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मंगलवार, 04 मार्च, 2008 को 12:52 GMT तक के समाचार
 
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35 साल बाद 'कश्मीर' की भारत वापसी
 

 
 
परमजीत कौर
परमजीत 35 साल बाद अपने पति से मिली
पाकिस्तान की जेलों में 35 साल बिताने के बाद भारतीय नागरिक कश्मीर सिंह वापस भारत पहुंच गए हैं और अपने परिवार में शामिल हो गए हैं.

कश्मीर सिंह की पत्नी और बच्चों ने मंगलवार को भारतीय सीमा में उनका स्वागत किया.

भारत और पाकिस्तान की वाघा-अटारी सीमा से कश्मीर सिंह भारत लौटे जहाँ उनका मेडिकल चेक-अप और पूछताछ हुई जिसके बाद वो अपने परिवार से मिले.

कश्मीर सिंह ने मीडिया के सामने कुछ नहीं कहा लेकिन उनकी पत्नी परमजीत कौर ने पत्रकारों से कहा कि कश्मीर बहुत खुश हैं और दोनों को आपस में ढेर सारी बातचीत करनी है.

कश्मीर सिंह के दो पुत्र हैं और एक पुत्री जिसमें से एक पुत्र और पुत्री इटली में रहते हैं जबकि एक पुत्र कश्मीर सिंह को लेने सीमा पर आया था.

इससे पहले उनके पुत्र से जब मीडिया ने पूछा कि वो अपने पिता को कैसे पहचानेंगे तो उनका कहना था, "वो मेरे पिता है. मेरी रगों में उनका खून है कैसे नहीं पहचानूंगा.. अब तो मैंने तस्वीर भी देख ली है. पहचान लूंगा."

जब कश्मीर सिंह गिरफ्तार हुए थे तो उनके पुत्र की उम्र मात्र चार साल थी.

कश्मीर सिंह भारत पहुंच गए लेकिन इस रिहाई में उनकी मदद करने वाले पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी भारतीय सीमा में नहीं आ पाए क्योंकि भारत सरकार ने उनको वीज़ा नहीं दिया था.

उन्होंने पाकिस्तानी सीमा से ही भारतीय पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भारत को भी पाकिस्तानी युद्धबंदियों और पाकिस्तानी क़ैदियों को रिहा करना चाहिए.

सीमा पर कश्मीर सिंह के परिवार के साथ बड़ी संख्या में लोग भी थे जो कश्मीर सिंह के स्वागत के लिए जुटे हुए थे.

जासूसी के आरोप

पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले कश्मीर सिंह पर जासूसी करने का आरोप था जिसके बाद वो कई बरसों तक पाकिस्तान की जेल में रहे.

कश्मीर सिंह - अब और तब

पिछले हफ्ते राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने उन्हें आम माफ़ी दे दी थी.

उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 2003 से लेकर अब तक तीन हज़ार से अधिक क़ैदियों को रिहा किया गया है.

दोनों देशों ने 2007 में न्यायिक समिति का गठन किया था जिसकी ताज़ा बैठक फरवरी महीने में हुई है.

इस बैठक में तय किया गया कि दोनों देश क़ैदियों की सूची बनाएंगे और कोशिश करेंगे कि उन्हें जल्दी रिहा किया जाए.

ख़बर है कि मार्च के अंत तक दोनों देशों की जेलों में बंद कई मछुआरों को रिहा किया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि दोनों ही देशों में एक दूसरे के मछुआरे बड़ी संख्या में जेलों में है लेकिन ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जिन्हें जासूसी के आरोप में जेल में रखा गया है.

ऐसा ही मामला सरबजीत का था और पिछले दिनों गोपालदास नामक एक भारतीय नागरिक ( पाकिस्तानी जेल में बंद) ने अपने भाई के ज़रिए भारत की सुप्रीम कोर्ट में अपील की है कि पाकिस्तान में उनकी सज़ा पूरी हो गई है इसलिए उन्हें छुड़वाया जाए.

इस अपील में कहा गया है कि पाकिस्तानी जेलों में 182 ऐसे क़ैदी हैं जिन्हें जासूसी या अन्य आरोपों में बंद किया गया है.

 
 
प्रदर्शन सेना पर सवाल
एक रिपोर्ट में भारतीय सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगा है.
 
 
बैनर 'भारत में स्थिति बेहतर'
एक संस्था के मुताबिक़ भारत में मानवाधिकारों की स्थिति बेहतर हुई है.
 
 
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