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बेनज़ीर भुट्टो का अंतिम संबोधन
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पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो की 27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी में हुई
एक रैली में हत्या कर दी गई.
वह रैली को संबोधित करके बस बाहर निकली ही थीं कि उन पर जानलेवा हमला हुआ और कुछ गोलियाँ उनकी गर्दन में लगीं. रैली में एक ज़ोरदार आत्मघाती हमला भी हुआ जिसमें अनेक लोग हताहत हुए. बेनज़ीर भुट्टो ने रावलपिंडी रैली को जिन शब्दों में संबोधित किया वे उनके आख़िरी शब्द बन गए हैं और ऐतिहासिक धरोहर भी.
बेनज़ीर भुट्टो कई वर्षों के राजनीतिक वनवास के बाद अक्तूबर 2007 में स्वदेश लौटी थीं और वतन की सरज़मीं को छूकर भावुक हो उठी थीं.
स्वदेश लौटने पर बेनज़ीर भुट्टो ने देश के भविष्य के लिए यह विचार व्यक्त किए थे कि एक आधुनिक राष्ट्र का निर्माण होगा जहाँ उदारवादी विचारों को संरक्षण मिलेगा.
बेनज़ीर ने स्वदेश वापसी के साथ ही पाकिस्तान में लोकतंत्र की मज़बूती के लिए अभियान शुरू कर दिया था. इस्लामाबाद में एक रैली निकालने से जब बेनज़ीर भुट्टो को रोका गया तो उन्होंने इन शब्दों में विरोध जताया था -
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