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रविवार, 22 जनवरी, 2006 को 11:22 GMT तक के समाचार
 
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कांग्रेस ने दी वामपंथियों को चेतावनी
 
कांग्रेस अधिवेशन
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वे गठबंधन के बावजूद वामपंथी दलों के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे
केंद्र में कांग्रेस गठबंधन सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों का नाम लिए बिना कांग्रेस ने कहा है कि उन्हें रचनात्मक आलोचना की सीमा को पार नहीं करना चाहिए.

राष्ट्रीय अधिवेशन में पेश किए राजनीतिक प्रस्ताव में कांग्रेस ने घोषणा की है कि कुछ महीनों बाद होने वाले चुनावों में पश्चिम बंगाल और केरल में वामपंथी दलों से आक्रामक ढंग से मुक़ाबला करेगी.

जबकि अपने आर्थिक प्रस्तावों में कांग्रेस ने नौरत्नों को मज़बूत बनाने की बात कहते हुए टेलीकॉम और एयरलाइन क्षेत्र में विकास की दर बढ़ाने की बात कही है.

राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि कांग्रेस यूपीए गठबंधन के प्रति प्रतिबद्ध है और गठबंधन पूरे पाँच साल शासन करेगा.

 कांग्रेस पार्टी इस बात को समझती है कि गठबंधन को चलाने की ज़िम्मेदारी कांग्रेस पर है लेकिन यह उसकी अकेले की ज़िम्मेदारी नहीं है. यदि अपनी पार्टी लाइन को आगे बढ़ाने के लिए कोई दल रचनात्मक आलोचना से आगे बढ़ता है तो इससे गठबंधन कमज़ोर होता है
 
अर्जुन सिंह, राजनीतिक प्रस्ताव पेश करते हुए

लेकिन वामपंथी दलों का नाम लिए बिना राजनीतिक प्रस्ताव पेश करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह ने कहा, "कांग्रेस पार्टी इस बात को समझती है कि गठबंधन को चलाने की ज़िम्मेदारी कांग्रेस पर है लेकिन यह उसकी अकेले की ज़िम्मेदारी नहीं है. यदि अपनी पार्टी लाइन को आगे बढ़ाने के लिए कोई दल रचनात्मक आलोचना से आगे बढ़ता है तो इससे गठबंधन कमज़ोर होता है."

पार्टी ने अपने प्रस्ताव के ज़रिए साफ़ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और केरल में जहाँ कांग्रेस और वामपंथी दल मुख्य प्रतिद्वंद्वी दल हैं वहाँ आक्रामक ढंग से चुनाव लड़ा जाएगा.

हालांकि पार्टी ने पश्चिम बंगाल में ममता बैनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी गठबंधन से तब तक के लिए इंकार किया है जब तक वे एनडीए की हिस्सा हैं. उल्लेखनीय है कि वहाँ वामपंथी दलों के ख़िलाफ़ शेष राजनीतिक दलों के एक महाजोत की चर्चा चल रही है.

इसके अलावा कांग्रेस ने पार्टी उत्तर प्रदेश और बिहार के कार्यकर्तांओं से कहा है कि वे अपना खोया हुआ आधार पाने के लिए मेहनत करें.

प्रस्ताव में कहा गया है, "हालांकि हम बहुत से दलों का गठबंधन चला रहे हैं लेकिन यह देखना कार्यकर्ताओं का काम है कि बड़े राज्यों में कांग्रेस को उसका जनाधार कैसे वापस मिल सकता है."

राजनीतिक प्रस्ताव में कर्नाटक के संकट का कोई सीधा ज़िक्र नहीं किया गया है.

आर्थिक प्रस्ताव

कांग्रेस ने अपने 82वें अधिवेशन में अपने आर्थिक प्रस्ताव में वामपंथी दलों की इस नीति का समर्थन किया है कि नवरत्नों का किसी भी क़ीमत पर विनिवेश नहीं किया जाना चाहिए.

लेकिन दूसरे क्षेत्रों में व्यावहारिक क़दम उठाते हुए आर्थिक विकास को आगे ले जाने की बात की गई है.

दसवीं योजना में आठ प्रतिशत विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखते हुए कांग्रेस ने कहा है कि ग्यारहवीं योजना में विकास की दर 11 प्रतिशत होनी चाहिए.

पार्टी ने टेलीकॉंम, आटोमोबाइल और एयरलाइन्स आदि क्षेत्रों में आर्थिक सुधार की गति बढ़ानी चाहिए और इसके बारे में फ़ैसला मामलों के आधार पर किया जाना चाहिए.

 
 
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