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रविवार, 16 अप्रैल, 2006 को 19:18 GMT तक के समाचार
 
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भारत में बनेगा दुनिया का सबसे ऊँचा पुल
 

 
 
पुल का एक काल्पनिक चित्र
फ़िनलैंड और जर्मनी की कंपनियाँ निर्माण कार्य में कोंकण रेलवे को सहयोग दे रही हैं
जम्मू कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊँचा पुल बनने जा रहा है.

चिनाब नदी पर बनने वाले इस रेल पुल की ज़मीन से ऊँचाई होगी 359 मीटर. यानी एफ़िल टॉवर से भी ऊँचा जो 324 मीटर ऊँचा है.

और 1.3 किलोमीटर लंबे इस पुल की एक और विशेषता होगी कि इसमें सबसे लंबी पटरी भी लगाई जाएगी.

दुनिया का अब तक का सबसे ऊँचा पुल दक्षिणी फ़्रांस के टार्न नदी के ऊपर बना मिलो पुल है जिसके सबसे बड़े खंभे की ऊँचाई 340 मीटर है. वैसे 2004 में बने इस पुल में सड़क यातायात 300 मीटर की ऊँचाई पर ही चलता है.

लेकिन अधिकारियों का कहना है कि भारत में बनने जा रहे पुल पर यातायात की ऊँचाई ही 359 मीटर होगी.

तीस महीने में

जम्मू-ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामूला राष्ट्रीय रेलमार्ग परियोजना के तहत बनने जा रहा ये पुल चिनाब नदी पर बनेगा.

भारतीय रेल ने इस पुल के निर्माण का कार्य कोंकण रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को दिया है.

इससे पहले कोंकण रेल को देश के अब तक के सबसे ऊँचे पुल का निर्माण करने का श्रेय दिया जाता रहा है. जो पानवल नदी पर बना है और इसके एक खंभे की ऊँचाई 64 मीटर है.

पुल को 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इस लिहाज से पुल 2009 की शुरुआत में बनकर तैयार हो जाएगा.

तकनीक

कोंकण रेलवे की ओर से इस परियोजना के निदेशक एमएस राणा के अनुसार चिनाब पर बनने जा रहा पुल खंबों पर न होकर मेहराब पर होगा यानी इसमें ट्रस्ड स्टील आर्च तकनीक का ऊपयोग किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि इस पुल का डिज़ाइन फ़िनलैंड की 'कोर्टेस' और जर्मनी की 'लियोनार्ड एंड्रा एंड पार्टनर' कंपनियों ने मिलकर तैयार किया है.

इस पुल के निर्माण में 512 करोड़ रुपयों की लागत का अनुमान है.

 इस पुल की एक बड़ी विशेषता ये भी होगी कि इसमें अब तक की सबसे लंबी पटरी बिछाई जाएगी और वेल्डिंग करके एक ही पटरी की लंबाई पुल के बराबर रखी जाएगी
 
एमएस राणा, परियोजना निदेशक

इस्पात और सीमेंट से बनने वाले इस पुल में 26 हज़ार टन इस्पात लगेगा. एमएस राणा के अनुसार सीमेंट का ऊपयोग तो सिर्फ़ आधार (बेस) बनाने के लिए किया जाएगा और शेष पुल इस्पात का ही होगा.

दक्षिणी फ़्रांस में जो पुल बना था उसमें 36 हज़ार टन इस्पात लगा था और उसकी लागत 52 करोड़ 40 लाख डॉलर यानी बाईस सौ करोड़ रुपए से भी अधिक का खर्च आया था.

राणा के अनुसार 1.3 किलोमीटर लंबे इस पुल में आर्च यानी मेहराब की लंबाई 485 मीटर होगी.

वे बताते हैं, "इस पुल की एक बड़ी विशेषता ये भी होगी कि इसमें अब तक की सबसे लंबी पटरी बिछाई जाएगी और वेल्डिंग करके एक ही पटरी की लंबाई पुल के बराबर रखी जाएगी."

चुनौतियाँ

वैसे तो कोंकण रेलवे को सुरंगें और पुल बनाने में महारत हासिल हो गई है लेकिन अधिकारी मानते हैं कि इस बार चुनौती बड़ी है.

चिनाब पुल का शिलान्यास
मार्च के अंत में शिलान्यास के साथ ही निर्माण कार्य शुरु हो चुका है

कटरा से लाओल के बीच बन रहे इस पुल के लिए सबसे बड़ी चुनौती तो निर्माण स्थल तक पहुँचना ही था क्योंकि वहाँ तक कोई सड़क भी नहीं थी.

लेकिन जैसा कि कोंकण रेलवे के सूचना निदेशक प्रकाश गोखले बताते हैं, "निर्माण स्थल तक पहुचने के लिए सड़क बनाने का काम पूरा हो गया है और इस तरह पहली चुनौती पूरी हो गई है."

वे बताते हैं कि शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं को कच्चे पहाड़ों की श्रेणी में रखा जाता है इसलिए वहाँ निर्माण का कार्य निश्चित तौर पर कठिन होगा.

अधिकारी मानते हैं कि भौगोलिक और तकनीकी चुनौतियों के अलावा सुरक्षा भी एक अतिरिक्त चुनौती साबित होने वाली है.

 
 
सबसे ऊँचा सड़क पुल
दुनिया के सबसे ऊँचा फ़्रांस में बना है और इसे जनता के लिए खोल दिया गया है.
 
 
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