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रविवार, 23 अक्तूबर, 2005 को 09:22 GMT तक के समाचार
 
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भारत आयात कर रहा है प्याज़
 

 
 
प्याज़
इन दिनों प्याज़ की कीमतें पिछले आठ वर्षों में सबसे ज़्यादा हो गई हैं.
कम उपलब्धता के चलते प्याज़ की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए भारत सरकार ने अब प्याज़ आयात करने का फ़ैसला किया है और पाकिस्तान से करीब 30 टन प्याज़ की आमद भी हो चुकी है.

यह आपूर्ति शनिवार को एक ट्रेन से पंजाब के शहर, अमृतसर में पहुँचा दी गई है.

ख़बरें हैं कि अगले हफ़्ते में करीब चार मीट्रिक टन प्याज़ पाकिस्तान से आयात कर लिया जाएगा.

हालांकि इससे पहले अपने एक वक्तव्य में कृषि एवं खाद्य आपूर्तिमंत्री ने प्याज़ आयात करने की आवश्यकता से इंकार किया था पर शनिवार को कृषि मंत्रालय में प्याज़ की उपलब्धता पर एक समीक्षा बैठक के बाद अब इसे आयात करने का फ़ैसला लिया गया है.

दिल्ली में तो इसकी बिक्री के लिए विशेष बिक्रीकेंद्र भी खोले जाएंगे जहाँ 16-20 रूपए प्रति किलो की दर से प्याज़ उपलब्ध होगा.

दिल्ली के खाद्य एवं आपूर्तिमंत्री राजकुमार चौहान ने बताया कि दिल्ली में क़रीब 25-30 बिक्री केंद्र खोले जाएंगे जहां 16-20 रूपए प्रति किलो की दर से प्याज़ उपलब्ध होगा.

पिछले कुछ दिनों में प्याज़ के दाम बढ़कर दोगुने से भी ज़्यादा हो गए हैं और बढ़े दामों ने लोगों की आंखों में आंसू भर दिए हैं.

जो प्याज़ कुछ दिन पहले तक 12 रूपए प्रति किलो के भाव बिक रहा था, उसकी कीमत अब 24-30 रूपए तक पहुँच गई है.

प्याज़ की कीमतों में यह इज़ाफ़ा उस वक्त हुआ है, जबकि देश भर में त्योहारों का समय चल रहा है.

हालत यह है कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में खानपान के एक अहम हिस्से के तौर पर इस्तेमाल होने वाले प्याज़ के बढ़े दामों से लोग परेशान नज़र आ रहे हैं.

घर हो या ढाबा या फिर खाना बेचने वाली कोई जगह, खानेवालों से लेकर खिलाने वालों तक इसका असर दिख रहा है.

क्यों बढ़े दाम

प्याज़ की कीमत बढ़ने की वजह देश के छह प्रमुख प्याज़ उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी वर्षा के चलते इस बार प्याज़ की फसल की तबाही बताया जा रहा है.

दिल्ली की एक सब्ज़ी मंडी के अध्यक्ष, राकेश कुमार सूरी इसके लिए सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार को प्याज़ की कीमतें नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान या अन्य देशों से प्याज़ आयात करना चाहिए.

राकेश बताते हैं कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो अगले एक महीन में प्याज़ की कीमतें 40 रूपए प्रति किलो तक जा सकती है.

प्याज़ का राज़

पर प्याज़ की कीमत का बढ़ना एक बड़ी ख़बर इसलिए भी है क्योंकि इसको लेकर राजनीति भी ख़ूब होती रही है.

प्याज़
प्याज़ की कीमतों पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो चुकी है.

ग़ौरतलब है कि कुछ वर्षों पहले प्याज़ के बढ़े दामों ने दिल्ली में भाजपा की सरकार को विपक्ष में बैठा दिया था.

यही वजह है कि राजनीति के गलियारों में इसको लेकर बयानबाज़ी शुरु हो चुकी है.

भाजपा ने इस बार इसकी ज़िम्मेदारी कांग्रेस पर थोपी है.

भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इसकी जानकारी पिछले चार महीने से थी कि प्याज़ की कमी होगी. ऐसे में सरकार को समय रहते व्यापारियों पर नियंत्रण रखना चाहिए था और कमी होने से पहले ही आयात कर लेना चाहिए था.

 
 
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