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रविवार, 02 नवंबर, 2008 को 14:20 GMT तक के समाचार
 
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बुद्धदेब-पासवान हमले में बाल-बाल बचे
 

 
 
बुद्धदेव भट्टाचार्य
बुद्धदेव भट्टाचार्य और रामविलास पासवान इस्पात कारखाने का भूमिपूजन करके आ रहे थे
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर ज़िले में राज्य के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और केंद्रीय इस्पात मंत्री रामविलास पासवान के काफ़िले पर हमला हुआ है.

रविवार को बरुआहाटी गांव के पास हुए इस हमले में दोनों नेता तो सुरक्षित बच गए हैं लेकिन उनके साथ चल रहे छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.

बुद्धदेव भट्टाचार्य और रामविलास पासवान शालभनी इलाके में लगने जा रहे देश के सबसे बड़े इस्पात कारखाने का भूमिपूजन कर के लौट रहे थे.

धमाका उस वक्त हुआ जब बुद्धदेव भट्टाचार्य और रामविलास पासवान का काफ़िला मिदनापुर से क़रीब पाँच किलोमीटर के फ़ासले पर था.

दोनों वीआईपी गाड़ियों के गुज़रने के कुछ ही पलों बाद बारूदी सुरंग में एक ज़बरदस्त धमाका हुआ जिसकी चपेट में एक पुलिस वाहन आ गया.

जो पुलिस वाहन विस्फोट की चपेट में आया है वो रामविलास पासवान की पायलट गाड़ियों में आखिरी वाहन था. सभी घायल पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

विस्फोट के पीछे कौन..?

आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस हमले के पीछे माओवादी गुटों का हाथ हो सकता है.

विस्फोट के कुछ ही समय बाद पुलिस महकमे के कई आला अधिकारी मौके पर पहुँच गए हैं और जाँच का काम शुरू हो गया है.

शुरुआती जाँच में पुलिस को घटनास्थल से क़रीब ढ़ाई किलोमीटर लंबा तार मिला है. माना जा रहा है कि इसी तार की मदद से बारूद में विस्फोट किया गया था.

जिस इलाके में विस्फोट हुआ है वहाँ आसपास के क्षेत्र में माओवादियों का व्यापक प्रभाव माना जाता है. माओवादियों के एक वरिष्ठ कमांडर का घर भी इसी इलाके में है. माना जा रहा है कि माओवादियों ने ही विस्फोट किया है.

एक कारण यह बताया जा रहा है कि शालबनी में इस्पात कारखाना लगाए जाने का माओवादी लगातार विरोध करते रहे हैं. हमला इससे जोड़कर देखा जा रहा है.

माओवादियों का इस विरोध के पीछे तर्क है कि इस कारखाने के लगाए जाने से वन अंचल पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. साथ ही लोगों की ज़मीन भी इस कारखाने में चली जाएगी.

पर जानकार इसकी दूसरी वजह भी मानते हैं. उनके मुताबिक माओवादियों को यहाँ इस्पात कारखाने के आने से नुकसान पहुँचेगा. सड़कों का बनना, सुरक्षा और व्यवस्थाओं का बढ़ना जैसी बातों से माओवादियों की अपनी गतिविधियाँ प्रभावित होंगी.

इससे माओवादियों को नुकसान होगा इसलिए माओवादी ऐसी किसी भी योजना-परियोजना का विरोध करेंगे.

शालबनी में एक करोड़ टन की क्षमता वाले इस प्रस्तावित इस्पात कारखाने पर जिंदल इस्पात कंपनी 35,000 करोड़ रूपए खर्च कर रही है.

 
 
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