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बुधवार, 29 अगस्त, 2007 को 12:02 GMT तक के समाचार
 
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मुख्यमंत्री को मसखरा समझने की सज़ा
 

 
 
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फ़ोटो-प्रशांत रवि)
एत ज़िलाधिकारी को मुख्यमंत्री को फ़ोन पर न पहचानने का खामियाज़ा भुगतना पड़ा
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को टेलीफ़ोन पर न पहचानने वाले एक ज़िलाधिकारी का तबादला कर दिया गया.

नीतीश कुमार ने ज़िलाधिकारी को फ़ोन पर कहा कि मैं मुख्यमंत्री बोल रहा हूँ तो अधिकारी ने जवाब दिया, "कहाँ का मुख्यमंत्री? हर आदमी अपने को मुख्यमंत्री बताता है."

बिना देर किए हुए मुख्यमंत्री ने तुरंत कहा, "मैं नीतीश कुमार बोल रहा हूँ और आपको आपके व्यवहार के लिए निलंबित कर दिया जाना चाहिए."

मुख्यमंत्री ने तुरंत राज्य के मुख्य सचिव अशोक चौधरी को फ़ोन किया और सहरसा के ज़िलाधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए कहा.

 मैं नीतीश कुमार बोल रहा हूँ और आपको आपके व्यवहार के लिए निलंबित कर दिया जाना चाहिए
 
नीतीश कुमार

बिहार में आई हाल की बाढ़ से सहरसा ज़िले के प्रभावित लोगों को राहत सामग्री के सही वितरण न होने के बारे में जानकारी लेने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ज़िलाधिकारी निरंजन कुमार चौधरी को फ़ोन किया था.

शिकायत

जनता दर्शन के अपने साप्ताहिक कार्यक्रम के दौरान उन्हें इस बात की शिकायत मिली थी कि राहत सामग्री का वितरण ठीक से नहीं हो रहा है.

काफ़ी गुस्से में दिख रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्य सचिव को बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की शिकायतें और दिक्कतें जानने के लिए एक विशेष कार्य बल बनाने का भी आदेश दिया.

उच्चाधिकारियों की बैठक के बाद सहरसा के ज़िलाधिकारी को तुरंत पद छोड़ देने का आदेश थमा दिया गया.

 यह एक ग़लतफ़हमी थी. मैं समझ नहीं पाया कि फ़ोन कहाँ से आ रहा है.
 
निरंजन कुमार चौधरी

उनकी जगह नर्मदेश्वर लाल नाम के दूसरे अधिकारी को ज़िलाधिकारी की ज़िम्मेदारी संभालने को कहा गया है.

बाद में निरंजन कुमार चौधरी ने कहा कि उन्हें कुछ ग़लतफ़हमी हो गई थी.

उन्होंने कहा, "मुझे मुख्यमंत्री का फ़ोन आया था लेकिन फ़ोन पर आवाज़ ख़राब आने की वजह से मैं उनकी आवाज़ पहचान नहीं पाया. मैंने सोचा कि कोई शैतानी कर रहा है."

ग़लतफ़हमी

हाल की बाढ़ के बाद, प्रभावित ज़िलों के ज़िलाधिकारी हर स्थिति से निपटने के लिए घंटों काम कर रहे हैं.

ऐसे समय में उन्हें लगातार राज्य के मंत्रियों, अधिकारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों के फ़ोन आते रहते हैं.

जानकार लोगों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में अधिकारी तंग करने के लिए आने वाली फ़ोन कॉलों से परेशान हो जाते हैं.

निरंजन कुमार चौधरी ने कहा, "समझने में कहीं ग़लती हो गई. मैं नहीं समझ सका कि फ़ोन कहाँ से आ रहे हैं."

उन्होंने बताया कि अपने को निर्दोष साबित करने के लिए वो अब पटना जा रहे हैं.

उनका कहना है, "यह एक ग़लतफ़हमी थी. मैं समझ नहीं पाया कि फ़ोन कहाँ से आ रहा है".

 
 
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