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शनिवार, 15 अक्तूबर, 2005 को 14:48 GMT तक के समाचार
 
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मृतक संख्या और बढ़ सकती है: मुशर्रफ़
 
परवेज़ मुशर्रफ़
मुशर्रफ़ ने कहा कि वे राहत कार्य से संतुष्ट हैं
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि पिछले सप्ताह आए भूकंप में मरने वालों की संख्या 38 हज़ार से भी ज़्यादा हो सकती है.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि अब राहत कार्य उन इलाक़ों में भी पहुँचना शुरू हो गया है जहाँ पहले राहतकर्मी नहीं पहुँच पाए थे.

राजधानी इस्लामाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए मुशर्रफ़ ने राहत कार्यों को लेकर हो रही आलोचनाओं को ख़ारिज कर दिया.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि राहत कार्य पूरी तरह संगठित और समन्वित थे और वे इससे पूरी तरह संतुष्ट हैं.

उन्होंने कहा कि भूकंप कश्मीर और उत्तरी पाकिस्तान के व्यापक पहाड़ी इलाक़े में आया. इन इलाक़ों में राहत और बचाव कार्य के लिए बेहतरीन कोशिशें की गईं लेकिन इसके बावजूद कई इलाक़ों का संपर्क अभी भी कटा हुआ है.

उन्होंने कहा कि भूकंप के आठ दिनों के बाद भी मरने वालों की निश्चित संख्या बता पाना मुश्किल है.

आशंका

मुशर्रफ़ ने कहा, "मुझे लगता है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है और यह संख्या 38 हज़ार से भी ज़्यादा हो सकती है. अभी झेलम और नीलम घाटी में हम नहीं पहुँच पाएँ हैं और वहाँ पहुँचने पर यह संख्या बढ़ने की आशंका है."

 मुझे लगता है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है और यह संख्या 38 हज़ार से भी ज़्यादा हो सकती है. अभी झेलम और नीलम घाटी में हम नहीं पहुँच पाएँ हैं और वहाँ पहुँचने पर यह संख्या बढ़ने की आशंका है
 
परवेज़ मुशर्रफ़

हालाँकि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि उन्होंने सैनिक और नागरिक अधिकारियों को इसका निर्देश दिया है कि उन्हें मरने वालों की संख्या के बारे में निश्चित जानकारी दी जाए और ये भी जानकारी दी जाए कि कितने लोग घायल हैं और कितने लापता हैं.

राजधानी इस्लामबाद के निकट मुख्य हवाई अड्डे पर राहत कार्यों का निरीक्षण करने के बाद राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि वे इस बात को लेकर निश्चिंत हैं कि राहत सामग्री उन लोगों तक पहुँच रही है जो भूकंप से प्रभावित हुए हैं.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि राहत और बचाव कार्य के बाद तीसरे चरण में ध्यान होगा पुनर्निर्माण और लोगों को बसाने के काम पर. उन्होंने बताया कि वे इसके लिए एक अलग संस्था गठित की गई है.

प्रेसिडेंट रिहैबिलिटेशन इनिसिएटिव (पीआरआई) नामक इस संस्था की सिफ़ारिश पर यह फ़ैसला किया जाएगा कि भूकंप में तबाह हुए शहर फिर से बनाए जाएँ या नई बस्तियाँ बसाई जाएँ.

उन्होंने कहा कि पुनर्वास कार्य काफ़ी बड़ा काम है और इसके लिए बड़ी वित्तीय सहायता की ज़रूरत है.

 
 
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