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शनिवार, 31 मई, 2008 को 19:09 GMT तक के समाचार
 
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गूजरों के शवों का पोस्टमॉर्टम शुरु
 

 
 
आंदोलनकारियों के शव
कई शव अभी भी आंदोलनकारियों के पास रखे हुए हैं
राजस्थान में चल रहे गूजर आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के शवों का पोस्टमॉर्टम शुरु कर दिया गया है.

सरकार ने शनिवार की रात जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में रखे शवों में से एक का पोस्टमॉर्टम करवाया है और कहा कि परिजन आकर शव ले जाएँ.

जिस नवयुवक के शव का पोस्टमॉर्टम किया गया है उसके परिजनों ने साफ़ कर दिया है कि वे शव तभी लेंगे जब गूजर समाज शव लेने का फ़ैसला करेगा.

प्रेक्षकों का कहना है कि सरकार एक शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर गूजर समाज की प्रतिक्रिया देखना चाहती है जिससे कि और शवों के पोस्टमॉर्टम के बारे में फ़ैसला लिया जा सके.

इससे पहले सरकार ने गूजरों को प्रस्ताव दिया था कि वह शवों का पोस्टमॉर्टम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में करवाने को तैयार है लेकिन इस प्रस्ताव पर गूजरों की प्रतिक्रिया आने से पहले ही एम्स ने पोस्टमॉर्टम करने से इनकार कर दिया था.

इस बीच गूजरों का आंदोलन जारी है और शनिवार को किसी भी जगह से किसी तरह की हिंसा की ख़बरें नहीं मिली हैं.

आरक्षण के बेहतर फ़ायदे के लिए अपनी बिरादरी को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने को लेकर गूजरों के उग्र आंदोलन में अब तक आधिकारिक तौर पर 39 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें दो पुलिसकर्मी हैं.

शव, पोस्टमॉर्टम और खींचतान

आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के शवों को लेकर सरकार और गूजरों के बीच खींचतान पिछले कई दिनों से चल रही है.

सरकार की ओर से पिछले दो दिनों से पोस्टमॉर्टम करवाने के प्रस्ताव दिए जा रहे थे लेकिन गूजरों की अपनी शर्तें थीं.

 मैं समाज के साथ हूँ और उससे अलग नहीं जाना चाहता. अगर समाज यह फ़ैसला करेगा कि शव लेकर अंतिम संस्कार करना है तभी मैं शव लेने जाउँगा
 
हरदयाल, मृतक राजेश के चाचा

इस खींचतान में शनिवार की रात एक नया मोड़ आया जब अचानक सवाई मानसिंह अस्पताल में एक मेडिकल टीम बैठी और उसने शवों का पोस्टमॉर्टम शुरु करने का फ़ैसला किया.

आमतौर पर पोस्टमॉर्टम शाम के बाद नहीं किए जाते लेकिन डॉक्टरों ने अपवादस्वरूप रात कोई दस बजे पोस्टमॉर्टम करने का फ़ैसला किया.

पहला पोस्टमॉर्टम राजेश नामक के नवयुवक के शव का किया गया है. यह युवक दौसा में पुलिस फ़ायरिंग के दौरान घायल हुआ था और अस्पताल लाते हुए रास्ते में उसकी मौत हो गई थी.

जयपुर के उपपुलिस अधीक्षक मुंकुंद शर्मा ने बताया कि दौसा से आए पुलिस अधिकारी पोस्टमॉर्टम के दौरान मौजूद थे.

उन्होंने बताया कि नवयुवक के परिजनों को ख़बर कर दी गई है और कहा गया है कि वे आकर शव ले जाएँ. उनका कहना था कि पोस्टमॉर्टम के बाद शव को लेपलगाकर रख दिया जाएगा.

लेकिन अस्पताल परिसर में पिछले एक सप्ताह से डेरा डाले हुए राजेश के चाचा हरदयाल ने बीबीसी से कहा कि वे शव नहीं लेंगे.

किरोड़ी सिंह बैंसला, गूजरों के नेता
गूजरों ने पोस्टमॉर्टम को लेकर कई शर्तें रखी हैं

उनका कहना था, "मैं समाज के साथ हूँ और उससे अलग नहीं जाना चाहता. अगर समाज यह फ़ैसला करेगा कि शव लेकर अंतिम संस्कार करना है तभी मैं शव लेने जाउँगा."

उनका कहना था कि पुलिस ने शव के पोस्टमॉर्टम की ख़बर उन्हें नहीं दी है.

इससे पहले जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में रखे गए 14 शवों के बारे में एक आधिकारिक सार्वजनिक सूचना जारी की गई है.

इसमें कहा गया है कि मृतकों के परिजन अभी तक शवों को लाने नहीं पहुँचे हैं और एक हफ़्ते में इन शवों का हलत बिगड़ चुकी है.

सूचना में कहा गया है कि अगर शनिवार तक शवों को लेने कोई नहीं पहुँचा तो क़ानूनी प्रक्रिया के मुताबिक पुलिस इनका अंतिम संस्कार कर देगी.

उल्लेखनीय है कि आंदोलन के दौरान मारे गए 37 लोगों में से अधिकतर का दाह संस्कार नहीं हो सका है और उनके शव पाँच अलग-अलग जगहों पर रखे गए हैं.

जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल और बयाना के सरकारी अस्पतालों में रखे गए शवों को लेने से आंदोलनकारी इनकार कर रहे हैं.

इन दो स्थानों के अलावा बयाना, दौसा ज़िले के सिकंदरा और सवाई माधोपुर ज़िले में आंदोलनकारी शवों को अपने क़ब्ज़े में लिए हुए हैं.

जेल में भूख हड़ताल

गूजर आंदोलनकारी
आंदोलनकारी अभी भी डटे हुए हैं

इस बीच ख़बर मिली है कि जयपुर की जेल में बंद दो विधायकों प्रहलाद गुंजल और अतरसिंह भड़ाना ने भूख हड़ताल शुरु कर दी है.

गूजरों को आरक्षण देने की माँग के अलावा इनकी माँग है कि जेलों में बंद गूजरों को तुरंत रिहा किया जाए.

वे जेल अधिकारियों पर गूजरों पर अत्याचार करने का आरोप भी लगा रहे हैं.

इन दोनों विधायकों को 23 मई को गिरफ़्तार किया गया था.

ये दोनों ही पहले भारतीय जनता पार्टी में थे लेकिन पिछले साल हुए गूजर आंदोलन के बाद से पार्टी से इनके रिश्ते ख़राब होने लगे थे.

बाद में प्रहलाद सिंह गुंजल ने पार्टी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दामन थाम लिया था तो भड़ाना पार्टी से निलंबन के बाद बसपा के साथ चले गए थे.

 
 
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