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सोमवार, 28 अगस्त, 2006 को 20:09 GMT तक के समाचार
 
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बुगटी को लेकर भारत-पाक में बयानबाज़ी
 
नवाब अकबर बुगटी
नवाब बुगटी बलूचिस्तान के गवर्नर और मुख्यमंत्री रहने के बाद विद्रोहियों के नेता बन गए थे
सुरक्षाबलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में बलूचिस्तान के क़बायली नेता नवाब अकबर बुगटी की मौत के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बयानबाज़ी का दौर शुरु हो गया है.

एक ओर भारत के विदेश विभाग ने नवाब बुगटी की 'हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है और कहा है कि सैन्य ताकत से राजनीतिक समस्या का समाधान कभी नहीं हो सकता है.

तो इस बयान पर तत्काल आपत्ति करते हुए पाकिस्तान ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा है कि भारत का बयान पाकिस्तान के अंदरुनी मामले में दखलंदाज़ी है.

इससे पहले भी बलूचिस्तान की स्थिति को लेकर भारत के बयान आते रहे हैं और पाकिस्तान को इस पर आपत्ति होती रही है.

उल्लेखनीय है कि बलूचिस्तान को राजनीतिक स्वायत्तता दिलाने के लिए चल रहे विद्रोही आंदोलन के सबसे बड़े नेता नवाब अकबर बुगटी दो दिनों पहले सुरक्षा बलों के साथ एक मुठभेड़ में मारे गए थे.

इसके बाद से बलूचिस्तान में हड़ताल, प्रदर्शन, तोड़फोड़ और अस्थिरता का दौर चल रहा है. पाकिस्तान के कई और हिस्सों में भी इसका विरोध हो रहा है.

भारत का बयान

भारत के विदेश विभाग ने नवाब बुगटी की 'हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा है कि सैन्य ताकत से राजनीतिक समस्या का समाधान कभी नहीं हो सकता.

 सैन्य अभियान में उनके दो पोते भी मारे गए और कई अन्य लोगों की जान गई, उसने इस बात की ज़रूरत को रेखांकित किया है कि बलूचिस्तान के लोगों की शिकायतों और आकांक्षाओं के लिए शांतिपूर्ण संवाद की ज़रूरत है
 
नवतेज सरना, प्रवक्ता

विदेश विभाग के प्रवक्ता नवतेज सरना का कहना था,'' बलूच नेता नवाब अकबर ख़ान बुगटी की दुर्भाग्यपूर्ण हत्या बलूचिस्तान और पाकिस्तान के लोगों के लिए बड़ी क्षति है.''

प्रवक्ता ने कहा,'' सैन्य अभियान में उनके दो पोते भी मारे गए और कई अन्य लोगों की जान गई, उसने इस बात की ज़रूरत को रेखांकित किया है कि बलूचिस्तान के लोगों की शिकायतों और आकांक्षाओं के लिए शांतिपूर्ण संवाद की ज़रूरत है.''

भारत के विदेश विभाग का कहना था,'' नवाब बुगटी ने चार दशकों तक पाकिस्तान की राजनीति में अहम भूमिका निभाई. उनकी मौत से जो जगह खाली हुई है, उसे भरना बड़ा मुश्किल है.''

पाकिस्तान की आपत्ति

भारत का बयान आने के बाद पाकिस्तान ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है.

 भारत का काम नहीं है कि वह पाकिस्तान के अंदरुनी मामलों में दखल दे
 
तसनीम असलम, प्रवक्ता

पाकिस्तान विदेश विभाग की प्रवक्ता तसनीम असलम ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "भारत का काम नहीं है कि वह पाकिस्तान के अंदरुनी मामलों में दखल दे."

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बहुत अरसे से कह रहा है कि भारत को पाकिस्तान के अंदरुनी मामलों में दखल नहीं देना चाहिए.

विदेश विभाग की प्रवक्ता तसनीम असलम ने कहा कि भारत में कोई 18-19 विद्रोह चल रहे हैं और वहाँ लोगों को मारा जा रहा है.

उन्होंने कहा कि आश्चर्य है कि उनकी ओर ध्यान देने के बजाय भारत पाकिस्तान के मामलों में दखल दे रहा है.

वैसे दोनों देशों के बीच बलूचिस्तान को लेकर बयानबाज़ी नया नहीं है और यही एक मुद्दा नहीं है जिस पर दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी हो रही हो.

विदेश मामलों के जानकार पत्रकार राजा मोहन का कहना था, " इस तरह की बयानबाज़ी कोई नई नहीं है और इससे दोनों देशों के बीच संबंधों पर कोई असर भी नहीं पड़ने जा रहा है."

उनका कहना था कि ज़्यादा अहम बात यह है कि बलूचिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता है और इसे दूर किया जाना चाहिए.

बुगटी की मौत

बलूचिस्तान में हिंसा
बुगटी की मौत के विरोध में बलूचिस्तान में हिंसा भड़क उठी है

पाकिस्तानी सेना का कहना था कि एक सर्च ऑपरेशन किया गया और इस दौरान सेना और विद्रोहियों के बीच जमकर गोलीबारी हुई जिसमें एक गुफा पूरी तरह तबाह हो गई.

कई लोगों सहित अकबर बुगटी इस गुफा में थे और वो इस गुफा में दबकर मर गए.

पाकिस्तानी सेना और सरकार दोनों ने इस बात से इनकार किया है कि किसी योजना के तहत नवाब बुगटी को घेरकर मारा गया.

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और खनिज पदार्थ यहाँ बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं. पाकिस्तान में गैस की ज़्यादातर आपूर्ति इसी इलाक़े से होती है.

लेकिन बलूच विद्रोही आरोप लगाते रहे हैं कि पाकिस्तान सरकार ने इस प्रांत को नज़रअंदाज़ किया है.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक नवाब अकबर बुगटी बलूचिस्तान की राजनीति में पाँच दशकों से भी ज़्यादा समय तक छाए रहे. उन्हें 'बलूचिस्तान का शेर' कहा जाता था.

 
 
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