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गुरुवार, 12 मई, 2005 को 16:44 GMT तक के समाचार
 
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रॉय संबंधी याचिका ख़ारिज
 

 
 
सुब्रत रॉय ( सौजन्य सहारा इंडिया वेबसाइट)
सुब्रत रॉय पिछले कई सप्ताह से नहीं देखे गए हैं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत रॉय को सामने लाने संबंधी याचिका को ख़ारिज कर दिया है.

याचिका दायर करने वाले बीएन शुक्ला ने कहा है कि वे अदालत के इस फ़ैसले के विरूद्ध अपील करेंगे.

याचिकाकर्ता का कहना था कि लाखों लोगों की गाढ़ी कमाई सहारा इंडिया में लगी है और इस बात की आशंका है कि कंपनी के मैनेजर लोगों का पैसा लेकर ग़ायब न हो जाएँ.

सहारा कंपनी के प्रबंधन ने इस याचिका का विरोध किया, सहारा की ओर से अदालत में पेश हुए वकील अरूण सिन्हा ने इन आरोपों को ग़लत बताया कि सुब्रत रॉय को उनकी पत्नी और कुछ अधिकारियों ने ग़ैर कानूनी तरीक़े से बंधक बना रखा है.

सहारा इंडिया के वकील ने इन आरोपों का भी खंडन किया कि लोगों का पैसा किसी विदेशी बैंक में ट्रांसफर करने की योजना बनाई जा रही है.

अदालत में सहारा इंडिया के वकील ने 'सुब्रत राय की लिखी हुई' एक चिट्ठी पेश की जिसमें याचिकाकर्ता की सभी आशंकाओं को बेबुनियाद बताया गया है.

सहारा के वकील ने कहा कि इस मामले में अदालत से शिकायत करने का बीएन शुक्ला को कोई जायज़ हक़ नहीं है.

उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से अदालत में पेश हुए राज्य के महाधिवक्ता वीरेंद्र भाटिया ने भी बीएन शुक्ला की याचिका का कड़ा विरोध किया, याचिकाकर्ता ने माँग की थी कि 'पुलिस सुब्रत रॉय को बंधकों के चंगुल से छुड़ाकर' अदालत में पेश करे.

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एक सदस्यीय बेंच ने याचिका को ख़ारिज कर दिया.

अपील

इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे क्योंकि यह मामला बहुत बड़े पैमाने पर जनहित का है.

जैन का कहना है कि सिर्फ़ एक चिट्ठी, जिसे सुब्रत रॉय की लिखी हुई चिट्ठी कहा जा रहा है, पर्याप्त नहीं है. निवेशकों को यह जानने का हक़ है कि कंपनी के प्रमुख कहाँ हैं और उनका पैसा सुरक्षित है या नहीं.

याचिका दायर करने वाले बीएन शुक्ला का कहना है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वे सुप्रीम कोर्ट तक जाएँगे.

सुब्रत रॉय राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफ़ी सक्रिय रहे हैं, पिछले कई सप्ताह से उन्हें किसी ने नहीं देखा है इसलिए तरह-तरह की अफ़वाहों का बाज़ार गर्म है.

 
 
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