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मंगलवार, 19 सितंबर, 2006 को 15:30 GMT तक के समाचार
 
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विवाद का विषय बना कृष्ण का आधुनिक रूप
 

 
 
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में कृष्ण प्रतिमा
दो पुजारियों ने कृष्ण को जींस-शर्ट पहना दी और हाथों में मोबाइल पकड़ा दिया
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में पुजारियों ने हिंदुओं के आराध्य भगवान कृष्ण के गर्भगृह के कपाट खोलने से मना कर दिया जिसकी वजह से दर्शन करने पहुँचे श्रद्धालु क़रीब ढाई घंटे तक अपने आराध्य का दर्शन नहीं कर सके.

कपाट तब खुले जब स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुँचकर हस्तक्षेप किया.

पुजारियों के कपाट न खोलने के पीछे की वजह पिछले दिनों मंदिर में स्थापित कृष्ण प्रतिमा की वेशभूषा से की गई छेड़छाड़ बताई जा रही है.

पिछले दिनों इस मंदिर के दो पुजारियों आनंद किशोर और जुगल किशोर ने कृष्ण जी की प्रतिमा को जींस और कमीज़ पहना दी थी और भगवान के हाथ में मोबाइल फ़ोन पकड़ा दिया था.

भगवान की वेशभूषा में पारंपरिक भारतीय परिधान और हाथ में बांसुरी शामिल हैं.

लोग कृष्ण जी के इस आधुनिक भेष को देखकर चौंके भी और कुछ नाराज़ भी हुए. मामले ने तूल पकड़ा, विरोध-प्रदर्शन हुए और बात प्रशासन के पास जा पहुँची.

सरकार की ओर से इस मंदिर के लिए नियुक्त मंदिर प्रशासक, ज़िले की एक न्यायिक मजिस्ट्रेट रितु नंदा ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए दोनों पुजारियों को तीन दिनों के लिए मंदिर आने से मना कर दिया.

इसपर गोस्वामी समुदाय के पुजारियों ने विरोध व्यक्त करते हुए मंगलवार को मंदिर के कपाट ही बंद कर दिए और उन्हें खोलने से मना कर दिया था.

ग़ौरतलब है कि ये दोनों पुजारी भी गोस्वामी समुदाय के ही हैं.

विरोध

इससे पहले भगवान कृष्ण की प्रतिमा को आधुनिक वस्त्र पहनाए जाने का व्यापक विरोध करते हुए कुछ हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं और कुछ श्रद्धालुओं ने इन पुजारियों के पुतले जलाए थे. विरोध के तहत सोमवार को वृंदावन बंद का आह्वान भी किया गया था.

 जो कुछ भी हुआ वो बहुत ग़लत था. यह भगवान कृष्ण और हिंदू धर्म के सम्मान के ख़िलाफ़ था
 
महंत मुन्नालाल गोस्वामी, बांके बिहारी मंदिर

कृष्ण जी की प्रतिमा को आधुनिक कपड़े पहनाने के चलते बनारस सहित कुछ अन्य स्थानों पर भी विरोध-प्रदर्शन की ख़बरें मिली हैं.

इस बाबत मंदिर के एक महंत मुन्नालाल गोस्वामी ने कहा, "जो कुछ भी हुआ वो बहुत ग़लत था. यह भगवान कृष्ण और हिंदू धर्म के सम्मान के ख़िलाफ़ था."

उधर दोनों पुजारियों ने ऐसा करने के लिए क्षमा माँगी है और कहा है कि उनसे ख़ुद कृष्ण जी ने ऐसा करने को कहा था इसलिए उन्होंने ऐसा किया. उन्होंने लोगों से कहा है कि इसे राजनीतिक रंग न दिया जाए.

एक अन्य मंदिर प्रबंधक गोकुल बिहारी दास कहते हैं कि यह एक शर्मनाक काम है. ऐसा करने वालों को गिरफ़्तार किया जाना चाहिए.

एक स्थानीय पत्रकार ने बीबीसी से कहा कि पुजारियों के ख़िलाफ़ उनके इस कारनामे की वजह से आपराधिक मामला भी दर्ज हो सकता है.

 
 
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