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गुरुवार, 26 मई, 2005 को 05:00 GMT तक के समाचार
 
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सियाचिन विवाद पर दो दिन की बातचीत
 
भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल
सियाचिन को लेकर दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है
भारत और पाकिस्तान के बीच सियाचिन, सर क्रीक और अन्य सैन्य मुद्दों पर 26 मई को रावलपिंडी में बातचीत चल रही है जो दो दिन चलेगी.

भारत की ओर से रक्षा सचिव अजय विक्रम सिंह और पाकिस्तान की ओर से लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) तारिक़ वसीम ग़ाज़ी अपने अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व कर रहे हैं.

इस बीच भारत के सेनाध्यक्ष जोगिन्दर जसवंत सिंह ने कहा है कि सियाचिन युद्ध क्षेत्र में सेना तैनाती के बारे में कोई भी फ़ैसला राष्टीय हितों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा.

राजधानी दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में सेनाध्यक्ष ने कहा कि सेना सियाचिन की सामरिक स्थिति के बारे में सरकार को अपनी राय दे दी है और अब सचिव स्तर की बातचीत के नतीजे की प्रतीक्षा की जा रही है.

सेनाध्यक्ष जोगिन्दर जसवंत सिंह ने कहा, "हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि सियाचिन में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा स्थिति को किसी ना किसी तरीक़े से अधिकृत किया जाए ताकि भविष्य में राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके."

उन्होंने कहा कि एक बार यह सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने के बाद इस तरह की सेना तैनाती की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी.

विवाद

भारत और पाकिस्तान के बीच सियाचिन को लेकर अब तक आठ दौर की बातचीत हो चुकी है.

सियाचिन दुनिया का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र है जो समुद्र तल से क़रीब 5500 मीटर की ऊँचाई पर है.

सियाचिन

कश्मीर क्षेत्र में स्थित इस ग्लैशियर पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद है.

पाकिस्तानी का कहना है कि 1989 में यह सहमति हुई थी कि भारत अपनी पुरानी स्थिति पर वापिस लौट जाए लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ है.

पाकिस्तान का कहना है कि सियाचिन ग्लेशियर में जहाँ पाकिस्तानी सेना हुआ करती थी वहाँ भारतीय सेना ने 1984 में क़ब्ज़ा कर लिया था. उस समय पाकिस्तान में जनरल ज़ियाउल हक़ का शासन था.

पाकिस्तान तभी से कहता रहा है कि भारतीय सेना ने 1972 के शिमला समझौते और उससे पहले 1949 में हुए कराची समझौते का उल्लंघन किया है.

पाकिस्तान की माँग रही है कि भारतीय सेना 1972 की स्थिति पर वापस जाए और वे इलाक़े ख़ाली करे जिन पर उसने क़ब्ज़ा कर रखा है.

ग़ौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध बेहतर बनाने के लिए प्रयासों का दौर पिछले साल से शुरू हुआ है और विभिन्न मुद्दों पर बातचीत चल रही है.

दोनों देशों के हिस्से वाले कश्मीरी क्षेत्रों के बीच भी सीधी बस सेवा शुरू हो चुकी है.

 
 
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