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शनिवार, 19 अगस्त, 2006 को 16:14 GMT तक के समाचार
 
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शिवराज फिर पहुँचे प्रभु के द्वार
 

 
 
शिवराज सिंह चौहान
पहले सूखा ख़त्म करने के लिए पूजा-पाठ हुआ और अब बाढ़ रोकने के लिए दुआ हो रही है
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहले सूखे से निपटने के लिए प्रभु की शरण ली थी. आकाश देवता इतने मेहरबान हुए कि राज्य के 48 में से 24 ज़िले जल समाधि की कगार पर पहुँच गए.

अब बाढ़ से निज़ात पाने के लिए पूजा पाठ हो रहा है.

बीस दिनों की लगातार बारिश में 78 मरे, आठ लापता, हज़ारों पशु बह गए, कच्चे-पक्के मकान नेस्तनाबूत हुए और फ़सल बर्बाद हो गई. यही नहीं, 57 हज़ार लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं.

बाढ़ राजधानी भोपाल में भी घुस आई और लगभग मुख्यमंत्री निवास के द्वार तक आ पहुँची.

‘राम के असीम कृपापात्र’ मुख्यमंत्री ने दोबारा रामायण अखंड पाठ शुरू करवाया है. इस बार अति वर्षा और बाढ़ को रोकने की प्रार्थना के लिए.

 मैंने राज्य में शांति और खुशहाली के लिए दोबारा उनसे (ईश्वर से) मदद माँगी है
 
शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जून माह में सूखे जैसी स्थिति से उबरने के लिए उन्होंने ईश्वर से आर्शीवाद माँगा था तो राज्य की नदियाँ, जलाशय, झील और पोखर लबालब हो गए. मेरी कामना पूरी हुई लेकिन बाढ़ ने बर्बादी और मौत का समाँ बांध दिया है.

अब ‘‘मैंने राज्य में शांति और खुशहाली के लिए दोबारा उनसे मदद माँगी है.’’

मौसम विभाग का कहना है कि वर्षा का दबाव अब राजस्थान की ओर बढ़ रहा है और आनेवाले चंद दिनों में मध्यप्रदेश में वर्षा की कोई संभावना नहीं है.

अचानक आए सैलाब और सूखे से निपटने में लापरवाही का आरोप झेल रहा प्रशासन जहाँ राहत की साँस ले रहा है वहीं, मुख्यमंत्री की अपनी पार्टी में विरोधी गुट के लोग थोड़े घबराए हुए हैं - 'कहीं विदिशा लोकसभा सीट के मामले में भी शिवराज सिंह चौहान पर प्रभु की ऐसी ही कृपा दृष्टि न हो जाए.'

वहाँ से मुख्यमंत्री अपनी पत्नी साधना सिंह को उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार बनाना चाहते हैं जबकि पार्टी के कई बड़े नेता इसके विरोध में हैं.

 
 
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