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सोमवार, 13 अक्तूबर, 2008 को 10:35 GMT तक के समाचार
 
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बगलिहार बाँध पर ज़रदारी की चेतावनी
 
बगलिहार बाँध
जम्मू कश्मीर में बगलिहार पनबिजली परियोजना का मनमोहन सिंह ने उदघाटन किया
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि कश्मीर में जल समझौते को लेकर विवाद की वजह से भारत के साथ पाकिस्तान के संबंधों में खटास आ सकती है.

शुक्रवार को भारत प्रशासित कश्मीर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चनाब नदी पर बनी बगलिहार पनबिजली परियोजना का उदघाटन किया था.

उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि के अनुरूप तैयार इस परियोजना से दोनों ही देशों को लाभ मिलेगा.

जबकि पाकिस्तान का कहना है कि इस परियोजना से पाकिस्तान के खेतिहर इलाक़ों को पानी नहीं मिलेगा.

वर्ष 2005 में इस परियोजना को लेकर दोनों देशों के बीच उभरे मतभेदों के समाधान के लिए विश्व बैंक ने एक मध्यस्थ को नियुक्त किया था.

हालांकि इस समिति की रिपोर्ट को कभी सार्वजनिक नहीं किया गया लेकिन दोनों देशों का कहना था वे अपने रुख़ पर कायम हैं.

पाकिस्तान की सरकारी समाचार एजेंसी एपीपी का कहना है कि ज़रदारी ने रविवार को कहा, "चनाब नदी से पाकिस्तान में जल की आपूर्ति को रोकने की भारत की कार्रवाई से पाकिस्तान को काफ़ी बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ेगी."

 चनाब नदी से पाकिस्तान में जल की आपूर्ति को रोकने की भारत की कार्रवाई से पाकिस्तान को काफ़ी बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ेगी
 
आसिफ़ अली ज़रदारी, पाकिस्तान के राष्ट्रपति

उन्होंने कहा, "भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने न्यूयॉर्क में मुलाक़ात के दौरान मुझे आश्वसत किया था कि उनका देश जल समझौते को लेकर हुए संधि के प्रति कटिबद्ध है."

ज़रदारी ने कहा कि वे अपेक्षा करते हैं कि मनमोहन सिंह अपने रुख़ पर कायम रहेंगे.

'संबंधों में दरार'

आसिफ़ अली ज़रदारी
ज़रदारी ने कहा है कि इस परियोजना से पाकिस्तान के कृषि इलाक़ों को पानी नहीं मिलेगा

उन्होंने चेतावनी दी कि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल समझौते का यदि उल्लंघन किया गया तो दोनों देशों के बीच संबंधों में दरार आएगी.

उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल समझौता हुआ था जिसके तहत भारत से होकर पाकिस्तान जाने वाली छह नदियों के पानी के बारे समझौता हुआ था.

यह परियोजना वर्ष 2000 में जब से शुरु हुई है तब से ही विवाद में रहा है.

इस्लामाबाद का कहना था कि इस बाँध की वजह से सिंधु जल समझौते का उल्लंघन हुआ है.

वर्ष 2007 में विश्व बैंक ने पाकिस्तान के अधिकांश आपत्तियों को ख़ारिज कर दिया था हालांकि उसने भारत को निर्देश दिया था कि बाँध की ऊँचाई पाँच फ़ीट कम करे.

भारत का कहना है देश में बिजली की आपूर्ति के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण है.

 
 
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