BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
शनिवार, 08 अप्रैल, 2006 को 14:28 GMT तक के समाचार
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
'भूकंप पीड़ितों को अब भी मदद चाहिए'
 
भूकंप
पाकिस्तान सरकार ने राहत के बजाए पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है
दक्षिण एशिया में आए भूकंप को छह महीने बीत चुके हैं और स्वयंसेवी संस्थाओं का कहना है कि लोगों को अब भी मदद की ज़रूरत है.

दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार ने अब ध्यान राहत के बजाए पुनर्निर्माण पर केंद्रित कर दिया है.

इस भूकंप में 70 हज़ार से अधिक लोगों ने अपनी जानें गवां दी थीं और 20 लाख से अधिक लोग बेघरबार हो गए थे.

ब्रिटिश स्वयंसेवी संस्था ऑक्सफ़ैम का भूकंप पीड़ित हज़ारों लोगों को अब भी सहायता की ज़रूरत है.

उसका कहना है कि ठंड के कारण जल्दबाज़ी में बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापित कर दिया था और उनकी समस्याएँ अब भी बनी हुईं हैं.

पिछली साल आठ अक्टूबर को आए इस भूकंप ने पाकिस्तान में भारी तबाही मचाई थी.

प्राथमिकता पुनर्निर्माण

लेकिन अब पाकिस्तान सरकार ने राहत के बजाए पुनर्निर्माण पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है.

बीबीसी संवाददाता निक ब्रायंट का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह में लगभग 40 हज़ार लोग राहत शिविरों से चले गए क्योंकि उन्हें पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक मदद दी गई थी. साथ ही शिविरों को बंद भी किया जा रहा है.

कश्मीर में भूकंप पीड़ित

इन राहत शिविरों के आसपास ही नए मकान तैयार हो गए हैं और लोगों को इन मकानों की चाभियाँ सौंपी जा रही हैं.

पाकिस्तान सरकार विनाशकारी भूकंप में तबाह हो गए बालाकोट शहर को नई जगह बसाने जा रही है.

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत का यह शहर एक बड़े कब्रिस्तान में तब्दील हो गया था.

बालाकोट में हज़ारों लोग मारे गए थे और बड़ी संख्या में लोग बेघरबार हो गए थे.

लेकिन अब भूकंप प्रभावित इलाक़ों में दृश्य बदला हुआ है. हेलिकॉप्टर खाने की सामग्री और कपड़े नहीं ले जा रहे हैं, उनमें पुनर्निर्माण की सामग्री और फसल के लिए बीज भरे होते हैं.

लेकिन चुनौती अब भी कम नहीं हुई है क्योंकि सर्दियाँ कुछ महीने ही दूर हैं और बड़ी संख्या में मकान तैयार किए जाने बाकी हैं.

 
 
बालाकोट बना कब्रिस्तान
भूकंप की सबसे बुरी मार झेलने वाले बालाकोट क़स्बे से आँखों देखा हाल.
 
 
जाको राखे साईयाँ...
पाकिस्तान में कई दिन मलबे में दबे रहने के बाद दो बच्चे जीवित पाए गए हैं.
 
 
भूकंप'किस-किस को रोएँ'
लंदन में रहने वाले जमील अहमद ने अपने परिवार के सौ सदस्यों को खोया है.
 
 
इससे जुड़ी ख़बरें
'हम अभी भी डरते हैं..भागते हैं...'
14 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
मृतकों की संख्या 73 हज़ार से ज़्यादा
02 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
कई दिन बाद, दो बच्चे जीवित पाए गए
14 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस
एक बड़ा कब्रिस्तान बन गया बालाकोट
11 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>