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शुक्रवार, 18 मार्च, 2005 को 16:12 GMT तक के समाचार
 
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युवाओं को ध्यान में रखकर नया कार्यक्रम
 

 
 
पत्रकार वार्ता
राँची में बीबीसी हिंदी की पत्रकार वार्ता
श्रोताओं से रूबरू होने निकला बीबीसी का कारवाँ पिछले दिनों झारखंड की राजधानी राँची पहुँचा.

बीबीसी हिंदी सेवा प्रमुख अचला शर्मा और रेडियो संपादक शिवकांत ने इस दौरान एक नए कार्यक्रम के प्रसारण के शुरू किए जाने की जानकारी दी.

उन्होंने एक पत्रकार वार्ता में बताया कि लोगों के सुझावों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर एक नया प्रसारण शुरू किया जा रहा है.

बीबीसी हिंदी प्रमुख अचला शर्मा ने बताया कि नए कार्यक्रम में युवाओं की रूचि का ख़याल रखा जाएगा.

 हमारे श्रोताओं में एक बड़ा प्रतिशत युवाओं का है और वो हमारे कार्यक्रमों में सबसे ज़्यादा रुचि लेते हैं
 
अचला शर्मा

उन्होंने कहा,"हमारे श्रोताओं में एक बड़ा प्रतिशत युवाओं का है और वो हमारे कार्यक्रमों में सबसे ज़्यादा रुचि लेते हैं. इनमें से अधिकतर ऐसे होते हैं जो अपने कैरियर की तैयारी में हैं या फिर पढ़ाई में लगे हुए हैं. इन्होंने हमें पिछली बार कई सुझाव दिए जिनको हमने गंभीरता से लिया है."

शिवकांत ने कहा,"नए कार्यक्रम में ज़्यादातर कलेवर इन्हीं विषयों पर होगा."

सवाल-जवाब

अचला शर्मा और शिवकांत
पत्रकार वार्ता में अचला शर्मा और शिवकांत शर्मा

बीबीसी टीम से संवाददाताओं की बातचीत के दौरान एफ़एम चैनलों और इनके बारे में बीबीसी की रणनीति की भी बात उठी.

बीबीसी हिंदी की दिल्ली ब्यूरो प्रमुख, सीमा चिश्ती ने इस बारे में कहा, "एफ़एम प्रसारण की अपनी सीमाएँ हैं. वर्तमान सरकार की नीतियों के मुताबिक समसामयिक विषयों के प्रसारण का अधिकार एफ़एम रेडियो स्टेशनों को नहीं है."

उन्होंने कहा,"दूसरे बीबीसी एक विदेशी संस्था है इसलिए भी हम अभी तक की नीतियों के अनुसार प्रसारण नहीं कर सकते."

उन्होंने कहा,"हम इसका इंतज़ार करेंगे कि सरकार अपनी नीतियों में बदलाव लाए और ऐसा संभव हो सके."

रेडियो

 हर संचार माध्यम की अपनी सुंदरता है. अख़बार चौबीसों घंटे तो नहीं छपता. फिर भी आप दिनभर ख़बरें देखने के बाद अगली सुबह अख़बार ज़रूर पढ़ते हैं
 
शिवकांत

संवाददादाता सम्मेलन में प्रसारण के विभिन्न माध्यमों के बीच रेडियो की प्रासंगिकता की भी चर्चा हुई.

सवाल ये उठा कि जब चौबीसों घंटे समाचार-माध्यमों पर समाचारों का प्रवाह हो रहा है तो ऐसे में रेडियो कितना प्रभावी हो सकता है.

इसके जवाब में शिवकांत जी ने कहा,"हर संचार माध्यम की अपनी सुंदरता है. अख़बार चौबीसों घंटे तो नहीं छपता. फिर भी आप दिनभर ख़बरें देखने के बाद अगली सुबह अख़बार ज़रूर पढ़ते हैं."

उन्होंने कहा कि कई समाचार माध्यम ख़बरों की तह में जाकर उनको प्रस्तुत करने का यत्न करते हैं और बीबीसी हिंदी भी ऐसा ही प्रयास करती है.

 
 
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