BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
छापामार शांति वार्ता में शामिल नहीं होंगे
 
छापामार नेता
छापामार नेता तमिल इलाक़ो में हिंसा में वृद्धि के लिए सरकार को दोष देते हैं
श्रीलंका के तमिल विद्रोहियों ने सरकार के साथ अगले दौर की शांति वार्ता में भाग नहीं लेने की घोषणा की है.

यह बातचीत अगले सप्ताह स्विटज़रलैंड में होनी थी.

तमिल छापामारों ने वार्ता से बाहर रहने के अपने फ़ैसले की वज़ह हाल के दिनों में श्रीलंका के तमिल बहुल इलाक़ों में हिंसक घटनाओं में आई तेज़ी को बताया है.

छापामारों ने कहा है कि स्थितियाँ सामान्य होने तक वो बातचीत की किसी नई तिथि भी तय नहीं करेंगे.

आरोप

तमिल छापामार संगठन एलटीटीई के राजनीतिक प्रकोष्ठ के नेता एसपी तमिलसेल्वन ने कहा कि फ़ैसले की जानकारी नार्वे के शांति दूत को दे दी गई है.

 सरकार ही युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर रही है और हमें लड़ाई की ओर धकेल रही है.
 
तमिलसेल्वन

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हम मौजूदा माहौल और निर्धारित दिनों में जिनीवा वार्ता में भाग लेने की स्थिति में नहीं हैं."

सरकार पर आरोप लगाते हुए तमिलसेल्वन ने कहा, "सरकार ही युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर रही है और हमें लड़ाई की ओर धकेल रही है."

ग़ौरतलब है कि श्रीलंका में हिंसक घटनाओं में आठ अप्रैल के बाद से 60 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

हिंसक घटनाओं में मरने वालों में सैनिक भी शामिल हैं. तमिल छापामारों ने सैनिकों पर हमले में अपना हाथ होने से इनकार किया है.

इस बीच श्रीलंका में युद्धविराम की निगरानी करने वाले पर्यवेक्षक दल के प्रमुख उल्फ़ हेनिरकसन ने स्वीकार किया है कि युद्धविराम समझौते का उल्लंघन हो रहा है.

 
 
इससे जुड़ी ख़बरें
सैकड़ों लोग त्रिंकोमाली छोड़कर भागे
19 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस
श्रीलंका में और धमाके, 16 मरे
12 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>