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मंगलवार, 27 दिसंबर, 2005 को 07:19 GMT तक के समाचार
 
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भाजपा अधिवेशन में अध्यक्ष मुद्दा
 

 
 
आडवाणी और वाजपेयी
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हालाँकि दूसरे दिन विदेश नीति पर चर्चा चल रही है लेकिन बैठक के बाहर पार्टी में अगले अध्यक्ष को लेकर ही चर्चा चल रही है.

रजत जयंती मना रही भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक सोमवार को शुरु हुई और मंगलवार को इसका दूसरा और अंतिम दिन है.

पाँच दिन के समारोह में दो दिनों के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अलावा तीन दिन राष्ट्रीय परिषद की बैठक होनी है जिसमें देश भर से 4000 नेता और कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं.

प्रस्ताव

कार्यकारिणी विदेश नीति पर प्रस्ताव पारित करने के अलावा राजनीतिक और आर्थिक प्रस्तावों को अंतिम रुप देगी.

जैसा कि पार्टी ने निर्णय किया है इन दोनों प्रस्तावों पर राष्ट्रीय परिषद में चर्चा होगी और परिषद में ही उसे पारित किया जाएगा.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिस तरह से पार्टी पर सिद्धांतों को लेकर दबाव बनाए हुए है उसके चलते राजनीतिक प्रस्तावों को बेहद अहम माना जा रहा है.

संघ भाजपा से हिंदुत्व की ओर लौटने को कह रहा है लेकिन गठबंधन की राजनीति करते हुए सत्ता तक पहुँचने का अनुभव कर चुकी भाजपा इसे आसानी से स्वीकार करने की स्थिति में भी नहीं है.

अध्यक्ष की चर्चा

भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने तीन महीने पहले चेन्नई में हुई कार्यकारिणी की बैठक में घोषणा कर चुके हैं कि वे दिसंबर में अध्यक्ष पद छोड़ देंगे.

उन्होंने कार्यकारिणी की बैठक की शुरुआत करते हुए भी दोहराया है कि यह उनकी अध्यक्षता में अंतिम बैठक है. हालाँकि उनका 31 दिसंबर तक अध्यक्ष बने रहना तय है और संभावना है कि उसी दिन नए अध्यक्ष की घोषणा होगी.

इस बीच पार्टी की ओर से यह एक ज़ाहिर सी गोपनीय जानकारी दी जा रही है कि राजनाथ सिंह का अगला अध्यक्ष बनना तय है लेकिन अधिकारिक रुप से इसकी घोषणा करने को कोई तैयार नहीं है.

ख़बरें हैं कि संघ ने राजनाथ के नाम पर मोहर भी लगा दी है.

एक ओर तो मुरली मनोहर जोशी ने राजनाथ सिंह को बधाई दे दी है लेकिन दूसरी ओर यह चर्चा भी है कि वे इस निर्णय से ख़ुश नहीं है. यह अस्वाभाविक भी नहीं क्योंकि वे ख़ुद भी अध्यक्ष बनने की दौड़ में थे.

राजनाथ सिंह को यह पद दिए जाने की संभावना से उत्तर प्रदेश के एक और दिग्गज नेता कल्याण सिंह भी नाराज़ हैं लेकिन उन्होंने भी अपनी नाराज़गी सार्वजनिक नहीं की है.

राजनाथ के क़रीबी और कार्यकारिणी के एक सदस्य ने सोमवार की बैठक के बाद कहा कि जब तक अधिकारिक घोषणा नहीं हो जाती है नए अध्यक्ष का नाम अनिश्चित ही माना जाना चाहिए.

ज़ाहिर है कि पार्टी के भीतर अभी खींचतान का अंतिम दौर चल रहा है.

 
 
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