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भारत ने की श्रीलंका की मदद
 

 
 
पुल बनाने से लेकर मलबा साफ करने तक का काम किया भारतीय सैनिकों ने
भारतीय नौसैनिक पोत शारदा और यमुना देश की समुद्री सीमा पर गश्त लगाकर कोचि के बन्दरगाह पर पहुंचे ही थे कि उन्हें श्रीलंका जाने का आदेश मिला.

कुछ देर पहले ही सूनामी ने श्रीलंका में तबाही मचा दी थी.

जल्दी से जहाज़ में राहत का ज़रुरी सामान लाद कर चौबीस घंटे के अंदर ये जहाज़ श्रीलंका के दक्षिणी बन्दरगाह गाल पहुंच गए.

वहाँ इतनी तबाही मची थी कि राहत का काम शुरु ही नही हो पा रहा था. सडकें टूट गई थीं, रेल की पटरियां उखड गई थीं. लोगों ने बेघर हो कर स्कूलों और धार्मिक स्थलों में शरण ली थी.

कैप्टन एन के नायर ने बीबीसी को बताया,"गाल पहुँचते ही हमारे डॉक्टर और गोताखोर काम पर लग गए. लगभग सभी जगहों पर हेलिकाप्टर से सामान पहुँचाना पड़ा क्योंकि सारी सड़कें टूट गई थीं."

एक तरफ डॉक्टर काम में जुटे तो दूसरी तरफ नौसेना के गोताखोरों ने गाल बन्दरगाह की सफ़ाई शुरु की. तमाम टूटी हुई नावों का मलबा जो पानी में डूब गया था उसे निकालकर बन्दरगाह को फिर से चालू किया.

उधर भारतीय वायु सेना ने थल सेना के इंजीनियरों को उतारा. ये लोग भी काम में जुट गए.

बड़ी मदद

सीनीगामा गाँव जो कि बिल्कुल समुद्र के किनारे था, पूरी तरह नष्ट हो गया. जो लोग बच गए उन्होंने एक बौद्ध मंदिर में शरण ली हुई थी.

 अगर ये काम हमारे सरकारी लोग करते तो इसमें तीन साल लग जाते, भारतीय थल सेना ने ये काम तीन दिन मे कर दिया. हम लोग ही जानते हैं कि इस पुल की कितनी ज़रूरत है
 
सूनामी पीड़ित

भारतीय सैनिकों ने पीने के पानी और शौचालाय बनाए हैं. मन्दिर के बौध भिक्षु इतने प्रसन्न हैं कि वो सैनिकों के मनोरंजन के लिये हिन्दी भजन और फ़िल्मी गाने माइक्रोफोन पर बजाते हैं.

जब सैनिकों ने एक टूटा हुआ पुल बिना किसी बुल्डोज़र या क्रेन के बना कर तामाम गावों को मुख्य सडक से जोड़ दिया तो स्थानीय लोगों को बहुत सुविधा हो गई.

साठ वर्षीय सुमनदासा का कहना था,"अगर ये काम हमारे सरकारी लोग करते तो इसमें तीन साल लग जाते, भारतीय थल सेना ने यह काम तीन दिन मे कर दिया. हम लोग ही जानते हैं कि इस पुल की कितनी ज़रूरत है."

पूर्वी तट पर भी सूनामी ने बहुत तबाही मचाई. ट्रिंकोमाली, बाट्टीकोलोवा और अमपारा जिलों में बहुत ज़्यादा नुक्सान हुआ है.

ट्रिंकोमाली की बन्दरगाह पर लंगर डाले भारतीय जहाज़ यमुना के चार डाक्टर रोज़ निलावली और कुचुवेली में सैकडों मरीज़ों को देखते हैं.

भारतीय सैनिक न केवल लोगों का इलाज कर रहे हैं, उनके रेडियो और टेलिविज़न भी ठीक कर रहे हैं. शुरु के चार दिनों में तो सैनिकों ने जेनरेटर और पंप सेट ठीक किए.

श्रीलंका नौसेना के नीलावेली इकाई के प्रमुख कमांडर आईआर शूरवीरा का कहना है कि भारतीय सैनिकों की ईमानदारी बहुत प्रशंसनीय है.

एक साक्षात्कार के दौरान भारतीय सहायता के प्रति आभार प्रकट करते हुए राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने बीबीसी को बताया कि भारतीय सरकार ने बहुत समय पर मदद भेजी थी.

उन्होंने कहा,"भारत स्वयं सूनामी की चपेट में आया था, फिर भी उसने हमें सौ करोड़ रुपये की सहायता दी है. बहुत समय पर उनके डाक्टर और सहायताकर्मी भी पहुँचे."

 
 
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