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बुधवार, 01 जून, 2005 को 07:14 GMT तक के समाचार
 
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कंधार में मस्जिद में बम फटा, 20 की मौत
 
कंधार में विस्फोट
अफ़ग़ानिस्तान में पिछले कुछ अर्से में हिंसा की घटनाओं में तेज़ी आई है
अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में स्थित शहर कंधार में एक मस्जिद में बम विस्फोट हुआ है जिसमें कम-से-कम 20 लोग मारे गए हैं और 70 से ज़्यादा घायल हो गए.

राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने इस आत्मघाती हमले की निंदा करते हुए इसे 'हारे हुए चरमपंथियों' का काम बताया है.

मारे गए लोगों में राजधानी काबुल के पुलिस प्रमुख भी शामिल हैं.

तालेबान शासन की समाप्ति के बाद से यह सबसे ख़ूनी हमला था जो ऐसी जगह और वक़्त पर किया गया जब लोग मुल्ला अब्दुल्ला फ़ैयाज़ को श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा हुए थे.

मुल्ला अब्दुल्ला फ़ैयाज़ की हाल ही में हत्या कर दी गई थी.

पुलिस का कहना है कि विस्फोट एक आत्मघाती हमलावर ने किया.

कंधार के गवर्नर ने कहा है कि उन्होंने सोचा था कि यह हमला अलक़ायदा का काम है.

लेकिन इस विस्फोट की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ानिस्तान में तीन साल पहले सत्ता से बाहर होनेवाले तालेबान ने स्वीकार की है.

तालेबान का प्रवक्ता होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने बीबीसी के काबुल कार्यालय में टेलीफ़ोन किया और दावा किया गया कि ये हमला उनके संगठन ने किया है.

लेकिन तालेबान के एक अन्य प्रवक्ता लतीफ़ुल्ला हकीमी ने बाद में इसका खंडन किया.

विस्फोट में मारे गए लोगों में काबुल के पुलिस प्रमुख मोहम्मद अकरम भी शामिल हैं.

विस्फोट

पुलिस का कहना है कि विस्फोट के समय मस्जिद में तालेबान विरोधी विद्वान मुल्ला अब्दुल्ला फ़याज़ को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे.

 मैंने बड़े धमाके की आवाज़ सुनी. धमाका इतना तेज़ था कि मेरे दुकान की खिड़कियों के शीशे टूट गए
 
प्रत्यक्षदर्शी

मस्जिद के पास के एक दूकानदार मोहम्मद ने विस्फोट के बारे में बताया, "मैंने बड़े धमाके की आवाज़ सुनी. धमाका इतना तेज़ था कि मेरे दुकान की खिड़कियों के शीशे टूट गए."

मुल्ला अब्दुल्ला फ़याज़ की पिछले रविवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व तालेबान शासकों के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी और वे राष्ट्रपति हामिद करज़ई के नज़दीकी समझे जाते थे.

क़ाबुल स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में पिछले कुछ अर्से से हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं.

संवाददाता के अनुसार इससे ये चिंता पैदा हो गई है कि चरमपंथी वहाँ सितंबर में संसदीय चुनाव करवाने के प्रयासों में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं.

 
 
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