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सोमवार, 02 जनवरी, 2006 को 16:05 GMT तक के समाचार
 
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पाकिस्तान ने भारतीय बयान पर आपत्ति जताई
 
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने भारत के बर्ताव को शांति वार्ता के लिए नुक़सानदेह बताया है
भारत और पाकिस्तान के बीच पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में जारी गड़बड़ी को लेकर हो रही बयानबाज़ी से दोनों के बीच तनाव की स्थिति बनती जा रही है.

पाकिस्तान ने सोमवार को भारत पर आरोप लगाया कि वह उसके अंदरूनी मामले में दखलंदाज़ी कर रहा है और उसपर धौंस जमा रहा है.

पाकिस्तान सरकार ने पिछले दिनों बलूचिस्तान के बारे में भारत के चिंता प्रकट करने पर सख़्त आपत्ति जताई है.

बलूचिस्तान में पिछले कुछ सप्ताह से स्थानीय बलूच चरमपंथियों और सुरक्षाबलों के बीच संघर्ष हो रहा है.

भारत ने बलूचिस्तान के बारे में की गई टिप्पणी पर जो स्पष्टीकरण दिया है उससे पाकिस्तान सरकार और नाराज़ हो गई है.

बयानबाज़ी

 भारत जिस तरह का बर्ताव कर रहा है वह उसकी धौंस जमानेवाली प्रवृत्ति को दिखाता है, एक ऐसा देश जिसे हर तरफ़ भड़काऊ चीज़ें ही दिखती हैं
 
तस्नीम असलम, प्रवक्ता, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भारतीय विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने के अंत में बलूचिस्तान में सैनिकों की भारी तैनाती पर चिंता प्रकट की थी और कहा था कि पाकिस्तान को संयम से काम लेना चाहिए.

पाकिस्तान ने इस बयान पर सख़्त एतराज़ प्रकट किया था.

पीटीआई के अनुसार रविवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ये कहा कि अगर भारत ने बलूचिस्तान के बारे में कुछ कहा है तो इसमें कुछ भी 'असामान्य' बात नहीं है और पाकिस्तान भी अक्सर इस तरह के भड़काऊ बयान देता रहा है.

अधिकारी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान तब दिया जब उनसे पत्रकारों ने इस बारे में सवाल पूछा.

लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तस्नीम असलम ने भारतीय अधिकारी के इस बयान को चौंकानेवाला बताया है.

तस्नीम असलम ने कहा,"भारत जिस तरह का बर्ताव कर रहा है वह उसकी धौंस जमानेवाली प्रवृत्ति को दिखाता है, एक ऐसा देश जिसे हर तरफ़ भड़काऊ चीज़ें ही दिखती हैं".

चिंता

तस्नीम असलम ने भारत की ओर से ऐसी बयानबाज़ी से ऐसे समय में दोनों देशों के बीच माहौल पर बुरा असर पड़ सकता है जब दोनों के बीच संबंधों को बेहतर करने के प्रयास चल रहे हैं.

प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ये मानता है कि दूसरे देशों के मामलों में दखल देना अंतरराष्ट्रीय मान्यताओं का उल्लंघन है.

लेकिन प्रवक्ता ने कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति पर लगातार चिंता प्रकट करने की पाकिस्तान की नीति को परोक्ष तौर पर न्यायसंगत ठहराया.

उन्होंने कहा कि उनके मुताबिक़ ना तो भारतीय कश्मीर जैसी कोई चीज़ है ना पाकिस्तानी कश्मीर जैसी और कश्मीर का सारा का सारा क्षेत्र ही विवादित है.

 
 
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