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मंगलवार, 14 अगस्त, 2007 को 20:38 GMT तक के समाचार
 
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भारत में स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगाँठ
 
लाल क़िले पर सुरक्षा इंतज़ाम
लाल क़िले के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं
भारत में स्वतंत्रता की 60वीं सालगिरह के समारोहों के लिए तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं.

लाल क़िले के मुख्य समारोह स्थल के आसपास कड़ी निगरानी रखी जा रही है जहाँ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राष्ट्रीय झंडा फहराएँगे.

राजधानी दिल्ली सहित कई अन्य शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

दिल्ली के विशेष पुलिस उपायुक्त एस बी देओल ने सुरक्षा इंतज़ामों की जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अर्द्धसैनिक बलों की 35 कंपनियाँ तैनात की गईं हैं.

ग़ौरतलब है कि ये पिछले वर्ष के मुक़ाबले तीन ज्यादा है.

मुख्य समारोह स्थल लाल क़िले के प्रांगण में 10 हज़ार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे.

मुख्य समारोह स्थल के आसपास किसी भी तरह की उड़ानों पर पाबंदी रहेगी. इसके अलावा हेलिकॉप्टर से सड़कों और ऊंची इमारतों पर नज़र रखी जाएगी.

दिल्ली से लगनेवाली सभी सीमाओं की निगरानी कड़ी कर दी गई है और संदिग्ध चरमपंथियों को दिल्ली में दाख़िल होने से रोकने के लिए उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के पुलिस प्रशासन के साथ तालमेल रखा जा रहा है.

समारोह के दौरान लाल क़िले और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं.

राष्ट्रपति का संबोधन

इधर स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पहली बार देश को संबोधित करते हुए कहा है कि विकास में असमानता से प्रगति रुक जाती है और ज़रूरत है कि आर्थिक उदारीकरण का पूरा फ़ायदा समाज के हर वर्ग तक पहुँचे.

 प्रगति समाज के हर वर्ग के लिए हो ताकि कठोर मेहनत कर रही आम जनता और जो लोग ग़रीबी की रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उन्हें भी आर्थिक विकास का फ़ायदा हो.
 
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का कहना था कि प्रगति समाज के हर वर्ग के लिए हो ताकि कठोर मेहनत कर रही आम जनता और जो लोग ग़रीबी की रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उन्हें भी आर्थिक विकास का फ़ायदा हो.

उनका कहना था कि समाज में आर्थिक दृष्टि के पिछड़े वर्ग के सशक्तिकरण का सपना अभी पूरा होना बाक़ी है.

उन्होंने कहा कि जो विकास में आगे हैं वो कम विकसित लोगों को प्रेरणा दें ताकि राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में सभी का सहयोग मिल सके.

राष्ट्रपति पाटिल का कहना था कि इतिहास गवाह है कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था.

उनका कहना था, "ध्यान रखने की ज़रूरत है कि महिलाएँ समाज के हाशिए पर न रह जाएँ. हम संकल्प लें कि उन्हें हर क्षेत्र में भागीदारी देंगे."

 
 
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