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बुधवार, 06 सितंबर, 2006 को 17:41 GMT तक के समाचार
 
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मज़दूरों के 'बचने की संभावना कम'
 

 
 
कोयला खदान
झरिया के कोयला खदानों में विस्फोटक और ज़हरीली गैसों का रिसाव आम बात है
झारखंड में झरिया के पास नगदा कोयला खान में विस्फोट के बाद फँसे 50 से अधिक मज़दूरों के जीवित बच पाने की संभावना धूमिल होती जा रही है.

इस खान का प्रबंधन देखने वाले भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल)के प्रबंध निदेशक पार्थो भट्टाचार्य ने खान का दौरा करने के बाद बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा है,"अभी पक्के तौर पर कुछ कहना मुश्किल है लेकिन इस तरह की दुर्घटना में लोगों के जीवत बचने की संभावना बहुत कम होती है."

उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया कि कहा कि बीसीसीएल ने सभी एहतियाती इंतज़ाम किए थे लेकिन दुर्घटना एक ऐसे विस्फोट के कारण हुई है जिसे रोकना संभव नहीं था.

 इस तरह की दुर्घटना में लोगों के जीवत बचने की संभावना बहुत कम होती है
 
बीसीसीएल के प्रबंध निदेशक

बिहार कोलियरी मज़दूर संघ के नेता एसके बख्शी ने आरोप लगाया है कि प्रबंधन ने सुरक्षा उपायों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया.

उन्होंने बीसीसीएल प्रबंधन पर आरोप लगाया,"यह दुर्घटना नहीं एक विनाशकारी घटना है जो प्रबंधन की लापरवाही के कारण हुई है,कोई गैस का स्तर चेक नहीं करता था,कोई एहतियात नहीं बरती जाती थी.किसी का बचना मुश्किल ही लग रहा है."

उनका कहना था कि अधिकारियों को मज़दूरों ने कई बार बताया था कि गैस का रिसाव है और इसके लिए एहतियात के क़दम उठाए जाने चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया.

बचाव कार्य

मज़दूरों के परिजनों को शिकायत है कि राहत टीम भी बहुत देर से पहुँची और अधिकारी भी खोज-ख़बर लेने बहुत समय तक नहीं पहुँचे थे.

पश्चिम झरिया इलाक़े की यह ख़दान राँची से कोई 75 किलोमीटर दूर उत्तर पूर्व में भटडीह में है.

घटना नगदा खदान की 17 नंबर इनक्लाइन में बुधवार शाम साढ़े सात बजे हुई है.

विस्फोट के समय खदान के आसपास मौजूद लोगों का कहना है कि भारी मात्रा में गैस रिसने के कारण विस्फोट हुआ.

राहत और बचाव टीम से हुई बातचीत के आधार पर मज़दूर नेता बख्शी ने बताया कि खदान में नीचे कार्बनमोनोऑक्साइड बहुत अधिक मात्रा में है और ऑक्सीजन नहीं के बराबर ही है.

 
 
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