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'बार बालाओं का शराब परोसना सही'
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भारत में सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी दिल्ली के रेस्तराओं और होटलों में औरतों के शराब परोसने पर लगी रोक हटा ली है और इन महिला
साक़ियों की उम्रसीमा भी घटाई गई है.
न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा और न्यायमूर्ति एचएस बेदी की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को सही ठहराया है जिसमें महिलाओं को होटलों और रेस्तराओं में देर रात तक शराब परोसने की अनुमति दी गई थी. सर्वोच्च अदालत ने इन महिला साक़ियों की आयु सीमा भी 25 से घटाकर 21 साल कर दी है. हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को आधार बनाते हुए दलील दी गई थी कि देर रात तक महिलाओं का शराब परोसना ठीक नहीं है. दिल्ली सरकार का भी कहना था कि 'बार' में औरतों के शराब परोसने पर प्रतिबंध जारी रहना चाहिए क्योंकि उनके प्रति पुरुषों का व्यवहार ठीक नहीं होता. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को ख़ारिज करते हुए हाईकोर्ट के फ़ैसले को सही ठहराया. दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2006 में 92 साल पुराने एक क़ानून के कुछ हिस्सों को ख़त्म कर दिया था जिसमें औरतों को 'बार' और रेस्तराओं में शराब परोसने की मनाही थी. अदालत के इस क़दम का बहुत सी शराब परोसने वाली लड़कियों और 'इंडियन होटल ऐसोसिएशन' ने स्वागत किया था. |
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