी वर्ष 18 दिसंबर को आम चुनाव होने थे ताकि वहाँ लोकतांत्रिक सरकार की बहाली हो सके.

अब सैन्य नियंत्रण वाली अंतरिम सरकार ने पहले से टलते आ रहे आम चुनावों को एक बार फिर आगे बढ़ाने का फ़ैसला लिया है.

अभी यह घोषणा नहीं की गई है कि आम चुनावों को कब कराया जाएगा. 18 दिसंबर के बाद की किस तारीख पर चुनाव हो सकते हैं, यह अस्पष्ट है.

हालांकि बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने कहा है कि दिसंबर महीने में ही अंतिम दिनों में चुनाव कराए जा सकते हैं.

चुनाव आयोग ने भी चुनाव की अगली संभावित तारीख की घोषणा तो नहीं की है पर कहा है कि रविवार को तारीख तय करके बताई जा सकती है.

हटे आपातकाल

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया पहले ही कह चुकी हैं कि चुनाव से पहले आपातकाल ख़त्म किया जाए तभी निष्पक्ष चुनाव हो सकेंगे.

सेना समर्थित सरकार ने क़ानून व्यवस्था की ख़राब स्थिति का हवाला देते हुए जनवरी, 2007 में देश में आपातकाल लागू करने की घोषणा की थी.

बांग्लादेश की राजधानी ढाका से बीबीसी संवाददाता मार्क डमेट ने ख़बर दी है कि इस साल कोई 60 हज़ार लोग हज के लिए गए हुए हैं.

संभावना है कि ये सभी तीर्थ यात्री दिसंबर के अंत तक वापस लौट सकेंगे.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीएनपी नेता ख़ालिदा ज़िया ने ऐसा कड़ा रुख़ इसलिए भी अपनाया क्योंकि अवामी लीग की नेता शेख़ हसीना की पार्टी चुनाव जीतती दिख रही हैं.

सरकार ने देश में सबसे निष्पक्ष चुनाव करवाने का वादा किया है और उसने सभी राजनीतिक दलों से इसमें भाग लेने की अपील की है.

पिछले हफ़्ते ही ख़ालिदा ज़िया की पार्टी पदाधिकारियों ने कहा था कि वे अपनी प्रतिद्वंद्वी शेख़ हसीना से चुनाव से पहले चर्चा करना चाहती हैं.

इन दोनों नेताओं में पिछली दिसंबर के बाद से कोई चर्चा नहीं हुई है.

 
 
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