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शुक्रवार, 23 नवंबर, 2007 को 13:10 GMT तक के समाचार
 
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'लगा कि मेरे मोबाइल में विस्फोट हुआ है'
 

 
 
वाराणसी विस्फोट
वाराणसी पहले भी धमाके झेल चुका है
उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी और फ़ैज़ाबाद शहरों में अदालतों के पास सिलसिलेवार बम धमाके हुए. पुलिस का मानना है कि वाराणसी में हुए धमाके ज़्यादा शक्तिशाली थे और इसीलिए वहाँ नौ लोग मारे गए.

धटनास्थल पर मौजूद कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी के सामने अपने अनुभव बयान किए.

मीरा यादव, एक वकील

वाराणसी में न्यायालय में हुए विस्फोट की प्रत्यतक्षदर्शी वकील मीरा यादव ने बीबीसी को बताया, "मैं दीवानी कचहरी में अपनी सीट पर बैठी थी. मुख्य द्वार के सामने वाली जगह में ही एक खंभा छोड़कर दूसरे खंभे के पास मेरी सीट है. ये विस्फोट खंभे के पास ही एक दो फीट की दूरी पर हुआ."

 मुझे लगा कि मेरे मोबाइल में विस्फोट हुआ है. मैनें अपना कोट उतारकर फेंका और कान में उंगली डाली. उस समय धुंए के अलावा कुछ नहीं दिखा. सारे लोग भागने और चिल्लाने लगे. तब मुझे लगा कि ये तो बम विस्फोट है. उसके कुछ देर बाद क्लेक्ट्रेट में विस्फोट हुआ
 
मीरा, वकील

मीरा ने कहा, "मुझे लगा कि मेरे मोबाइल में विस्फोट हुआ है. मैनें अपना कोट उतारकर फेंका और कान में उंगली डाली. उस समय धुंए के अलावा कुछ नहीं दिखा. सारे लोग भागने और चिल्लाने लगे. तब मुझे लगा कि ये तो बम विस्फोट है. उसके कुछ देर बाद क्लेक्ट्रेट में विस्फोट हुआ."

मीरा ने बताया, "मेरे एक क्लाइंट के पिता को भी पैर में छर्रा लगा है. एक अधिवक्ता भोला सिंह की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. दीवानी कचहरी में कुल मिलाकर 10-15 लोग घायल हुए हैं और 10-12 मर गए हैं. ये काफी भयंकर धमाका है."

उन्होंने कहा कि सुरक्षा के इंतजाम पर्याप्त नहीं थे. इसकी किसी को भी आशंका नहीं थी. ये इतिहास में पहली ऐसी घटना है कि कचहरी में ऐसा हादसा हुआ है.

ओपी श्रीवास्तव, एक वकील

एक वकील ओपी श्रीवास्तव ने बीबीसी को बताया, "मैं उस समय चाय पी रहा था जब बहुत ज़ोर से धमाके की आवाज़ आई. हमें शक़ हुआ कि ये धमाका है या फिर कोई टायर फटा है. इतनी देर में दूसरे धमाके की आवाज़ आई और भयंकर धूल उड़ने लगी."

 चारों तरफ़ लाशें बिखरी पड़ी थीं और हम लाखों को हाथ लगाने से भी डर रह थे कि कहीं कोई तीसरा धमाका न हो जाए. प्रशासन ने बहुत ढील दिखाई और ख़ासी देर के बाद पुलिस और अन्य प्रशासनिक कर्मचारी वहाँ पहुँचे. ज़्यादातर घायलों को लोगों ने ही अस्पताल पहुँचाया
 
ओपी श्रीवास्तव, वकील

श्रीवास्तव का कहना है, "चारों तरफ़ लाशें बिखरी पड़ी थीं और हम लाखों को हाथ लगाने से भी डर रह थे कि कहीं कोई तीसरा धमाका न हो जाए. प्रशासन ने बहुत ढील दिखाई और ख़ासी देर के बाद पुलिस और अन्य प्रशासनिक कर्मचारी वहाँ पहुँचे. ज़्यादातर घायलों को लोगों ने ही अस्पताल पहुँचाया."

रोहित - एक छात्र

एक छात्र रोहित घटनास्थल के पास ही मौजूद थे. उनका कहना था, "चारों मृतकों के अंग बिखरे हुए थे. पुलिस भी ख़ासी लापरवाही दिखा रही थी. विस्फोट के दो-तीन घंटे बाद तक उस जगह को सील नहीं किया गया था. आम लोग, पत्रकार सभी वहाँ आ जा रहे थे जिससे प्रमाण और सुराग दोनो ही नष्ट होने का ख़तरा था."

लगभग एक ही समय पर हुए इन धमाकों के बाद राज्य भर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. इसके अलावा तीनों शहरों में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी एनएसजी और बम निरोधक दस्तों को बुला लिया गया है.

 
 
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