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बुधवार, 09 मार्च, 2005 को 01:21 GMT तक के समाचार
 
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अब पासवान पर चौतरफ़ा दबाव
 
लालू प्रसाद यादव
लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर रामविलास पासवान पर सीधा हमला शुरु कर दिया है
बिहार में राष्ट्रपति शासन तो लग गया है लेकिन अब वहाँ के राजनीतिक दलों में इसकी बेचैनी साफ़ नज़र आ रही है और दोषारोपण का दौर शुरु हो गया है.

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता लालू प्रसाद यादव और एनडीए में शामिल जनतादल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार दोनों ही राष्ट्रपति शासन की परिस्थियाँ पैदा करने का दोष लोकजनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान पर मढ़ रहे हैं.

उधर रामविलास पासवान अपने पहले के रुख़ पर क़ायम हैं कि न तो आरजेडी न भाजपा.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि लालू प्रसाद यादव बिहार की सत्ता गँवाने के बाद अब आरपार की लड़ाई लड़ेंगे.

कहा जा रहा है कि या तो लालू प्रसाद यादव कांग्रेस पर दबाव बढ़ाएँगे कि या तो रामविलास पासवान को राज्य में समर्थन देने के लिए राज़ी किया जाए या फिर उन्हें केंद्र सरकार में दरकिनार कर दिया जाए.

हालांकि लालू प्रसाद यादव ने ज़ाहिर तौर पर कहा है कि वे रामविलास पासवान को केंद्रीय मंत्रिमंडल से निकाले जाने की मांग नहीं रखने वाले हैं लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि आख़िरकार वे यही करेंगे.

उधर चुनाव परिणाम आने के बाद कुछ दिनों तक रामविलास पासवान को 'रामविलास जी' और 'पासवान जी' पुकार रहे लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर पासवान पर सीधा हमला शुरु कर दिया है.

सोमवार को आरजेडी नेता टेलीविज़न चैनलों पर हाथ में दीवार घड़ी लिए दिखाई दिए जिसका पेंडुलम हिला-हिलाकर वे पत्रकारों को बता रहे थे कि रामविलास पासवान इसी पेंडुलम की तरह हैं.

जनता दल यू का सवाल

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल जनता दल यूनाइटेड ने नेता नीतीश कुमार ने सोमवार को रामविलास पासवान पर खुला हमला करते हुए एक सीधा सवाल पूछा है.

नीतीश कुमार
नीतीश कुमार पूछ रहे हैं कि शेष 67 विधायक कहाँ से आएँगे

रामविलास पासवान ने आरोप लगाया था कि जनता दल यूनाइटेड ने सरकार बनाने के गंभीर प्रयास नहीं किए.

इस आरोप का जवाब देते हुए नीतीश कुमार ने कहा है कि रामविलास पासवान का रुख़ बहुत अस्थिर रहा और पहले तो वे आरजेडी और एनडीए विरोध का नारा लगाते रहे फिर वे एनडीए की जगह भाजपा का विरोध करने लगे.

उन्होंने पूछा कि जनता दल यूनाइटेड यदि पासवान के साथ जाना तय भी कर ले तो अपने 55 विधायकों के साथ सरकार किस तरह बनेगी जब बहुमत जुटाने के लिए शेष 67 विधायकों का पता नहीं है.

उल्लेखनीय है कि रामविलास पासवान के पास 29 विधायक हैं.

उन्होंने कहा कि हालांकि स्पष्ट जनादेश किसी को नहीं है लेकिन चुनावों परिणामों से साफ़ है लोग आरजेडी के ख़िलाफ़ हैं इसलिए उन सभी लोगों को साथ आना चाहिए जिन्होंने लालू शासन के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा है.

उधर एनडीए अपने पूर्व सहयोगी रामविलास पासवान को मनाने में जुटा हुआ है.

जनता दल यू नेता शरद यादव ने भी एक फ़ॉर्मूला रखा था जिसे पासवान ने नकार दिया है.

पासवान का जवाब

रामविलास पासवान ने सबसे पहले तो लालू प्रसाद यादव की घड़ी को जवाब दिया और कहा कि लालू जी को समझना चाहिए कि यदि पेंडुलम रुक जाएगा तो घड़ी भी रुक जाएगी.

उन्होंने अपने पुराने रुख़ को दोहराया कि वे आरजेडी और भाजपा के ख़िलाफ़ हैं और किसी भी क़ीमत पर इन दोनों दलों के साथ समझौता नहीं करेंगे.

दूसरी ओर उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की है. माना जा रहा है कि इस मुलाक़ात का ताल्लुक़ लालू प्रसाद यादव के साथ उनके तनाव से हो सकता है.

इस मुलाक़ात के बाद उन्होंने कहा है वे फ़िलहाल एक महीने कुछ नहीं बोलने वाले हैं लेकिन उन्हें लगता है कि बिहार में एक नया राजनीतिक समीकरण उभरेगा.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पासवान या तो केंद्र में अपना दर्जा बढ़ाना चाहते हैं या फिर बिहार में मुख्यमंत्री बनने का गणित बिठाने की कोशिश कर रहे हैं.

 
 
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