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रविवार, 16 जुलाई, 2006 को 03:37 GMT तक के समाचार
 
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आगे आ रहे हैं मददगार...
 
सोमनाथ जुल्का
सोमनाथ जुल्का जैसे कई लोग विस्फोटों से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं
दुनिया में समस्या खड़ी करने के लिए जहां बुरे लोग होते हैं वही इन समस्याओं से लड़ने के लिए अच्छे लोग भी आगे आते हैं.

ऐसा ही कुछ हुआ मुंबई बम धमाकों के बाद भी.

मुंबई की ट्रेनों में हुए धमाकों में सोमनाथ जुल्का के परिवार से जुड़ा कोई व्यfक्त प्रभावित नहीं हुआ है लेकिन प्रभावितों में से कई जुल्का को शायद जीवन भर नहीं भूलेंगे.

जुल्का ने बम धमाकों से प्रभावित हुए कई लोगों की अपने स्तर पर पैसों और अन्य प्रकार से मदद की है.

मुंबई के सियोन अस्पताल में जुल्का ने लोगों की मदद करते हुए 11 जुलाई की पूरी रात और अगला दिन बिताया. अस्पताल में कम से कम 60 घायलों को भर्ती किया गया था और 41 शव आए थे.

पेशे से व्यवसायी जुल्का बताते हैं कि वो आम दिनों की तरह एक क्लब में ताश खेल रहे थे जब उन्हें बम धमाकों की ख़बर उनके एक रिश्तेदार ने न्यूज़ीलैंड से फोन पर दी.

जुल्का तुरंत पास के सियोन अस्पताल पहुंचे जहां घायलों की मदद करने के लिए कई और लोग पहुंचे हुए थे.

जुल्का ने बताया " हम घायलों के लिए खाना, फल, पानी आदि लेकर गए. हमें पता था कि लोगों को वहां रात भर रहना पड़ेगा.उन्हें भोजन चाहिए. "

वित्तीय मदद

जुल्का ने बताया कि जब वो अस्पताल में थे तभी किसी ने उन्हें बताया कि घायलों को एक मंहगे इंजेक्शन की ज़रुरत है जिसके बिना वो बहरे हो सकते हैं. जुल्का ने तुरंत इसके लिए डेढ़ लाख रुपए दे दिए.

वो बताते हैं कि कई लोग अपने रिश्तेदारों को खोजते हुए आए जिनमें से कई के पास शवों को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक के पैसे नहीं थे.

वो बताते हैं " ये दुख की घड़ी थी. मैंने उनसे यही कहा. चिंता मत करो, मैं एंबुलेंस के पैसे देता हूं. मैने बस थोड़ी सी सेवा की है लोगों की. कुछ और नहीं."

जुल्का अभी तक इस तरह की मदद में ढाई लाख से अधिक रुपया दे चुके हैं और अभी भी कई लोगों की मदद कर रहे हैं.

वो कहते हैं " मैंने इतना पैसा कमाया है. इसका क्या करुंगा. मेरी एक बेटी थी उसकी शादी पिछले साल कर दी. मेरा व्यवसाय अच्छा चलता है. मैं जीवन भर सुख से रह सकता हूं. थोड़ी मदद कर दूं तो क्या हर्ज़ है."

जुल्का कहते हैं कि वो अस्पताल में भर्ती उस व्यक्ति को को नौकरी भी देंगे जिसकी दोनों टांगे जा चुकी हैं.

 
 
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